
नागपुर- 17वीं लोकसभा के लिये 7वें चरण के मतदान के साथ चुनाव प्रक्रिया खत्म हो गई , अब कयास और चर्चाओं का बाज़ार गर्म है कि किसको कितनी सीटें मिलने जा रही है, कौन बनेगा प्रधानमंत्री?? लोगों की बात माने तो एक बड़ा तबका नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनते देखना चाहता है तो एक दूसरा धरा राहुल गांधी के नाम का हवाला देता नजर आता है। पर पिछले पांच सालों के NDA और नरेंद्र मोदी के कार्यकाल को देखे तो शुरुआत के कुछ दिनों के बाद कही ना कही गाड़ी पटरी से उतरनी शुरू हो जाती है जिन क्षेत्रीय दलों को लेकर NDA सत्ता में आई थी देश के मुखिया होने की हैसियत से मोदी के पास उनके साथ बैठक और मेल मिलाप के लिए समय का अभाव रहता है ,दलों के बार-बार मांग करने पर भी उन्हें मिलने का समय नहीं दिया जाता समय अभाव का हवाला देकर। ये हालात सिर्फ पार्टी के बाहर के ही नहीं है बल्कि खुद भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ लीडर और जुझारू कार्यकर्ताओं की हर मोड़ पर अनदेखी की भी है।
चाहे मामला आडवाणी का हो या मुरलीमनोहर जोशी या यशवंत सिंह सभी का आरोप की मोदी किसी की नहीं सुनते और हालात ये की भारतीय जनता पार्टी सिर्फ अमित शाह और नरेंद्र मोदी तक सिमट कर रह गई। नरेंद्र मोदी की छवि एक डिक्टेटर और यस बॉस करवाने से ज्यादा कभी उनके नेताओ के द्वारा बनी नहीं। दूसरी तरफ टिकट का बंटवारा हो या अन्य निर्णय पार्टी के ऊपर इसे थोपा गया ऐसा पहली बार हुआ कि भारत सरकार की जगह मोदी सरकार लिखा जाने लगा। पार्टी के अंदरूनी कलह और घमंडी नेताओं की एक नई परिपार्टी शुरू हो गई उसी वातानुकूलित रूम के कार्यकर्ताओं की बदौलत शाह और मोदी दोबारा सत्ता में आने का सपना पाल बैठें। पर चुनाव में जिस तरह का जनता का उबाल और गुस्सा देखने को मिला , अनुभवी नेताओं की मौत हुई या फिर उन्हें किनारे लगाया गया उससे पार्टी को बहूत नुकसान हुआ। खुद संघ के सूत्रों की माने तो संघ प्रमुख भी इस जोड़ी से बहूत खुश नहीं है।
दलों की तो पहले ही खटपट शुरू हो गई थी। अब चुनाव के ऐन पहले से अघोषित रूप से मोदी की जगह किसी और कोई लाने की मांग आवाज उठने लगी थी, जिसका परिणाम अब 23 मई के बाद देख सकते है। बीजेपी को कुल 150-60 के बीच सीट मिलने के आसार है ऐसे में सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा चाहिए जो नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नहीं मिलने वाला क्षेत्रीय दल नाराज है मोदी से। ऐसे में बीजेपी किसी ऐसे चेहरे को सामने करेगी जो, सबको मान्य हो, नितिन गडकरी और राजनाथ सिंह इसके लिए मुफ़ीद नजर आते है पर राजनाथ की छवि भी सबको लेकर चलने वालों की नहीं है वो बीजेपी के नीतीश कुमार है, ऐसे में गडकरी एक बेहतर पसंद और योग्यता वाले व्यक्ति है पार्टी के अध्यक्ष रह चुके है संघ के करीबी होने के साथ साथ सबसे ज्यादा परफॉर्मेंस देने वाले मंत्रालय के तौर पर इस सरकार का चेहरा रहे है। सभी दलों में उनकी पैठ भी है तो उनके नाम पर आम सहमति बन सकती है।
अब बात करते है की तो लोग राहुल गांधी के नाम पर चर्चा कर रहे है पर राहुल गांधी खुद को 2024 के लिए तैयार कर रहे है , ऐसे में UPA की तरफ से शरद पवार का नाम सामने आ सकता है हालांकि पवार ने सोनिया गांधी के प्रधानमंत्री बनने पर विरोध दर्ज किया था, आज के हालात उस दौर से अलग है क्योंकि आज की कांग्रेस और UPA में भी बदलाव हो रहे है। शरद पवार के नाम पर UPA में भी आम सहमति बन सकती है जोड़तोड़ में माहिर है जो सरकार बनाने के लिए अहम है, इसके अलावा सभी नेताओं से उनकी अच्छी दोस्ती है जो मददगार साबित होगी कांग्रेस के समर्थन से बनने वाली सरकार में। ममता बनर्जी और मायावती के नाम पर आम सहमति नहीं बन सकती ना उनकी काबिलियत है एक बड़े कुनबे को साथ लेकर चलने की, तो ऐसे हालात में महाराष्ट्र निर्णायक हो सकता दोनो दलों में देश के लिए नए प्रधानमंत्री का चुनाव करने के मामले में।
श्वेता रश्मि – पत्रकार ,राजनीतिक विशेषज्ञ
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