Published On : Thu, Dec 28th, 2017

टीएआईटी के परीक्षार्थी बेतुके प्रश्नों से हुए परेशान

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Maha TAIT Exam
नागपुर: डीटीएड , बीएड, डीएड करनेवाले विद्यार्थियों में (टीचर एप्टीटुड एंड इंटेलिजेंस टेस्ट) ( MAHA TAIT ) का पहला चरण समाप्त हो चुका है. इस ऑनलाइन परीक्षा में अर्थहीन प्रश्नों के कारण परीक्षा देनेवाले विद्यार्थियों में काफी नाराजगी देखने को मिली. जिसके कारण रिजल्ट में कमी आने के प्रमाण बढ़ने की आशंका को लेकर भी विद्यार्थी चिंतित हैं. राज्य परीक्षा परिषद् की ओर से राज्यभर में 12 से लेकर 21 दिसंबर 2017 तक टीएआईटी की परीक्षा ली गई थी. राज्य के करीब 2 लाख विद्यार्थियों ने इस परीक्षा के लिए आवेदन भरा था. आवेदन करने के समय भी कई विद्यार्थियों ने नाराजगी जाहिर की थी जो अब परीक्षा के बाद भी दिखाई दे रही है. शिक्षक भर्ती के लिए यह परीक्षा लगभग 8 वर्षों बाद ली गई है. जिसके कारण राज्य के लाखों डीटीएड , बीएड करके बेरोजगारी की मार झेल रहे उम्मीदवारों ने भी यह परीक्षा दी. उन्हें भी उम्मीद है कि इस पात्रता परीक्षा लेने के बाद सरकार जरूर शिक्षक भर्ती के पदों को भरेगी. इस ऑनलाइन परीक्षा में कई प्रश्नों को जबरन कठिन बनाया गया था, जिसकी जरूरत ही नहीं थी. विद्यार्थियों का कहना है कि एमपीएससी में भी इस तरह के प्रश्न नहीं पूछे जाते. जिस तरह से यह शिक्षक पात्रता परीक्षा में पूछे गए थे.

दिघोरी में रहनेवाले मनोज कोंडे ने बताया उनका डीएड 2011 में हो चुका है और बीएड 2014 में. उन्हें चंद्रपुर सेंटर दिया गया था. 200 प्रश्नों के लिए दो घंटे का समय दिया गया था. लेकिन एप्टीटुड के जो डायग्राम दिए गए थे, वह काफी परेशान करनेवाले थे. उदाहरण के तौर पर प्रश्नों में ऐसा पूछा गया था कि यह डाइग्राम आईने में कैसे आकार में दिखेगा. मनोज का कहना है कि पेपर को काफी खींचा गया था. डायग्राम भी क्लियर नहीं था. बड़ी बड़ी समरी दी गई थी. जिसको पढ़ने और फिर उसमें से जवाब ढूंढने के लिए कम से कम दस मिनट का समय लग रहा था. मनोज का कहना है कि पहले सीईटी थी, फिर टीईटी आई और अब महा टीएआईटी यह सभी परीक्षाएं सरकार उम्मीदवारों और विद्यार्थियों को बरगलाने के लिए ले रही है. उनका कहा है कि जब डीएड या बीएड किया जाता है तो विद्यार्थियों को दो साल का पाठ्यक्रम दिया जाता है और उसे लगभग 6 महीने तक किसी भी स्कूल में इंटर्नशिप के दौरान पढ़ाना होता है. उसके बाद भी इतनी पात्रता परीक्षाएं ली जाती हैं जिसकी जरूरत ही नहीं है. यह केवल सरकार का दिखावा भर है. मनोज का कहना है कि सरकार करीब 10 साल और शिक्षक भर्ती नहीं निकालेगी क्योंकि जो फिलहाल स्कूलें अभी सरकार बंद कर रही है उन शिक्षकों का ही समायोजन करने के लिए सालों लग जाएंगे. ऐसे में नए शिक्षक भर्तियों की उम्मीद कम ही है.

वाड़ी में रहनेवाले जय कांबले भी पिछले 8 साल से शिक्षक भर्ती की राह देख रहे हैं. उन्होंने भी शिक्षक भर्ती की उम्मीद मन में लेकर इस महीने महा टीएआईटी की ऑनलाइन परीक्षा दी थी. उनका कहना है कि प्रश्नों को बेवजह खींचा गया था. आखों की क्षमता जानने के लिए खूब छोटे छोटे अक्षरों में कुछ प्रश्न दिए गए थे. जिससे आखों की जांच हो सके कि आंखे ठीक है या नहीं. इन प्रश्नों की कोई जरूरत ही नहीं थी. कांबले ने उम्मीद जताई है कि इस परीक्षा के बाद पात्र उम्मदवारों को शिक्षक भर्ती में जगह मिलेगी.

राज्य के 67 केन्द्रों में करीब 1 लाख 97 हजार 520 विद्यार्थियों ने यह परीक्षा दी. रोजाना तीन सत्रों में यह परीक्षा ली गई. 200 अंकों की परीक्षा के लिए अभियोग्यता के लिए 120 अंकों और बुद्धिमत्ता के लिए 80 अंक थे. गणितीय क्षमता, तर्कसंगत क्षमता, गति और अचूकता, भाषिक क्षमता, वर्गीकरण, क्रमबद्धता, तर्क और अनुमान के सन्दर्भ के प्रश्न थे. सभी रिजल्ट दिसंबर के अंत तक आने की खबर है.

—शमानंद तायडे

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