Published On : Fri, Nov 10th, 2017

जजों के नाम रिश्वत पर SC की फटकार, कोई कितना ही ताकतवर क्यों न हो, इंसाफ जरूर होगा

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Supreme Court
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने अपने जजों के नाम पर रिश्वत लिए जाने के मामले को बेहद गंभीर करार देते हुए शुक्रवार को कहा है कि कोई कितना ही ताकतवर क्यों न हो, कानून से बच नहीं सकता है। इसलिए इस मामले में भी इंसाफ जरूर होगा। किसी को भी न्यायिक व्यवस्था को दूषित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की खंडपीठ ने कहा कि कोई भी इस केस की अहमियत से इनकार नहीं कर सकता है क्योंकि अत्यंत गंभीर किस्म के आरोप लगाए गए हैं।

सीबीआई इस मामले में छापे मार चुकी है और केस दर्ज किया जा चुका है। पीठ की कोशिश होगी कि इस मामले में न्याय हो। यह पीठ जजों के नाम पर रिश्वत लिए जाने के मामले में एक नई याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका कैंपेन फॉर ज्यूडिशियल एकाउंटेबिलिटी नामक एक एनजीओ ने दायर किया है।

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बृहस्पतिवार को इसी मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता कामिनी जायसवाल ने भी एक याचिका दायर की है, जिसकी सुनवाई पांच वरिष्ठतम जजों की संविधान पीठ करेगी। जस्टिस सीकरी की खंडपीठ ने ताजा याचिका को भी इसी संविधान पीठ के हवाले कर दिया है।

केंद्र सरकार और सीबीआई को नोटिस
खंडपीठ ने कहा कि इस मामले में विस्तार से जांच किए जाने की जरूरत है। इस बात पर भी विचार किया जाना चाहिए कि सीबीआई को जांच जारी रखने दिया जाए या जैसा कि याचिका में कहा गया है, इसके लिए एक एसआईटी का गठन किया जाए।

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याद रहे कि जस्टिस जे चेलमेश्वर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को इसी मामले में एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और सीबीआई को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया जाए, जिसकी जांच की निगरानी शीर्ष अदालत करे।

जस्टिस सीकरी ने कैंपेन फॉर ज्यूडिशियल एकाउंटेबिलिटी के वकील प्रशांत भूषण से कहा कि जिस तरह से यह याचिका उनके सामने लिस्ट की गई है, उससे उन्हें बहुत दुख हुआ है। जब 8 नवंबर को इस मामले का उल्लेख किया गया था तो कोर्ट ने कहा था कि इसकी लिस्टिंग किसी उचित पीठ के समक्ष की जाए तो फिर कोर्ट नंबर दो में बृहस्पतिवार को एक नई याचिका दायर करने की क्या जरूरत थी।

बकौल जस्टिस सीकरी, ‘अगर आपने कहा होता तो मैं उस पीठ से खुद को अलग कर लेता। आप तो मुझे बेहतर तरीके से जानते हैं’। इस पर प्रशांत भूषण ने कहा कि उन्हें माननीय न्यायाधीश से भी ज्यादा कष्ट पहुंचा है क्योंकि 8 नवंबर को रजिस्ट्री ने उन्हें सूचना दी कि यह मामला कोर्ट नंबर में दो में लिस्ट होना था लेकिन अब उसे किसी दूसरी पीठ में ट्रांसफर कर दिया गया है क्योंकि चीफ जस्टिस पहले ही ऐसा आदेश दे चुके थे।

खंडपीठ ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस सूरी और सचिव गौरव भाटिया के आवेदन को स्वीकार करते हुए उन्हें इस मामले में पक्षकार बनाए जाने को मंजूरी दे दी। इन दोनों याचिकाओं पर अगली सुनवाई 13 नवंबर को संविधान पीठ में होगी।

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