Published On : Wed, Nov 5th, 2014

यवतमाल : सजग रहकर आगे बढ़े, जल्दी तरक्की होगी – दयाशंकर तिवारी


द्वितीय दिपावली अभिनंदन व स्नेहमिलन को प्रतिसाद

Brahman Samaj
यवतमाल ।
इस युग में अगर सजग रहकर आगे बढ़े तो, जल्दी तरक्की होगी. अन्यथा बाबा आजम के जमाने की बैलगाड़ी की गति से हम जहां थें वहीं रहेंगे. शायद इसे बैलभारती कहा जाता है. ऐसे विचार नागपुर के राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त तथा पार्षद दयाशंकर तिवारी ने रखे. वे स्थानीय विदर्भ हाऊसिंग सोसायटी के सांस्कृतिक भवन में उत्तर भारतीय ब्राह्मण संगठन की ओर से आयोजित द्वितीय दिपावली अभिनंदन एवं स्नेहमिलन-2014 कार्यक्रम में बोल रहे थे. इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से निर्माही आखाड़े के महंत रामलखनदासजी महाराज उपस्थित थे.

उन्होंने कहा कि, 1977 में बनी मोरारजी देसाई की जनता पार्टी की सरकार में 1 से ज्यादा बुद्धिजीवी एकसाथ आ गए थे. जिसके फलस्वरूप वह सरकार बहुमत होने के बावजूद 5 वर्ष तक टीक नहीं पाई. इसपर उन्होंने कहा कि, बुद्धिजीवियों को अभिषाप मिला है कि, वे कभी एकसाथ नहीं रह सकते. उसी प्रकार उन्होंने बताया कि, पहले देश के नेताओं को विदेश में सन्मान मिलता था. जिसमें  पं. जवाहरलाल नेहरू भारत के प्रथम प्रधानमत्री थे तब वे अमेरिका गए थे. तो उनके अगवाई के लिए वहां के राष्ट्रपति आए थे. उन्होंने उनका स्वागत किया. इसका कारण तिवारी ने बताया कि, उस समय एक डॉलर का मूल्य एक रुपया था. मगर आज 1 डॉलर का मूल्य 61 रुपए हो गया है. उस समय तत्कालीन अमेरिकन राष्ट्रपति ने कहा था कि, हिंदुस्तान यह देश अमेरिका का बाप है. क्योंकि कोलंबस इंडिया को ढूंढने के लिए निकला था. अगर वह नहीं निकलता तो गलती से अमेरिका नहीं पहूंच पाता. इसीलिए अमेरिका की उपलब्धी भी भारत के कारण हुई है, ऐसा भी उन्होंने कहा.

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मगर आज हमारे नेता या राष्ट्रपति विदेश में जाते है तो उनके कपड़े निकालकर तलाशी ली जाती है. जिससे कितना क्रूर व्यवहार आज विदेशी कर रहें है, यह बताने की कोशिश की. उन्होंने ब्राम्हण समाज को एकत्रित करना बड़े परिश्रम का काम है. यह परिश्रम यवतमाल के युवाओं ने किया है. जिससे उन्होंने उनकी सराहना भी की. इस समय महंत रामलखनदास महाराज ने कहा कि,  सम्रदाय के प्रति सजग रहना अनिवार्य है. मगर आज कई लोग ऐसे देखे जाते है जो इर्षा करने में ही उनका जिवन व्यतित करते है. जिससे उनकी तरक्की कभी नहीं होती है. इर्षा को छोड़कर सकारात्मक विचार करते हुए खुद का और अपने समाज का विकास करने के लिए सलाह उन्होंने दी.

ब्राम्हण स्नेहमिलन देखकर वे गदगद हो गए है, ऐसा बोलना भी वे नहीं भूले. इससे पहले पूर्व प्राचार्य आर.पी. तिवारी ने भी कहा कि 20 वर्षपूर्व भी ब्राम्हण संगठन कुछ भी करने के दिशा में प्रयास किए गए थे.मगर कुछ कारणों से प्रतिसाद नहीं मिला था. मगर अब इतनी बड़ी संख्या में उपस्थिति देखकर वे खुषी से फूले नहीं समा रहें थे. इस कार्यक्रम में नगर परिषद के उपाध्यक्ष मनिष दुबे, संगठन के राष्ट्रीय युवा ईकाइ के पदाधिकारी अमित मिश्रा आदि के साथ सैकड़ों समाजवासी महिला एवं पुरुष उपस्थित थे. सभी मान्यवरों का स्वागत किया गया. कार्यक्रम की शुरुवात में महंत रामलखनदास महाराज के हाथों से दिप प्रज्वलन और  श्री गणेश, माता शारदा, भगवान परशुराम की प्रतिमा को माल्यार्पन किया गया. कार्यक्रम का संचालन संजय त्रिवेदी तो आभार ओमप्रकाश तिवारी ने माना.