Published On : Fri, Oct 2nd, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

14.15 ग्राम एमडी पाउडर जब्ती मामले में स्टेशनरी दुकानदार को जमानत

सह-आरोपी के कथित बयान के आधार पर हुई थी शाहिद अंसारी की गिरफ्तारी; विशेष एनडीपीएस अदालत ने जमानत मंजूर कर जांच में सहयोग के दिए निर्देश
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Nagpur Crime Branch Acts Against 21 Accused in 18 Operations

नागपुर – एमडी पाउडर की कथित खरीद-फरोख्त से जुड़े मामले में गिरफ्तार किए गए स्टेशनरी दुकान संचालक मोहम्मद शाहिद मोहम्मद इस्लाम अंसारी को नागपुर की विशेष एनडीपीएस अदालत ने जमानत मंजूर कर दी है। मामले की सुनवाई माननीय विशेष एनडीपीएस न्यायाधीश मनीष गनोरकर के समक्ष हुई। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शाहिद अंसारी को जमानत देते हुए जांच में सहयोग करने तथा अभियोजन पक्ष के गवाहों को प्रभावित नहीं करने के निर्देश दिए।

मामला 14 ग्राम 15 मिलीग्राम एमडी पाउडर की कथित बरामदगी से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, क्राइम ब्रांच के हेड कॉन्स्टेबल शेख नजीर की शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की थी। बताया गया कि 18 अगस्त 2026 को कोराडी थाना क्षेत्र के आर्य नगर स्थित जगदंबा रेजीडेंसी के पास पुलिस ने संदेह के आधार पर फरहान शेख नामक व्यक्ति को रोका था।

पुलिस द्वारा उसकी तलाशी और दोपहिया वाहन की जांच किए जाने पर कथित तौर पर 14 ग्राम 15 मिलीग्राम एमडी पाउडर बरामद हुआ। इसके बाद फरहान शेख को गिरफ्तार कर लिया गया। इस मामले में क्राइम नंबर 365/2026 दर्ज किया गया तथा आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8(सी), 22(बी) और 29 के तहत अपराध दर्ज किया गया।

पूछताछ में शाहिद अंसारी का नाम सामने आने का दावा
अभियोजन के अनुसार, फरहान शेख को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। इसी पूछताछ के दौरान उसने कथित तौर पर स्टेशनरी दुकान संचालक मोहम्मद शाहिद मोहम्मद इस्लाम अंसारी का नाम लिया। पुलिस का आरोप था कि फरहान ने शाहिद से एमडी पाउडर खरीदने की बात बताई। इसी आधार पर जांच आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने शाहिद अंसारी को भी इस प्रकरण में गिरफ्तार किया।

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शाहिद को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने उसे न्यायालय के समक्ष पेश किया और आगे की जांच के लिए तीन दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड (पीसीआर) की मांग की। हालांकि, बचाव पक्ष ने पुलिस की इस मांग का जोरदार विरोध किया।

पीसीआर का बचाव पक्ष ने किया विरोध
आरोपी शाहिद अंसारी की ओर से एडवोकेट कमल सतुजा और एडवोकेट कैलाश डोडानी ने अदालत के समक्ष पुलिस रिमांड का विरोध किया। बचाव पक्ष ने अदालत का ध्यान इस ओर दिलाया कि आरोपी को मुख्य रूप से सह-आरोपी फरहान शेख के कथित बयान के आधार पर इस मामले में जोड़ा गया है।

बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि शाहिद अंसारी पिछले कई वर्षों से स्टेशनरी की दुकान चला रहा है और उसके कब्जे से किसी भी प्रकार का मादक पदार्थ बरामद नहीं किया गया है। उसके पास से एमडी पाउडर अथवा अन्य कोई प्रतिबंधित पदार्थ जब्त होने का भी आरोप नहीं है।

एडवोकेट कमल सतुजा और एडवोकेट कैलाश डोडानी ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि केवल सह-आरोपी के कथित स्वीकारोक्ति बयान के आधार पर किसी व्यक्ति को इस तरह हिरासत में रखना उचित नहीं है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपी के खिलाफ प्रत्यक्ष रूप से ऐसा कोई ठोस भौतिक साक्ष्य सामने नहीं रखा गया है, जिससे उसकी गिरफ्तारी और पुलिस कस्टडी को आवश्यक ठहराया जा सके।

बचाव पक्ष की दलीलों पर सुनवाई के बाद अदालत ने पुलिस द्वारा मांगी गई पीसीआर को मंजूरी नहीं दी।

जमानत आवेदन पर हुई विस्तृत सुनवाई
इसके बाद आरोपी शाहिद अंसारी की ओर से जमानत आवेदन प्रस्तुत किया गया। जमानत आवेदन पर एडवोकेट कमल सतुजा, एडवोकेट कैलाश डोडानी और एडवोकेट अनमोल गोस्वामी ने अदालत के समक्ष आरोपी का पक्ष रखा।

बचाव पक्ष ने कहा कि शाहिद अंसारी का इस अपराध से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। वह वर्षों से स्टेशनरी व्यवसाय चला रहा है और जांच एजेंसी द्वारा उसके पास से कोई प्रतिबंधित पदार्थ बरामद नहीं किया गया। उसे केवल सह-आरोपी फरहान शेख के कथित बयान के आधार पर मामले में आरोपी बनाया गया है।

बचाव पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के चर्चित Toofan Singh फैसले का हवाला देते हुए अदालत के समक्ष कानूनी पक्ष रखा। बचाव पक्ष का कहना था कि सह-आरोपी के कथित स्वीकारोक्ति बयान के आधार पर अकेले किसी आरोपी को हिरासत में रखना कानून की कसौटी पर उचित नहीं माना जा सकता। ऐसे में शाहिद अंसारी की आगे की हिरासत आवश्यक नहीं है और उसे जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए।

अभियोजन ने बताया मामला गंभीर
वहीं, अभियोजन पक्ष की ओर से एपीपी विनोद हुकरे ने जमानत आवेदन का विरोध किया। अभियोजन ने अदालत के समक्ष कहा कि मामला मादक पदार्थ से संबंधित और गंभीर प्रकृति का है। जांच अभी प्रारंभिक चरण में है तथा मामले में आगे की जांच की जानी बाकी है।

अभियोजन की ओर से यह आशंका भी व्यक्त की गई कि यदि आरोपी को जमानत पर रिहा किया जाता है तो वह मामले से जुड़े गवाहों को प्रभावित कर सकता है अथवा जांच की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न कर सकता है। इसी आधार पर अभियोजन ने आरोपी की जमानत अर्जी खारिज करने की मांग की।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत का फैसला
मामले में बचाव पक्ष और अभियोजन की दलीलें सुनने के बाद माननीय विशेष एनडीपीएस न्यायाधीश मनीष गनोरकर ने शाहिद अंसारी को जमानत मंजूर कर दी।

अदालत ने आरोपी को जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अभियोजन पक्ष के गवाहों को प्रभावित नहीं करने और जांच प्रक्रिया में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

इस प्रकार 14 ग्राम 15 मिलीग्राम एमडी पाउडर जब्ती मामले में स्टेशनरी दुकान संचालक मोहम्मद शाहिद मोहम्मद इस्लाम अंसारी को अदालत से राहत मिली है। मामले की आगे की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है।

आरोपी शाहिद अंसारी की ओर से एडवोकेट कमल सतुजा, एडवोकेट कैलाश डोडानी और एडवोकेट अनमोल गोस्वामी ने पैरवी की।

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