Published On : Thu, Sep 27th, 2018

सोनेगांव तालाब सौंदर्यीकरण की सुनवाई 17 अक्टूबर तक स्थगित

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नागपुर: सोनेगांव तालाब की मालकियत नहीं होने के बावजूद मनपा की ओर से तालाब के सौंदर्यीकरण और सफाई के लिए जनता के करोड़ों रुपए खर्च किए जाने को लेकर याचिकाकर्ता प्रशांत पवार की ओर से हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई. याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत के आदेशों के अनुसार 5 मार्च 2018 को ली गई सुनवाई की जानकारी देते हुए मनपा को भेजे गए पत्र की जानकारी तो रखी गई, लेकिन इस पत्राचार में राज्य सरकार की ओर से कोई भी फैसला किए जाने का उल्लेख नहीं होने की आपत्ति याचिकाकर्ता की ओर से जताई गई. यहां तक कि मनपा को भी सुनवाई के दौरान ही राज्य सरकार की ओर से पत्र सौंपा गया जिससे न्यायाधीश भूषण धर्माधिकारी और न्यायाधीश मुरलीधर गिरटकर ने 17 अक्टूबर तक के लिए सुनवाई स्थगित कर दी.

अधिग्रहण पर लगी है अस्थायी रोक
विशेषत: भले ही सोनेगांव तालाब अधिग्रहण को लेकर एमआरटीपी की धारा 37 के अनुसार कार्यवाही हुई हो, लेकिन गत सुनवाई के दौरान अदालत के अगले आदेश तक इस संदर्भ में अमल नहीं करने के आदेश दिए गए, जिससे अब सोनेगांव तालाब के अधिग्रहण और अधिग्रहण के लिए टीडीआर देने की प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लग गई है. अदालत का मानना था कि सोनेगांव तालाब के मालिकों को टीडीआर देने के उद्देश्य से मनपा की ओर से जल सम्पत्ति का उपयोग बदलने के लिए कार्यवाही शुरू की गई है.

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एमआरटीपी एक्ट की धारा 31 (1) के तहत कार्यवाही की गई लेकिन अदालत के समक्ष प्रश्न है कि यदि जल सम्पत्ति पर किसी तरह का निर्माण नहीं हो सकता है तो ऐसी जमीन पर शहर के भीतर प्लाट का आकलन संभव नहीं है, जिससे यह टीडीआर का समर्थन नहीं करता है. अदालत का मानना था कि चूंकि ऐसी अवस्था में मालिक को निधि देना संभव नहीं है, अत: इस तरह की प्रक्रिया से जमीन का उपयोग बदला नहीं जा सकता है.

सरकार की ओर से सहयोग नहीं
बुधवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने आदेश में स्पष्ट किया कि आदेश के बावजूद सरकार की ओर से काफी देरी की जा रही है. यहां तक कि राज्य सरकार की ओर से सहयोग नहीं किया जा रहा है. बुधवार को सुनवाई के दौरान सोनेगांव तालाब के हिस्से की मालकियत रखने वाले डा. सदानंद थोटे की ओर से भी मध्यस्थता अर्जी दायर की गई, जिसे स्वीकृत कर हाईकोर्ट ने उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए प्रतिवादी के रूप में नोटिस जारी किया.

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गत सुनवाई के बाद अदालत ने सोनेगांव तालाब की वैधानिकता को लेकर क्या यह निजी सम्पत्ति है या फिर जल सम्पत्ति होने के कारण नियमों के अनुसार सरकारी सम्पत्ति है, इसे लेकर 12 मार्च को याचिकाकर्ता की उपस्थिति में सुनवाई लेने के बाद 2 माह के भीतर अदालत को रिपोर्ट पेश करने के आदेश नगर विकास विभाग सचिव को दिए थे. याचिकाकर्ता की ओर से अधि. केसरी और मनपा की ओर से अधि. जैमिनी कासट ने पैरवी की.

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