Published On : Sat, Apr 1st, 2017

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को धता बता रहे कुछ शराब विक्रेता

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नागपुर: पहली अप्रैल 2017 से देश भर के राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे से पांच सौ मीटर की दूरी तक स्थित देशी-विदेशी शराब की दुकानें न सिर्फ बंद हो गयीं, बल्कि संबंधित राज्य सरकार के राजस्व विभाग द्वारा उक्त दुकानों को सील कर उनके लाइसेंस जब्त कर लिए गए। नागपुर सहित पूरे महाराष्ट्र में भी सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का सख्ती से पालन करने का दावा राज्य सरकार की ओर से किया गया लेकिन असलियत कुछ और ही निकल कर आ रही है।

नागपुर शहर में उड़ रही आदेश की धज्जियां
नागपुर-ओबेदुल्लागंज राष्ट्रीय राजमार्ग पर नागपुर शहर की हद में नूपुर वाइन शॉप नामक शराब बिक्री दुकान है। इस दुकान के मालिक ने कल रात बारह बजे दुकान बंद करने के बाद एक फलक दुकान के सामने टांग दिया है, जिस पर उसने लिखा है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद वाइन शॉप बंद तो की जा रही है, लेकिन इसे आसपास किसी और जगह एक महीने के भीतर शुरु किया जाएगा। इस फलक पर दुकान के मालिक ने अपना मोबाइल नंबर भी दिया है और कहा है कि जो भी ग्राहक चाहे उससे संपर्क कर सकता है। संपर्क करने की बात का मतलब आसानी से समझा जा सकता है। उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के मुताबिक शराब की दुकान बंद करने के साथ-साथ इस तरह के किसी प्रलोभन अथवा विज्ञापन को भी प्रतिबंधित किया गया है। पर यह दुकानदार इतनी हिम्मत क्यों कर पा रहा है और राजस्व विभाग तथा प्रशासन के आला अधिकारी इस मामले में चुप क्यों हैं? यह सवाल हर आम आदमी पूछ रहा है।

दुकानदार भाजपा नेताओं के संपर्क में
बताया जाता है कि नूपुर वाइन शॉप का संचालक भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं का करीबी है। महानगर पालिका में कई भाजपा पदाधिकारियों की मदद से वह अपनी शराब दुकान को बचाने के लिए हाथ-पैर मार चुका है। बरसों पहले भारत संचार निगम लिमिटेड में कई तरह के भ्रष्टाचार को अंजाम देने में संलिप्त रहा है। सूत्र बताते हैं कि बदनामी के डर से फिलहाल मनपा के में बैठे भाजपा पदाधिकारी उससे कन्नी काट रहे हैं, लेकिन भीतर ही भीतर जरुर कुछ खिचड़ी पकाई जा रही है।

महाराष्ट्र सरकार का दोहरा रवैया
महाराष्ट्र सरकार राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे पांच सौ मीटर तक स्थित शराब की दुकानों को बंद कराने और उन्हें सील करने के मामले में दोहरा रवैया अपना रही है। राज्य सरकार के गृह विभाग द्वारा राज्य के राजस्व आयुक्त को पत्र लिखकर कहा गया है कि राज्य सरकार के अधीन आने वाले राजमार्गों के किनारे से शराब की देशी-विदेशी दुकानें न हटाई जाएं और उनके लाइसेंस भी रिन्यू किए जाएं। इस पत्र में केरल सरकार के उस निर्णय का हवाला दिया गया है, जिसके अनुसार केरल राज्य सरकार ने वहां के स्टेट हाइवे के किनारे स्थित शराब की दुकानों को यह कहकर हटाने से इंकार कर दिया है कि सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय सिर्फ राष्ट्रीय राजमार्गों यानी नैशनल हाइवे के किनारे की दुकानों पर ही लागू है।
बताया जाता है कि महाराष्ट्र सरकार अपने इसी दोहरे रवैये से भाजपा के प्रति निष्ठा रखने वाले शराब विक्रेताओं की दुकान बचाने का कुचक्र रच रही है।

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इस बीच आज शाम नागपुर जिले के शराब विक्रेताओं के संगठन की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गयी है। माना जा रहा है कि अपने साथियों की दुकान बंद किए जाने के फैसले को लेकर संगठन नाराज है और आज विरोधस्वरुप तीन दिन के ड्राई डे की घोषणा कर सकता है।

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