Published On : Fri, Jun 29th, 2018

अंततः स्मार्ट सिटी प्रकल्प विशेष सभा के कटघरे में

Kishor Jichkar

नागपुर: पिछले २ दशक से मनपा में जितने भी प्रकल्प घोषित होने के बाद शुरू हुए,इनमें से एक भी सफलतापूर्वक पूर्ण नहीं हुआ.फिर मनपा की निधि से यो या राज्य-केंद्र सरकार की निधि से निर्माणकार्य शुरू किया गया हो। इस तरह के अनुभव को ध्यान में रख मनपा में कांग्रेस के मनोनित नगरसेवक किशोर जिचकर ने आगामी २ जुलाई को होने वाली मनपा की विशेष सभा हेतु स्मार्ट सिटी प्रकल्प की वर्त्तमान स्थिति और कार्यप्रणाली से सम्बंधित सवाल खड़े कर मनपा में बवाल मचा दिया।

जिचकर ने विशेष सभा के नियमों के अधीन रहकर निगम सचिव को नोटिस के तहत उनके विषय को विशेष सभा की सूची में शामिल करने की लिखित निवेदन दी.तब पता चला कि यह सवाल पहले से ही मनपा में चर्चित था,जिसे आम या विशेष सभा में सत्तापक्ष के एक पूर्व महापौर द्वारा उठाया जाने वाला था.

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जिचकर के स्मार्ट सिटी सम्बन्धी सवाल मनपा कर शहर के लिए काफी अहमियत रखते हैं.
१.- स्मार्ट सिटी प्रकल्प मनपा प्रशासन के अधीनस्त शुरू हैं या फिर सीधे केंद्र या राज्य सरकार के मार्गदर्शन में शुरू हैं.
२.- स्मार्ट सिटी के सीईओ सह आजतक प्रकल्प में नियुक्त अधिकारी कर्मियों की नियुक्ति किसने की और नियमावली की जानकारी मांगी।
३.- स्मार्ट सिटी के अधिकारी और कर्मियों का मासिक वेतन और किस मद से वेतन दिया जाता हैं.
४.- स्मार्ट सिटी के सीईओ और मनपा आयुक्त में पद और जिम्मेदारी मामले में कौन बड़ा और दोनों के मासिक वेतन सह अन्य लाभ का खुलासा करें।
५.- मनपा में कार्यरत अधिकारी-कर्मी जिन्हें सीधे स्मार्ट सिटी प्रकल्प में समाहित किया गया,नियमावली क्या हैं।
६.- स्मार्ट सिटी के लिए मंजूर अनुदान/निधि और अबतक मनपा खजाने में आई निधि का विवरण।
७.- स्मार्ट सिटी प्रकल्प के तहत शुरू हुए कार्यो का ब्यौरा सह उन पर हुए खर्च का विवरण दें.

उल्लेखनीय यह हैं कि स्मार्ट सिटी प्रकल्प का सीईओ की नियुक्ति मनपा प्रशासन ने की ,न कि मनपा पदाधिकारियों ने.शायद इसलिए सीईओ की कार्यशैली सत्तापक्ष को हजम नहीं हो रही.इसी दौरान जब सत्तापक्ष तह में गई तो जानकारी मिली की सीईओ का वेतन मनपायुक्त से २ गुणा से अधिक होने की जानकारी प्रकाश में आई.जाने-अनजाने में संबंधितों ने पदाधिकारियों के हस्ताक्षर करवाकर मनमाफिक वेतन बढ़वा लिए थे.

सीईओ सह उनके नुमाइंदों को सबक सिखाने की योजना चल ही रही थी कि विपक्ष को मामले की हवा लग गई और उन्होंने विशेष सभा के लिए प्रशासन को नोटिस दे मामला उठा दिया।

अब देखना यह हैं कि इस मामले को सत्तापक्ष कितना भुनाता हैं.

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