Published On : Sat, Oct 23rd, 2021
By Nagpur Today Nagpur News

मुंडे कार्यकाल से सत्तापक्ष आयुक्त से सीधा संघर्ष नहीं कर रहे

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– नतीजा उसके कार्यकाल में तत्कालीन महापौर द्वारा आमसभा में दिए गए निर्देशों का आजतक पालन नहीं हुए,जिससे मुंडे समर्थक कर्मी की तूती बोल रही,ये कर्मी वर्तमान आयुक्त की आड़ में अपनी रोटी सेकने के अलावा अतिरिक्त आयुक्तों पर भी धौंस जमा रहे

नागपुर – वर्ष 2020 के पहले माह में सम्पूर्ण राज्य में सबसे विवादास्पद अधिकारी तुकाराम मुंडे की राज्य सरकार ने नागपुर मनपा में भाजपा की सत्ता को परेशान करने के लिए तैनात किया। इस मुंडे ने कुछ गुर्गे बनाये,जिसमें अधिकारी,तथाकथित मनपा चिकित्सक और अपने वाहन चालक।इन्होंने अपने अल्प कार्यकाल में जाते-जाते अपने वाहन चालक को क्लार्क बना दिए और सत्तापक्ष के निर्णय को दरकिनार कर चलते बने,जिस पर आज भी रोक लगी है,नतीजा वर्तमान आयुक्त का तथाकथित सहायक उसका फायदा उठाते हुए अतिरिक्त आयुक्तों पर धौंस जमा रहा।यह जानकारी सत्तापक्ष को होने के बावजूद क्यूंकि 4 गुटों में भाजपाई विभक्त हैं इसलिए सभी के सभी चुप्पी साधे उनकी मनमानी को हवा दे रहे।

याद रहे कि मुंडे ने अपने कार्यकाल में भाजपा को इतना परेशान किया कि सर्वत्र उनकी थूं थूं होने लगी,ऐसे में इस बदनामी से बचने के लिए सत्तापक्ष ने कोरोना काल मे मैराथन आमसभा ली,जिसमें मुंडे के गैरकानूनी करतूतों को सामने लाकर उन्हें ललकारा। सभा के अंत में तत्कालीन महापौर ने आधा दर्जन से ज्यादा मुंडे नित के खिलाफ मुद्दों पर कठोर निर्णय लिये।

इसके बाद मुंडे पर कई आपत्तिजनक मामले थाने/न्यायालय में दर्ज हुए। सरकार ने मुंडे को इससे से बचाने के लिए भाजपा नेताओं से गुप्त समझौता किया,वह यह कि मुंडे के किसी भी निर्णय और उनके सहयोगियों पर कोई भी कार्रवाई नहीं होगी,उनके किसी भी निर्णय को बदला नहीं जाएगा और आमसभा के निर्देशों को उठाने की कोशिश नहीं की जाएगी। इन शर्तों पर सहमति देने के बाद मुंडे का तबादला किया गया और उनकी जगह उनके समर्थक को मनापायुक्त बनाया गया।

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मुंडे की जगह पर आए आयुक्त राधाकृष्णन बी को मनपा में आए काफी माह हो गए लेकिन उनके बाद से किसी भी सत्ताधारी ने पूर्व में लिए गए निर्णयों को अमल में लाने के लिए प्रयास नहीं किया। वर्तमान में सत्तापक्ष के पदाधिकारी आयुक्त से सीधा संघर्ष करने से बच रहे,ताकि उनका कार्यकाल खराब न हो जाए, उन्हें पक्ष में लेकर अपने उद्देश्यों की पूर्ति कर रहे। जब कभी आयुक्त/प्रशासन पर हमला बोलना हो तो विपक्ष के नगरसेवकों से विरोध करवा रहे।

उल्लेखनीय यह है कि इस चक्कर में मुंडे समर्थक प्रमोद हिवसे मनपायुक्त कार्यालय में बैठकर अतिरिक्त आयुक्त से लेकर नीचे के अधिकारी सह नगरसेवकों पर धौंस जमा रहा।संभवतः इसकी आयुक्त को भनक नहीं है,संभवतः आयुक्त ने भी इसे ही छूट दे रखी है। जिसका वह भरपूर फायदा उठा रहा। आयुक्त का सहायक होने से अतिरिक्त आयुक्त भी उसकी शिकायत आयुक्त से नहीं कर रहे। फिलहाल हिवसे से सभी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से परेशान है।

उक्त घटनाक्रम से सत्तापक्ष-विपक्ष के दिग्गज वाकिफ है,लेकिन उनका काम निकल रहा,इसलिए वे हिवसे को बर्दास्त कर रहे। मुंडे और मुंडे समर्थक के खिलाफत करने वाले सत्ताधारी नेताओं में 4 गुट निर्माण हो गया। जिसमें से 2 गुट के नेता पदाधिकारी है तो 2 गुट के नेता पूर्व पदाधिकारी है। इन सभी गुट का एक दूसरे से पट नहीं रह,नतीजा सभी एक दूसरे के सर ठीकरा फोड़ रहे।

क्यूंकि सत्तापक्ष नेताओं में से किसी से मुंडे मामले में गुप्त समझौता हो चुका था इसलिए अन्य नेताओं को प्रलंबित मामला उठाने नहीं दे रहे,दूसरे पदाधिकारी शुरुआत से ही एकला चलो में विश्वास करते है इसलिए आज भी एकला ही चल रहे।इससे आज भी मुंडे समर्थको की खुलेआम मनमानी चल रही,ऐसे में आयुक्त की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही।

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