Published On : Mon, Jun 19th, 2017

वोट की राजनीति के लिए दलित कैंडिडेट का समर्थन नहीं: शिवसेना

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मुंबई:
भाजपानीत एनडीए की तरफ से बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद का नाम घोषित करने के बाद शिवसेना ने अपनी भूमिका स्पष्ट नहीं की है। शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कहा है कि यदि वोट की राजनीति के लिए दलित उम्मीदवार उतारा गया है तो शिवसेना समर्थन नहीं देगी। लेकिन, यदि देशहित के लिए यह निर्णय लिया गया है तो समर्थन देने में कोई हिचक नहीं है। शिवसेना मंगलवार को इस पर मंथन बैठक करेगी। उसके बाद राष्ट्रपति पद के लिए एनडीए की ओर से घोषित उम्मीदवार को समर्थन देने या न देने का फैसला करेगी।

शिवसेना अध्यक्ष ने सोमवार की शाम पार्टी के 51वें स्थापना दिवस पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वोट की राजनीति देश को रसातल में ले जाएगा। मत की खातिर दलित को उम्मीदवार बनाया गया है तो शिवसेना समर्थन नहीं करेगी लेकिन अगर इसमें राष्ट्रीय हित समाहित है तो समर्थन देने में कोई गुरेज नहीं है। माना जा रहा है कि शिवसेना राष्ट्रपति पद के लिए हिंदुत्ववादी चेहरा नहीं देने से नाराज है।

शिवसेना ने राष्ट्रपति पद के लिए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और उसके बाद कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन का नाम सुझाया था जिस पर भाजपा की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी। भाजपा की ओर से रामनाथ कोविंद का नाम घोषित होने के बाद अपनी त्वरित प्रतिक्रिया में शिवसेना प्रवक्ता संजय राऊत ने कहा कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने उद्धव ठाकरे को फोन कर राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नाम की जानकारी दी थी।

उन्होंने कहा कि आगामी दो दिन में शिवसेना नेताओं के साथ बैठक होगी उसके बाद पार्टी अपनी भूमिका जाहिर करेगी। बता दें कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह तीन दिवसीय मुंबई दौरे पर आए थे और रविवार को सुबह उद्धव ठाकरे के घर मातोश्री गए थे। उन्होंने उद्धव ठाकरे से करीब डेढ़ घंटे बातचीत की थी लेकिन, तब भी शिवसेना ने राष्ट्रपति चुनाव में समर्थन के लिए कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया था।

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