Published On : Wed, Sep 14th, 2016

“ड्रोन” का प्रयोग असफल व सम्पूर्ण नीलामी प्रक्रिया संदेह के घेरे में

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नागपुर: शिवसेना नेता वर्द्धराज पिल्ले ने रेती घाट के नीलामी सह निरिक्षण व दोषी घाटधारकों पर दोरंगा कार्रवाई करने का आरोप लगाया।लगाए गए आरोप में कहा गया कि किसी विशेष को मदद के लिए जिलाधिकारी कार्यालय सक्रिय है.

पिल्ले के अनुसार वर्ष २०१५-१६ के लिए नागपुर जिलाधिकारी ने ५७ रेती घाटों के नीलामी हेतु ई-निविदा प्रकाशित किया था. इस सन्दर्भ में उच्चतम न्यायलय के आदेशानुसार पर्यावरण विभाग की अनुमति ली गई. पर्यावरण विभाग ने ३ दिसंबर २०१५ और १६ जनवरी २०१६ को अनुमति देते वक़्त कुछ नियम-शर्त रखी थी. इसमें एक शर्त यह थी कि रेती का उत्खनन मनुष्यबल से ही की जाएंगी और उत्खनन के लिए मशीन का उपयोग नहीं किया जायेगा साथ ही घाट के खरीददारों से २% बैंक गैरेंटी ली जाएगी, इसके अलावा सम्पूर्ण नीलाम जगह के २०% हिस्से पर या फिर आवाजाही मार्ग पर घाट-धारक को वृक्षारोपण जिला वन अधिकारी के समक्ष करना पड़ेगा.

वर्द्धराज पिल्ले ने आगे कहा कि जिला प्रशासन द्वारा जिले के रेती घाटो पर हो रहे अवैध उत्खनन रोकने के लिए “ड्रोन” सर्वेक्षण का उपयोग करने का निर्णय लिया गया था. यह “ड्रोन” सर्वे के लिए नागपुर के एम्बेडेड क्रिएशन से मात्र २ लाख रूपए किराये पर लिया गया. लेकिन सवाल यह उठता है कि मात्र २ लाख रूपए में करोडों के रेती घाटों की सकारात्मक निगरानी मुमकिन नहीं है.

पिल्ले ने शंका जताते हुए कहा कि नागपुर जिले की रेती घाट नीलामी प्रक्रिया (ई-टेंडरिंग) का ठेका गुजरात की एक कंपनी तो रेती परिवहन करने वाली वाहनों की “अनुमति पत्र’ (रॉयल्टी बुक) छापने का ठेका पुणे की एक कंपनी तथा मात्र २ लाख रूपए से “ड्रोन” द्वारा घाटों का निरिक्षण का जिम्मा जिलाधिकारी कार्यालय की कार्यप्रणाली पर ऊँगली उठना लाजमी है.

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पिल्ले ने बताया कि जिन घाटों से रेती उत्खनन शुरू हुए ५ माह बीत गए, अब जाकर उन घाटों की निगरानी के लिए “ड्रोन” भेजा गया. माथनी, वारेगांव, पालोरा, जूनी कामठी जैसे छोटे-छोटे घाटों पर “ड्रोन” से निगरानी कर अवैध कृत पर कार्रवाई की गई और बड़े-बड़े रेती घाटों (पिपला, वाकी, नेरी आदि) पर छोटे-छोटे घाट मालिकों के खिलाफ आवाज उठाने पर ‘ड्रोन” से निरिक्षण करवाया गया. वहाँ अवैध कृत मिला, लेकिन जिलाधिकारी कार्यालय ने तत्काल कार्रवाई करने की बजाय १५ दिन का कारण बताओ नोटिस जारी किया. फिर घाटों को बंद किया गया. इस बीच सैकडों ट्रक रेती उठ चुके थे.

पिल्ले ने आगे बताया कि “ड्रोन” उन घाटों (पालोरा) पर भी निरिक्षण किया, जिन घाटों का टेंडर लेने वाले को न कब्ज़ा दिया गया और न ही रॉयल्टी बुक उन्हें दी गई.

उल्लेखनीय यह है कि मई २०१६ में जोन-५ के उपायुक्त अविनाश कुमार ने कई रेती घाटों का निरिक्षण कर कार्रवाई की थी, लेकिन जिला प्रशासन ने घाट मालिकों पर कोई भी कार्रवाई करके अपनी कार्यप्रणाली पर उंगलिया उठाने का मौका दे दिया.

– राजीव रंजन कुशवाहा

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