Published On : Fri, Nov 9th, 2018

माध्यमिक शिक्षणाधिकरी की ‘मनमर्जी ‘: पहले दी मान्यता और अब दबाव में भेजा प्रिंसिपल को मान्यता रद्द करने का पत्र

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सुभानिया उर्दू हायस्कूल के खिलाफ आरटीई कार्यकर्ता ने हाईकोर्ट में डाली याचिका

नागपुर: नागपुर क़े शिक्षणाधिकारी कार्यालय में चल रही मनमर्जी कारोबार से शिक्षा विभाग की हालत ख़राब होने की सभी तरफ चर्चा हो रही है. इस बीच नागपुर शिक्षा विभाग के माध्यमिक शिक्षणाधिकारी कार्यालय के अधीनस्थ और एक बड़े स्कूल का काला चिट्ठा सूचना के अधिकार में सामने आ चुका है. इससे माध्यमिक शिक्षणाधिकारी और शिक्षा विभाग अब सकते में आ चुके हैं. जानकारी के अनुसार नागपुर के इतवारी स्थित सुभानिया उर्दू हायस्कूल क़े प्रिन्सिपल के प्रस्ताव संबंधी डाक्यूमेंट्स माध्यमिक शिक्षण विभाग को प्राप्त होने पर कार्यालय के लिपिक, अधीक्षिका औए संबंधित उपशिक्षणाधिकारी जैसे दर्जा प्राप्त अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर संच को मान्यता दी. 2016-2017 के अनुसार इस स्कूल को 6 जून 2018 से नियमित प्रिन्सिपल की पद नियुक्ती में बड़ा भ्रष्टाचार होने की चर्चा शुरू हो चुकी है .

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सूचना अधिकार कार्यकर्ता महासंघ के जिला सचिव आरिफ पटेल के अनुसार अनियमित प्रिन्सिपल की फाईल आवक जावक से लिपिक, अधीक्षक, प्रभारी उपशिक्षणाधिकारी और माध्यमिक शिक्षणाधिकारी इन अधिकारियों ने पहले प्रस्ताव ठुकरा कर और बाद में फिंर से इसी प्रस्ताव पर संमति देकर कागजपत्रों की बिना जांच पड़ताल किए संच मान्यता 2016-2017 को मंजूरी दी. इस बड़े भ्रष्टाचार के माध्यम से प्रिन्सिपल पद की मान्यता स्कूल के प्रिंसिपल को प्रदान करके सरकार और शिक्षा विभाग की आर्थिक लूट की है. यह गंभीर भ्रष्टचार जनता और अधिकारियों के सामने खुलते ही माध्यमिक शिक्षा विभागाने इस मामले पर पर्दा डालने के उदेश्य से उस प्रिन्सिपल की पद की मान्यता आनन फानन में रद्द कर दी. लेकिन पद रद्द होने के बाद भी सुभानिया हायस्कूल के प्रिंसिपल नदीम सरवर खान स्कूल के वेतन देयक, अन्य आर्थिक और प्रशासकीय कार्य में अभी भी हस्ताक्षर कर रहे हैं. प्रिन्सिपल को माध्यमिक शिक्षा विभाग के किसी भी कार्यवाहि का कोई अधिकार नहीं है और सरकार की दिनदहाड़े आर्थिक लूट प्रिंसिपल की ओर से की जा रही है .

प्रिन्सिपल पद की मान्यता तारीख 31 ऑगस्ट 2018 के पत्र नुसार रद्द होने के बाद भी उनके आर्थिक व प्रशासकिय कार्य शिक्षा विभाग के लिपिक, अधीक्षक, प्रभारी उप-शिक्षणाधिकारी और माध्यमिक शिक्षणाधीकारी इनके आशीर्वाद से अभी भी शुरू ही है. इस स्कूल के मामले के जैसे ही जिले के अन्य निजी अनुदानित स्कूलों की अनियमितता पर माध्यमिक शिक्षणाधीकारी शिवलिंग पटवे कैसे लगाम लगाते हैं, इस विषय पर स्थानीक सभी राजकीय और सामाजिक सर्कल में चर्चा शुरू हो चुकी है . आरिफ पटेल ने बताया कि सुभानिया हाय स्कूल की धांदली और भ्रष्टाचार को सामने लाने में माध्यमिक शिक्षा विभाग से सूचना के अधिकार में प्राप्त जानकारी की बहुत मदद हुई है. फिलहाल इसी स्कूल के अन्य गैरकानूनी विषयों पर नागपुर के उच्च न्यायलय में सूचना अधिकार कार्यकर्ता महासंघ के आरिफ पटेल और शेखर कोलते द्वारा याचिका दाखल की गई है. जिस पर न्यायालय की छुट्टियां समाप्त होते ही सुनवाई होने की संभावना है. अभी के इस ताजा मामले में भी शिक्षा विभाग और मंत्रालय में लिखित शिकायत की जाएगी और कार्यवाही न होने पर इस विषय में भी उच्च न्यायलय में जल्द ही याचिका दाखल की जायेगी ऐसी जानकारी आरिफ पटेल और शेखर कोलते ने दी.

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इस बारे में माध्यमिक शिक्षणाधिकारी शिवलिंग पटवे से कई बार मोबाइल द्वारा संपर्क करने की कोशिश की गई और उन्हें सन्देश भी भेजा गया लेकिन उनकी तरफ से कोई भी प्रतिसाद नहीं मिला.

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