
मुंबई में दो दशकों से भी अधिक समय से सक्रिय रहकर जटिल रोगों के मरीजों को ज़िंदगी बांटने वाले एक भरोसेमंद शख़्स थे साइंटिस्ट मुनीर ख़ान. 6 अक्टूबर 2026 को उन्होंने आखिरी सांस ली. उनके निधन से शोक का माहौल है. दिवंगत मुनीर खान के योगदान को देखते हुए यही कहा जा सकता है कि उन्हें जो स्थान मिलना चाहिए था वह संभवतः नहीं मिल पाया. इसके बावजूद उन्होंने बिना किसी भेदभाव के अपनी इज़ाद की गई चिकित्सा बॉडी रिवाइवल से हर किस्म की बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को संजीवनी देते रहे. उनके निधन से एक युग समाप्त हो गया. नागपुर टुडे और आमची मुंबई टुडे की तरफ़ से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि.
एक संक्षित नज़र उनके सफ़र पर डालते हैं.
राजस्थान के कोटा निवासी मुनीर ख़ान मानवता की सेवा का व्रत लेकर 1998 में मुंबई आ गए और तब से बिना रुके लगातार असाध्य बीमारियों के मरीज़ों को जीवनदान देने का काम में जुटे रहे.
मुंबई से शुरू हुआ यह सफ़र बदस्तूर जारी रहा. बॉडी रिवाइवल के जनक के रूप में उन्होंने जटिल बीमारियों से अनगिनत लोगों को मौत के मुंह से निकाला जिसने मेडिकल साइंस तक को अचंभित किया.
बॉडी रिवाइवल दुनिया के अनेक हिस्से में नवजीवन एक उम्मीद के रूप में विस्तारित और प्रचारित हो चुका है. मुनीर ख़ान सिर्फ एक साइंटिस्ट होते तो शायद भीड़ में शामिल होते, मगर उनके हाथ में शिफ़ा थी. उनकी पहचान बस इस बात से की जाती थी कि हर इलाज से मजबूर होकर जब आख़िरी वक्त दस्तक देने लगता है तब उनकी इज़ाद की हुई बॉडी रिवाइवल की ख़ुराक के ज़रिए अनेक जिंदगियां बच जाती थीं. साइंटिस्ट मुनीर खान के अंदर सेवा के प्रति गहरे किस्म जज़्बा था. ज़रूरतमंदों की मदद बढ़-चढ़कर करने में उन्हें आनंद आता था. गरीबों की शादी में आर्थिक मदद, यतीमों का लालन-पोषण और सामाजिक संस्थाओं को अनेक तरह से मदद करते हुए उन्हें लगातार देखा जाता था. वैष्णवी चैरिटेबल ट्रस्ट को मुनीर खान ने एम्बुलेंस डोनेट कर ऐसा संदेश दिया कि समय रहते किसी की जान बचाने में एम्बुलेंस की कितनी बड़ी भूमिका होती है. कोई यूं ही मुनीर ख़ान नहीं बन जाता. इस मुकाम तक पहुंचने के पीछे होती है एक मेहनत, एक सच्ची और अच्छी सोच और शोध की गहरी समझ के साथ सेवा की भावना.
बॉलीवुड हो, राजनीतिक जगत हो, बिजनेस की दुनिया हो या आम आदमी की अपनी दुनिया, मुनीर ख़ान बिना किसी भेदभाव के सबके साथ एक सरीखा व्यवहार करते थे.
अनेक सम्मानों से सम्मानित हो चुके साइंटिस्ट मुनीर खान जिस सेवा भाव से दुनिया की सेवा कर रहे थे, ऐसे में कहा जा सकता है कि इनके सम्मान से खुद सम्मान भी सम्मानित हो जाता था. उनके योगदान को देखते हुए अनेक संस्थाओं ने उन्हें सम्मानित किया.
2003 में मुंबई लायंस क्लब की तरफ़ से नाना चूड़ासमा ने साइंटिस्ट मुनीर खान को समाज श्री अवार्ड से सम्मानित किया.
2005 में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री डॉ रामदास ने मसीहा उल मुल्क हकीम अजमल अवार्ड से सम्मानित किया।
2009 में चेन्नई में ऐरकोट के माननीय माननीय प्रिंस थिरु नवाब मुहम्मद अब्दुल अली ने वाइब्रेंट इंडियन अवार्ड देकर सम्मानित किया।
2009 में तमिलनाडु के महामहिम राजयपाल सुरजीत सिंह बरनाला ने स्टार ऑफ़ द ईयर अवार्ड प्रदान किया।
2016 में आयुर्वेदिक औषधि बॉडी रिवाइवल के जनक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सम्मानित किया।
2016 में आरपीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद रामदास आठवले ने छठा भारत रत्न डॉ आंबेडकर अवार्ड से नवाज़ा।
2017 में साउथ कोरिया की KEISIE इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी की तरफ से डॉक्टर ऑफ़ फिलॉसोफी इन आयुर्वेदा अवार्ड से उन्हें सम्मानित किया गया.
2018 में भी सम्मान का सिलसिला जारी रहा और भारत रत्न डॉ आंबेडकर अवार्ड से उन्हें सम्मानित किया गया।
आज भले ही वे इस दुनिया में नहीं हैं, मगर उनके अविष्कार द्वारा बॉडी रिवाइवल ने उन्हें दुनिया भर में लोकप्रियता दिलाई और असंख्य ज़िन्दगियों को उन्होंने नवजीवन प्रदान किया. उनकी आत्मा को शांति मिले और उनके परिवार को संबल मिले यही कामना नागपुर टुडे और आमची मुंबई टुडे करता है.



