Published On : Mon, May 22nd, 2017

कोराडी पावर प्लांट घोटाला : कबाड़ बनाकर बेच डालीं हज़ारों करोड़ की संयंत्र!

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नागपुर: विगत दिनों राज्य के ऊर्जा विभाग ने विभाग से जुड़े एक सफेदपोश के मंसूबे को पूरा करने के उद्देश्य से कोराडी ऊर्जा निर्माण प्रकल्प की पुरानी 4 संयंत्र को कबाड़ में तब्दील करके इसे औने पौने दामों पर बेच डाला। हजारों करोड़ रुपयों की लागत से बनी इन चिमनियों की कबाड़ की कीमत मात्र 60 करोड़ आंकी गई।फिर अपने करीबी ठेकेदार को तय रणनीति के तहत बेच दिया।फिलहाल उक्त कबाड़ को जमा कर गंतव्य स्थान ले जाने का क्रम जारी है।उक्त सभी संयंत्र २१० मेगावाट के है,इन्हें २ साल के भीतर नेस्तनाभूत कर दिए जाएंगे।

ज्ञात हो कि कोराडी पावर प्लांट के उक्त कबाड़ यानि 4 संयंत्र सह अन्य के निर्माण में लगभग 3 दशक पूर्व 3 से 4 हज़ार करोड़ खर्च आये थे। इससे नए अतिरिक्त पावर प्लांट के निर्माण पूर्व तक जैसे तैसे बिजली का उत्पादन हो रहा था।जैसे ही पिछले 2 वर्ष पूर्व नए अतिरिक्त बिजली प्रकल्प ने उत्पादन शुरू किया,पुराने प्रकल्प को कबाड़ घोषित करने की योजना को साकार करने में ऊर्जा विभाग के खाकी-खादी धारी दिग्गज भी गए। लगभग 4 – 6 माह के भीतर कबाड़ घोषित कर उसका अंकेक्षण करवाया गया,अंकेक्षण करने वाले से कम से कम कीमत तय करने का निर्देश भी दिया गया था।जब उक्त कबाड़ का कुल अंकेक्षण कीमत मात्र 60 करोड़ तय किया गया। इस कीमत को तय करने में किसी को झिझक नही आई,कि इस चिमनियों के निर्माण में हज़ारों करोड़ खर्च किये गए थे।

फिर इस कबाड़ बिक्री के लिए नियमावली तैयार कर टेंडर कॉल किये गए। टेंडर में भाग लेने के इच्छुकों से साठगांठ कर उक्त दिग्गज सफेदपोश ने अपने करीबी व अपने से संबंधित आर्थिक व्यवहार संभालने वाले कामठी निवासी उद्योगपति  के निकटवर्ती को उक्त ठेका दिलवाने में सफलता हासिल की।

जानकारों के अनुसार उक्त कबाड़ की कीमत सही मायने में 500 करोड़ की होनी चाहिए,ऊर्जा विभाग उक्त सफेदपोश के चक्कर मे ऊर्जा विभाग को कम से कम 500 करोड़ का नुकसान पहुंचा रहा है। फिलहाल उक्त कबाड़ को समेटने का काम जारी है,जल्द ही कबाड़ द्वारा अधिग्रहित जगह सपाट कर दी जाएंगी।।

लैंको मजदूरों को 5 माह से नहीं मिला वेतन

कोराडी पवार प्लांट के निर्माण करने में दक्षिण भारत की नामचीन कंपनी लैंको का भी समावेश है। यह कंपनी पिछले 5 माह से अपने 103 कर्मियों को वेतन नही दे रही है। इन कर्मियों का वेतन 10000 से लेकर पौने 4 लाख मासिक तक है।इस वजह से उक्त सैकड़ो कर्मी आर्थिक संकट से जूझ रहे है।वही कंपनी के प्रतिनिधि धमकाते है कि कोई लेबर कोर्ट गया तो उन्हें न सिर्फ काम से बेदखल किया जायेगा बल्कि कोई भी बकाया वेतन नही दिया जायेगा। प्रतिनिधि के अनुसार जल्द ही कुल कर्मियों में से कर्मचारियों की छटनी की जाएंगी।कोराडी पावर प्लांट में मात्र 6-8 माह का काम शेष है।

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रिज़र्व वाटर से किया जा रहा निर्माणकार्य

कोराडी पावर प्लांट में बिजली निर्माण के लिए पानी की शख्त जरूरत पड़ती है।इसलिए प्रत्येक पावर प्लांट के करीब सैकडों एकड़ में तालाब बनाकर पानी संग्रह किया जाता है। इस संग्रहित पानी के तालाब से सटे एक विवादास्पद जमीन पर व्यावसायिक संकुल का निर्माणकार्य शुरू है,इस निर्माणकार्य में लगने वाला पानी के लिए तालाब का पात्र निर्माणकार्य प्लाट की ओर खुलेआम मोड़ कर निर्माणकार्य जारी है।स्थानीय ग्रामपंचायत के सदस्य के अनुसार उक्त कृत गैरकानूनी है।पावर प्लांट के प्रमुख को पता है,सिर्फ ताक़तवर सफेदपोश की शह होने के कारण कोई कानूनी कार्रवाई नही कर रहे है।

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