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    Published On : Thu, Aug 2nd, 2018
    nagpurhindinews | By Nagpur Today Nagpur News

    मुजफ्फरपुर रेप केस पर बिहार बंद, SC ने TISS से बंद लिफाफे में मांगी रिपोर्ट

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    बिहार में मुजफ्फरपुर के बालिका गृह रेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार, केंद्र सरकार और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (TISS) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. 34 नाबालिग लड़कियों से दुष्कर्म के इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है.

    कोर्ट ने TISS से बंद लिफाफे में जवाब देने को कहा है. साथ ही इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया में बच्चियों की तस्वीर चलाने पर नाराजगी जताते हुए मोरफेड तस्वीर लगाने पर भी पाबंदी लगा दी है. इस बीच मामले को लेकर लेफ्ट द्वारा बुलाए गए बिहार बंद का असर भी देखने को मिला है. इस बंद को आरजेडी और कांग्रेस ने भी समर्थन किया है.

    बंद से रेल और सड़क यातायात प्रभावित

    बंद के कारण कई जिलों में रेल और सड़क यातायात प्रभावित हुआ है. विरोध के कारण पटना का डाकबंगला चौराहा जाम हो गया. विरोध में शामिल महिलाओं की मांग है कि प्रदेश की समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा को बर्खास्त किया जाये और उनके पति चन्द्रशेखर वर्मा को गिरफ्तार किया जाये. लेफ्ट ने हाई कोर्ट की निगरानी में सीबीआई द्वारा बिहार में मौजूद सभी बालिका गृह की जांच की मांग की है.
    सीबीआई गहन फॉरेंसिक जांच कराएगी

    इस मामले में सीबीआई गहन फॉरेंसिक जांच कराएगी. अधिकारियों ने उन्होंने बताया कि सीएफएसएल की एक टीम जल्द ही मुजफ्फरपुर जाकर आश्रय गृह से फॉरेंसिक नमूने इकट्ठा करेगी. अधिकारियों ने बताया कि पीड़िताओं के बयानों का इस्तेमाल कर समझने की कोशिश की जाएगी कि अपराध को कैसे अंजाम दिया गया और फिर इस ब्योरे का इस्तेमाल आरोपियों पर मुकदमा चलाने के लिए किया जाएगा.

    सीबीआई पीड़िताओं के बयान दर्ज करने के लिए मनोवैज्ञानिकों की मदद ले सकती है. कुछ पीड़िताओं की उम्र महज छह-सात साल हैं. बिहार सरकार द्वारा वित्तपोषित एनजीओ के प्रमुख ब्रजेश ठाकुर ने आश्रय गृह की करीब 30 लड़कियों से कथित तौर पर बलात्कार किया.

    11 लोगों को खिलाफ मामला दर्ज

    सीबीआई उन डॉक्टरों और फॉरेंसिक विशेषज्ञों के भी बयान दर्ज करेगी और उनसे साक्ष्य इकट्ठा करेगी जिनकी सेवाएं पुलिस ने अपनी जांच के दौरान ली थी. मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टिस्स) की ओर से अप्रैल में बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग को एक रिपोर्ट सौंपी गई थी जिसमें पहली बार इस आश्रय गृह में रह रही लड़कियों से कथित दुष्कर्म की बात सामने आई थी. इस मामले में बीते 31 मई को ब्रजेश ठाकुर सहित 11 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी. अब सीबीआई ने इस मामले की जांच संभाल ली है.


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