Published On : Mon, Aug 4th, 2025
By Nagpur Today Nagpur News

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: महाराष्ट्र में OBC आरक्षण के साथ स्थानीय निकाय चुनाव को मंजूरी

नागपुर समेत सभी शहरों में रास्ता साफ
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नागपुर: लंबे समय से टल रहे महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार के नए वार्ड संरचना प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए 27% ओबीसी आरक्षण को भी अंतिम रूप से मान्यता दे दी है। इस फैसले से नागपुर महानगरपालिका समेत राज्य की सभी नगर परिषदों, जिला परिषदों और अन्य स्थानीय स्वशासी संस्थाओं के चुनाव का रास्ता अब पूरी तरह साफ हो गया है।

Ausa केस पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

लातूर जिले की औसा नगर परिषद की वार्ड पुनर्रचना को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वार्ड सीमाएं तय करना राज्य सरकार का विशेष अधिकार है। कोर्ट ने पुरानी वार्ड संरचना को बहाल करने की मांग को खारिज कर दिया और कहा कि अब चुनाव नए ढांचे के अनुसार ही होंगे।

OBC आरक्षण को लेकर भी स्थिति स्पष्ट

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कोर्ट ने 27% ओबीसी आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका को भी खारिज करते हुए कहा कि इस आरक्षण के साथ ही चुनाव कराए जा सकते हैं। कोर्ट के इस निर्णय से ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रही सभी कानूनी अड़चनों का अंत हो गया है।

चुनाव आयोग को 4 सप्ताह में अधिसूचना जारी करने का निर्देश

पिछली सुनवाइयों में सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों में देरी पर नाराज़गी जताई थी और राज्य चुनाव आयोग की मंशा पर भी सवाल उठाए थे। अब कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि चुनाव आयोग 4 हफ्तों के भीतर अधिसूचना जारी कर चुनावी प्रक्रिया शुरू करे।

सरकारी बदलावों के बीच वार्ड ढांचे में कई परिवर्तन

महाराष्ट्र में पहले महा विकास आघाड़ी, फिर महायुति और अब एकनाथ शिंदे सरकार के कार्यकाल में वार्ड संरचना में कई बार बदलाव हुए। मार्च 2022 से पहले की संरचना को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं दाखिल हुई थीं। औसा नगर परिषद की याचिका अंतिम बड़ी चुनौती थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

तीन साल से बिना जनप्रतिनिधियों के चल रही हैं नगरपालिकाएं

सुप्रीम कोर्ट ने मई 2025 में राज्य को 4 महीने में चुनाव कराने का निर्देश दिया था। अब जबकि कोर्ट ने वार्ड संरचना और ओबीसी आरक्षण दोनों को मंजूरी दे दी है, तो चुनावी प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने जा रही है। यह फैसला उन सभी शहरों के लिए राहत की खबर है, जो तीन साल से निर्वाचित प्रतिनिधियों के बिना चल रहे हैं।सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले से महाराष्ट्र में लोकतंत्र की बहाली का रास्ता खुल गया है। नागपुर समेत राज्य भर की जनता को अब जल्द ही अपने जनप्रतिनिधि चुनने का अधिकार मिलेगा।

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