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सार्वजनिक क्षेत्र के इस सबसे बड़े बैंक ने पेंशनभोगियों, सरकार की सोशल बेनेफिट सर्विसेज के लाभार्थियों और नाबालिग खाताधारकों को बचत खाते में मिनिमम बैलेंस की लिमिट से छूट दी है। आपको बता दें कि इस साल अप्रैल में एसबीआई ने पांच साल बाद नए सिरे से न्यूनतम मासिक शेष और शुल्कों को फिर से लागू किया था। महानगरों के लिए मिनिमम बैलेंस सीमा 5,000 रुपये रखी गई थी, वहीं शहरी शाखाओं के लिए यह सीमा 3,000 और अर्धशहरी शाखाओं के लिए 2,000 रुपये व ग्रामीण शाखाओं के लिए 1,000 रुपये रखी गई थी।
अभी तक महानगरों के लिए बैंक मिनिमम बैलेंस 75 फीसदी से नीचे आने पर 100 रुपये और उस पर जीएसटी वसूला जा रहा था। यदि मिनिमम बैलेंस 50 फीसदी या उससे कम पर आता है तो इसके लिए जीएसटी के साथ 50 रुपये का जुर्माना वसूला जा रहा था। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में न्यूनतम शेष न रखने पर 20 से 50 रुपये साथ में जीएसटी का जुर्माना लगाया जा रहा था। एसबीआई ने साफ किया है कि बेसिक बचत खातों और प्रधानमंत्री जनधन योजना में न्यूनतम राशि रखने की जरूरत नहीं होगी। बैंक के बचत खातों की संख्या 42 करोड़ है. इसमें से 13 करोड़ खाते इस श्रेणी में आते हैं।
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