Published On : Thu, Oct 12th, 2017

कांटे की टक्कर में संदीप गवई विजयी

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Sandeep Gavai, BJP
नागपुर: नागपुर महानगरपालिका के प्रभाग क्रमांक 35(अ) के भाजपा नगरसेवक नीलेश कुंभारे के निधन बाद उपचुनाव हेतु कल बुधवार ११ अक्टूबर को उम्मीद के अनुरूप अलप मतदान हुई, आज गुरुवार १२ अक्टूबर को सीताबर्डी स्थित बचत भवन में मतगणना संपन्न हुई, जिसके उपरांत भाजपा उम्मीदवार संदीप गवई को विजयी घोषित की गई. उन्हें ५७११ मत मिले, उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस उम्मीदवार को ४६३ मतों से परास्त किये. गवई के जीत से राज्य की सत्ताधारी पक्ष याने सरकार ने राहत की साँस ली.

वैसे भी इस चुनाव को लेकर मतदान पूर्व भाजपा अंतर्गत काफी मतभिन्नता थी. इसके बावजूद चुनाव प्रमुख वरिष्ठ नगरसेवक अविनाश ठाकरे, सत्तापक्ष नेता संदीप जोशी, पूर्व महापौर प्रवीण दटके जीत को लेकर आश्वस्त थे. कल हुए मतदान को लेकर सभी सकते में थे. कहा जा रहा था कि भाजपा उम्मीदवार बाहरी होने से स्थानीय कार्यकर्ताओं व् समर्थकों का बड़ा विरोध नज़र आएगा लेकिन कल संपन्न हुए मतदान में न ज्यादा अंतर्गत विरोधी मतदान हुए और न ही समर्थन में हुजूम ने भाग लिया.

आज के चुनाव अधिकारी ने मतगणना संपन्न होने के बाद जानकारी दी कि कल हुए १४०३४ मतदान में से भाजपा उम्मीदवार संदीप गवई को ५७११ , कांग्रेस उम्मीदवार पंकज थोरात को ५२४८ ,बसपा उम्मीदवार नंदा झोडपे को १६७५ , रिपाई उम्मीदवार वंदना जीवने को ४२६, मनोज पुंडलिक इंगले को १४ ,फकीरा गौतम को ६६८, शशिकांत नारनवरे को १३०, सुनील कवाडे को १५ मत मिले।वहीं १४७ मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया.

उल्लेखनीय यह है कि गवई को गडकरी के हस्तक्षेप के कारण अवसर दिया गया.वैसे गवई अपर एलएडी कॉलेज के सामने के इलाके में रहते हैं ,याने प्रभाग के बाहरी उम्मीदवार थे. इस अवसर ने गवई को पुनः राजनित जीवन में जिन्दा कर दिया. भाजपा ने ३ दफे मनपा और एक-एक दफे विधानसभा,विधानपरिषद का चुनाव लड़ने का अवसर गवई को प्रदान कर चुकी हैं. जिसमें से मनपा का दूसरा चुनाव जितने में सफलता मिली,वर्ष २०१२ की मनपा और विधानसभा व विधानपरिषद का चुनाव हार चुके हैं. गवई के जीत को लेकर चिंतित सत्ताधारी राज्य सरकार को अंततः बड़ी अड़चन से मुक्ति मिली, भाजपा उम्मीदवार चुनाव हार गया होता तो मुख्यमंत्री का चुनावी क्षेत्र होने से काफी किरकिरी का सामना करना पड़ता.

जीत बाद गवई ने कहा…….
– ‘वर्किंग डे’ और दूर-दूर मतदान केंद्र होने के कारण मतदान में कमी हुई.
– मतदाता सूची २-३ दिन पहले मिलने के कारण मतदाताओं तक प्रत्यक्ष नहीं पहुँच पाए.
– वर्ष २००७ में नगरसेवक रहते हुए सर्वाधिक काम करने के कारण दोनों दिग्गज नेताओं ने उम्मीदवारी एकमत से दी.
– यह जीत सचमुच कार्यकर्ताओं की जीत हैं.
– सामाजिक समीकरण के कारण वर्त्तमान महापौर, उपमहापौर, नगरसेवक धर्मपाल मेश्राम जैसे दर्जन भर नगरसेवकों को पक्ष ने चुनावी जिम्मेदारी दी थी.
– जोगी नगर, भीम नगर सह प्रभाग के अविकसित इलाकों में प्राथमिकता से समस्या मुक्त की जाएंगी.
– प्रभाग में जारी विकासकार्यों को पूर्ण किया जाएगा.

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