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    Published On : Fri, Jan 5th, 2018
    nagpurhindinews | By Nagpur Today Nagpur News

    संभा जी भिड़े ने खुद पर लगे आरोप किए खारिज, कहा- दोषियों को मिले कड़ी सजा

    पुणे: भीमा कोरेगांव में हिंसा भड़काने के आरोपी हिंदूवादी नेता संभा जी भिड़े ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज कर दिया है। प्रकाश आंबडेकर सहित कई दलित संगठन के नेता संभा जी भिड़े को जातीय हिंसा का मुख्य आरोपी मान रहे हैं लेकिन शिवराज प्रतिष्ठान के प्रमुख संभा जी भिड़े का कहना है कि उनका इस घटना से कोई लेना-देना नहीं है। उन्हें जान-बूझकर इसमें फंसाया जा रहा है।

    बता दें कि नए साल के मौके पर पुणे के पास भीमा-कोरेगांव लड़ाई की 200वीं सालगिरह पर दलित संगठन ने एक कार्यक्रम आयोजित किया था जिसके बाद पूरे शहर में हिंसा फैल गई। हिंसा का असर महाराष्ट्र के अन्य शहरों के साथ गुजरात और मध्यप्रदेश में भी दिखाई दिया। बुधवार को इस सिलसिले में महाराष्ट्र बंद भी बुलाया गया और कई दलित संगठनों ने हिंदूवादी नेता संभा जी भिड़े की गिरफ्तारी की मांग की थी। इस पर शुक्रवार को संभा जी भिड़े ने प्रेस नोट जारी करते हुए कहा, ‘प्रकाश आंबेडकर जिस षडयंत्र के लिए मुझपर आरोप लगा रहे हैं वह पूरी तरह गलत है। मैंने सरकार से मामले की पूरी जांच की मांग की है, साथ ही दोषियों को कड़ी सजा मिलने की सिफारिश की है।’ संभा जी भिड़े ने खुद पर लगे आरोपों को खारिज किया।

    संभा जी भिड़े के साथ ही मिलिंद एकबोटे का नाम भी इस मामले में सामने आया। आपको बता दें कि दोनों ही नेताओं के संगठनों के खिलाफ पुणे में एफआईआर भी दर्ज हुई लेकिन अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है। इन दोनों को ही इस राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। संभा जी भिड़े (85 वर्ष) जिन्हें भिड़े गुरुजी के नाम से भी जाना जाता है, के लिए यह पहला मौका नहीं है। 2008 में भिड़े का नाम देशभर में चर्चित हुआ था, जब उनके समर्थकों ने फिल्म जोधा-अकबर की रिलीज के खिलाफ थिअटरों में तोड़फोड़ की थी। यही नहीं 2009 में भी उन्होंने अपने गृह शहर सांगली को उस वक्त ठप कर दिया था, जब आदिल शाह के सेनापति अफजल खान को मारते हुए शिवाजी की तस्वीर को गणेश पंडाल में लगाने से आयोजकों ने मना कर दिया था।

    उधर दलित नेता प्रकाश आंबेडकर ने मुख्यमंत्री देंवेंद्र फडणवीस से अपील की है कि जल्द से जल्द संभाजी भिड़े को गिरफ्तार किया जाए। प्रकाश आंबेडकर का कहना है कि दलितों का गुस्सा तबतक शांत नहीं होगा, जबतक संभा जी भिड़े और मिलिंद एकबोटे को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।

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