Published On : Mon, Dec 9th, 2019

संत पापा फ्रांसिस ने किया गौशाला बनाने का आव्हान

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गौशाला आश्चर्य की भावना पैदा करता हैं और हमें कई सबक सिखाता हैं

संत पापा फ्रांसिस ने लैटिन भाषा में एक एपोस्टोलिक पत्र ‘एडमिरेबल सिगन्म’ जारी किया,जिसका अर्थ हैं ‘अदभुत संकेत’. उन्होंने इस अदभुत संकेत को पारिवारिक के घरों में प्रदर्शित करने का आव्हान किया। ईशु ने जन्म का चित्रण स्वयं ईश्वर के पुत्र का अवतार की रहस्यमयी एक सरल और आनंदमय उद्धघोषणा हैं. हमारे घरों में क्रिश्मस गौशाला स्थापित करने से बेतलेहेम में जो कुछ हुआ,उसके इतिहास को जानने में मदद करता हैं.
एपोस्टोलिक पत्र में प्रभु के जन्म के दृश्य में पाए जाने वाले विभिन्न तत्वों के अर्थ और प्रतीकात्मक पर ध्यान केंद्रित होता हैं.चरनी में शिशु ईशु,हमें बताता हैं कि हमें अपनी बाँहों में लेने के लिए प्रभु येसु एक बच्चे के रूप में प्रकट होते हैं यद्दपि चरनी से बालक येसु कमजोर और नाजुक हैं फिर भी वह अपनी शक्ति को छुपाते हैं जो सभी चीजों का निर्माता हैं.संत अगस्टिन,चरनी में लेटा हुआ प्रभु येसु के महत्व पर प्रतिबिंबित हुए कहते हैं,प्रभु येसु जीवन की रोटी हैं जो हमारा भोजन बन गया हैं.

गौशाला आश्चर्य की भावना पैदा करता हैं और हमें कई सबक सिखाता हैं.यह हमें ईश्वर के कोमल प्रेम को दिखाता हैं.जैसा की हम पालने में नए जन्में बच्चे को देखते हैं,हमें अपने जीवन के अपने उपहार का एहसास होता हैं जो हमारे पास ईश्वर की ओर से प्राप्त हैं.हमें ख़ुशी के साथ एहसास कि कि मरियम का पुत्र सारे जीवन का स्त्रोत और जीविका हैं.और वह हमारा भाई हैं जो हमें खोजने और बचाने के लिए हैं.

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अंधेरे में लिपटा तारों वाला आकाश उन पलकों का हमारा अनुभव व्यक्त करता हैं जब हमने हमारे जीवन में अंधेरे का अनुभव किया,लेकिन प्रभु येसु की उपस्थिति हमें बताती हैं कि ईश्वर हमें नहीं छोड़ते हैं.उनकी निकटता तब प्रकाश लाती हैं जब अंधकार हमें घेर लेता हैं.

गरीबी और टूटे हुए घरों के परिदृश्य को गौशाले में देखा जाता हैं जो मानव से गिरने संकेत हैं,वहां प्रभु येसु की उपस्थिति हमें बताती हैं कि हर परिस्थिति में भी वह नयापन लाता हैं.वह हमारे जीवन और सम्पूर्ण सृष्टि को उनके मूल वैभव को ठीक करने और पुनः स्थापित करने के लिए आता हैं.
माता मरिया हमें सिखाती हैं कि परमेश्वर के वचन का पालन करना कितना महत्वपूर्ण हैं.संत युसूफ सिखाते हैं कि कैसे एक पिता को अपने परिवार की रक्षा और देखभाल करना हैं.

चरवाहें,वे दूतों द्वारा बोली गई वाणी को सुनते हैं और उन्हें स्थापित लिए जाते हैं.यह उनसे मुलाकात और ईश्वर के पुत्र को पहचानने ओर ले जाता हैं.हम उनसे सीखते हैं कि न केवल शब्द सुनना,बल्कि उसके अनुसार कार्य करना महत्वपूर्ण हैं.ऐसा करने से हम ईश्वर से मुलाकात करते हैं.

रोजमर्रा के जीवन के अनुभव,कार्य ना केवल सामान्य हैं बल्कि पवित्र हैं.संत पापा हमें याद दिलाते हैं कि गौशाला हमारे जीवन हमारे परिवार,विशेषकर हमारे बच्चों के साथ अपना विश्वास बाँटने का अनमोल अवसर हैं.

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