Published On : Fri, Dec 29th, 2017

सुधाकर कोहले को बचाने का आरटीआई कार्यकर्त्ता ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

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नागपुर: विधायक और भारतीय जनता पार्टी के शहराध्यक्ष सुधाकर कोहले को राजनीतिक दबाव के चलते पुलिस द्वारा बचाए जाने का आरोप आरटीआई कार्यकर्त्ता मोरेश्वर घाडगे ने लगाया है। गुरुवार को पत्रकार भवन में पत्र परिषद लेकर घाडगे ने पुलिस और विधायक पर यह गंभीर आरोप लगाया। घाडगे के मुताबिक शहर के जानकीनगर इलाके में जमीन के एक भूखंड का तीन बार आरएल बनाये जाने संबंध में हुड़केश्वर पुलिस थाने में जालसाजी का मुक़दमा दर्ज है। बावजूद इसके पुलिस के द्वारा इस मामले पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जा रही है। जबकि कोहले खुलेआम घूम रहे है। आरटीआई कार्यकर्त्ता ने सुधाकर कोहले की विधानसभा सदस्यता रद्द किये जाने की माँग भी की है।

घाडगे ने पत्रकारों को मामले की जानकारी देते हुए बताया की जानकी नगर परिसर की देवनगर गृहनिर्माण सोसायटी में 22 स्क्येयर फ़ीट का प्लॉट संस्था के सचिव हिंगणा निवासी धर्मेंद्र जैन ने अशोक जैन को 1 जनवरी 1988 में बेचा था। इसी भूखंड से सटी हुई 1 हजार स्क्येयर फ़ीट जगह सोसायटी के सार्वजनिक कार्यो के लिए आरक्षित थी। इसी जगह से जुड़े बनावटी दस्तावेज तैयार कर इसे सुधाकर कोहले को बेचीं गई। इस संबंध में घाडगे ने 2 नवंबर 2016 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। लेकिन इस पर पुलिस ने संज्ञान नहीं लिया जिसके बाद वह अदालत गए। अदालत ने 7 -2 -2017 को मामला दर्ज करने का आदेश पुलिस को दिया। पुलिस ने आदेश के बाद एक महीने बाद 7 -3 2017 को चार लोगो अशोक जैन,पंढरी कडू,सचिन जैन और मनोज राउत के खिलाफ मामला दर्ज किया।

घाडगे ने 14 मार्च 2017 को हुडकेश्वर पुलिस स्टेशन में कोहले और अन्य के ख़िलाफ़ फिर शिकायत की जिसके बाद पुलिस ने मामले की जाँच कर कोहले के खिलाफ जालसाजी का मामला दर्ज किया। घाडगे ने दावा किया है की इस मामले में सुधाकर कोहले की संलिप्तता के सारे साबुत उनके पास है किस तरह कोहले और उनकी पत्नी वैशाली के नाम से बयानापत्र तैयार किया गया और सरकारी दफ्तरों यहाँ तक की एनआइटी से ज़मीन खरीदी से जुड़े दस्तावेज़ तैयार किये गए।

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