Published On : Tue, Sep 3rd, 2019

अशिक्षित मुख्याध्यापको के कारण रुका आरटीई का पहला अनुदान

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नागपुर: मुफ़्त शिक्षा के अधिकार अंतर्गत केंद्र का 65 % और राज्य का 35 % सरकार द्वारा दिए जाने वाले अनुदान को रोक दिया गया है. आरटीई एक्शन कमिटी के चेयरमैन की ओर से राज्य सरकार को 4/7/2019 को शिकायत की गई थी की स्कूलों द्वारा अधिनियम का उल्लंघन कर स्कूलें अनुदान उठा रही है. आरटीई एक्शन कमेटी के चेयरमैन मो. शाहिद शरीफ के के अनुसार स्कूलों में मुख्ध्यापक अशिक्षित नियुक्त किए गए हैं.

नियम कहता है कि नियुक्ति होने के पूरे पाँच साल का अनुभव तथा उसे बीएड होना आवश्यक है, और नियम के अनुसार वेतन मुख्यअध्यापक और शिक्षकों के अकाउंट में स्थानांतरित होना चाहिए. इन शर्तों पर ही मुख्याध्यापक को अनुदान लेने का अधिकार होगा पर शर्त यह है की व्यक्ति मान्यता शिक्षण अधिकारी प्राथमिक से लेना है.

इसके लिए पत्र 17/7/2019 को सभी केंद्र प्रमुख को दिया गया है और उप शिक्षण अधिकारी के माध्यम से 2/8/2019 को सभी मुख्याध्यापक को दिया गया है और उसमें नियम और शर्तों की पूर्ति करने पर ही अनुदान दिए जाने की बात कही गई है. इसी तरह अधिनियम 18 (1) के अनुसार सेल्फ डिक्लेरेशन स्कूलों को देना है. लेकिन आज तक शिकायत करने के बाद 726 स्कूलों ने शिक्षण विभाग को दिया है.

शरीफ का कहना है कि इसमें भी स्कूलों ने झूठी जानकारी प्रशासन को दी है. स्कूल में खेलने के लिए मैदान होना अनिवार्य है. लेकिन मैदान किराया पत्र में दर्शाकर है ये शर्त पूरी की गई. नियम कहता है कि स्कूलों के पास 44, हज़ार स्क्वायर फुट याने एक एकड़ भूमि होना अनिवार्य है. लेकिन नियम को हाशिये पर रखते हुए स्कूल अपना धंधा चला रही. मुफ़्त शिक्षा के अधिकार अंतर्गत लॉटरी प्राप्त पालकों ने प्रवेश इस कारण नहीं लिया के स्कूलों में आज अशिक्षित शिक्षक बच्चों के भविष्य के साथ खेल रहे हैं.

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अभिभावकों का कहना है कि हम ऐसी स्कूलों में अपने बच्चों को भेजेंगे नहीं. स्कूलों में बारवी और स्नातक के शिक्षक पढ़ा रहे है, जो ख़ुद विद्यार्थी है वह क्या बच्चों को पढ़ाएंगे. शरीफ ने बताया कि एक मामला सामने आया है नित्यानंद इंग्लिश कॉन्वेंट स्कुल का. जो भीलगाँव कामठी पंचायत समिति अंतर्गत आती है. जहाँ अध्यापक स्नातक है और शिक्षक फ़र्स्ट ईयर वाले, सेल्फ़ फाइनेंस के नाम से अनेक स्कूलें स्थापित हो गई है. लेकिन नियम की प्रतिपूर्ति कोई नहीं कर रहा और बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है.

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