Published On : Thu, Apr 23rd, 2015

नीतीश की गरीब सवर्णों / अगड़ों को आरक्षण की योजना भाजपा के लिए पड़ सकती है भारी

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– सत्ता के गलियारे से – – कृष्णमोहन सिंह 

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2011 में उच्च जाति आयोग बनाकर उसको सवर्णों में आर्थिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े समूहों की स्थिति के अध्ययन की जिम्मेदारी दी. इसके लिए आयोग ने एशियन डिवेलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट (एडीआरआई) की सहायता ली. एडीआरआई ने इस बारे में जो सर्वे किया उसकी रिपोर्ट आयोग को सौंप दी है. जिसको आयोग सरकार को सौंपने वाली है. उसके आधार पर नीतीश कुमार राज्य के सवर्ण / अगड़े वर्गों के गरीब व पिछड़े परिवार के छात्रों-छात्राओं को छात्रवृति से लगायत अन्य तरह की सुविधा दे सकते हैं.

ऐसे परिवार के बेरोजगारों,बुजुर्गों ,महिलाओं के लिए कुछ योजनाएं शुरू कर सकते हैं. मालूम हो कि बिहार में सवर्ण हिंदू मतदाताओं की संख्या लगभग 15 प्रतिशत है. और ये बहुत प्रभावशाली तथा पिछड़ी,अति पिछड़ी , अनुसूचित जाति के वोट को प्रभावित करने की क्षमता वाले हैं.ऐसे जातियों में ब्राह्मण, राजपूत, भूमिहार, कायस्थ(लाला) व कुछ अन्य जातियां प्रमुख हैं. बिहार व उ.प्र. में इन जातियों की प्रमुखता है. लेकिन सामाजिक, राजनीतिक आदि कारणों से इन जातियों की हालत अब बहुत खराब होती जा रही है. जिनके परिवार में कोई अच्छी नौकरी या राजनीति में नहीं है उन सवर्ण परिवार की हालत तो पिछड़ी, अति पिछड़ी, दलित जातियों से भी खराब हो गई है. परिवार बढ़ने – बंटने से खेत बंटते, टूकड़े होते जा रहे हैं. जो थोड़े खेत हिस्से में आ रहे हैं वे शादी, पढ़ाई, दवा, मरण, कपड़ा आदि में बिकते जा रहे हैं. हालत यह है कि ऐसे तमाम सवर्ण परिवारों की महिलायें मात्र एक या दो साड़ी में तन ढंकने, जीवन गुजारने के लिए मजबूर हैं. इन जातियों की कुछ महिलायें परिवार पालने के लिए मजदूरी भी करने लगी हैं.पढ़ने के बाद भी इनके लड़कों, लड़कियों को नौकरी नहीं मिल रही है.

आगे पढ़ाई में, प्रतियोगिता में अच्छे नम्बर लाने के बाद भी नाम नहीं लिखा जा रहा है, नौकरी नहीं मिल रही है, जबकि आरक्षण के चलते उनसे बहुत कम नम्बर पाने वाले पिछड़े,अति पिछड़े आदि वर्ग के छात्रों ,छात्राओं को अच्छे स्कूलों मे एडमिशन, नौकरी आदि मिल जा रही है. इन हालात में यदि नीतीश ने सवर्ण / अगड़े वर्ग के गरीबों के लिए कुछ योजनायें लागू कर दी तो सवर्णों का 15 प्रतिशत में से लगभग 10 प्रतिशत तक मतदाता उनकी तरफदारी में गोलबंद हो सकते हैं.और यह हुआ तो भाजपा व नरेन्द्र मोदी को बहुत बड़ा झटका लगेगा.

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