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    Published On : Tue, Sep 16th, 2014
    Vidarbha Today | By Nagpur Today Vidarbha Today

    रिसोड : संग्राम के लिए तैयार, होगा किसका बेडा पार


    कांग्रेस, राकांपा, भाजपा, शिवसेना, शिवसंग्राम सब होंगे मैदान में

    Ameet Subhashraon Zanak
    रिसोड (वाशीम)। 
    रिसोड के मैदान में चुनावी संग्राम की तैयारी शुरू हो गई है. 2009 में हुए पुनर्गठन के बाद अस्तित्व में आया रिसोड विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र कांग्रेस और झनक परिवार के नाम से जाना जाता है, लेकिन इस बार चित्र कुछ अलग हो सकता है. रिसोड कांग्रेस के हिस्से में होने के बावजूद इस सीट के राकांपा के पास जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता. भाजपा, शिवसेना और उनके सहयोगी संगठन शिवसंग्राम ने भी रिसोड पर दावा ठोंक दिया है. कांग्रेस में भी बगावत से इनकार नहीं किया जा सकता.

    कांग्रेस में बगावत ?
    निर्वाचन क्षेत्र बनने के बाद कांग्रेस के सुभाष झनक यहां से जीतकर कैबिनेट मंत्री बने, लेकिन वे अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए. दुर्भाग्य से उनका निधन हो गया. उनके बेटे अमित झनक को मैदान में उतारा गया. मतदाताओं ने अमित को भी मुंबई भेज दिया. अमित को छह माह से कुछ अधिक समय ही काम करने के लिए मिले. इसलिए एक बार फिर वे जनता के सामने जाने को तैयार हैं. उन्हें टिकट मिलने की पूरी संभावना भी जताई जा रही है, मगर बगावत की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता. अगर ऐसा हुआ तो अमित की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

    भाजपा, शिवसेना, शिवसंग्राम
    झनक के पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी रहे अधि. विजय जाधव भाजपा की टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं. महायुति के घटक दल शिवसंग्राम के अध्यक्ष विनायक मेटे ने भी रिसोड पर दावा ठोंका है.

    उन्होंने तो प्रचार भी शुरू कर दिया है. जाधव के लिए मेटे का संग्राम छोटा-मोटा नहीं ही.
    जिला परिषद चुनाव में दो क्षेत्रों में जीत दर्ज कर मनसे ने बड़ी चुनौती पेश की है. रिसोड पंचायत समिति पर भी मनसे का कब्ज़ा है. मनसे की टिकट के लिए भी दो दावेदार हैं. रस्साकशी विश्वनाथ सानप और मनसे के जिलाध्यक्ष राजू पाटिल के बीच है. पाटिल ने भी मनसे की टिकट पर दावा किया है.

    भारिप-बहुजन महासंघ भी पीछे नहीं
    भारिप-बहुजन महासंघ भी एक दावेदार होगा ही. महायुति के दोनो प्रमुख दलों ने रिसोड पर दावा ठोंका है. रिसोड के मतदाता 2009 से पहले दो विधायकों को चुनते थे. अब एक ही विधायक चुनना होगा, मगर भ्रम तो रहेगा ही आखिर चुनें तो किसे चुनें.


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