Published On : Fri, Sep 29th, 2017

‘रावण’ की चिट्ठी – ‘कुंभकर्ण’ के नाम

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Ravan
(विशेष सूचना : महाबलशाली और अहंकारी आधुनिक ‘रावण’ की एक चिट्ठी दशहरा के खास मौके पर वर्तमान ‘कुंभकर्णों’ के नाम लिखी गई है. कृपया इसमें ‘रावण’ को ‘सरकार’ और ‘कुंभकर्ण को देश की जनता’ न समझा जाए)

मेरे प्यारे कुंभकर्ण (देशवासियों ),

आशा है आप स्वस्थ एवं सानंद होंगे और अपनी आदत के अनुसार लंबी चादर तान कर सो रहे होंगे. आपको तो सोते रहने के अलावा कोई काम भी नहीं है! वैसे आपको जगाना हमारा कोई मकसद भी नहीं है. क्योंकि आपके सोये रहने में ही हमारी भलाई है!

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भाइयों (और बहनों), आपको यह जानकर प्रसन्नता होगी कि देश में सब कुशल-मंगल है. बस, कुछ लोगों की आमदनी गिर गई है. उत्पादन फिसल गया है. निर्यात घटता जा रहा है. पेट्रोल के दाम बेतहाशा बढ़ गए हैं. महंगाई तो ‘सुरसा’ की तरह मुंह फाड़ चुकी है. फिर भी हमारा दावा है कि जीडीपी कंट्रोल में है और अर्थव्यवस्था मजबूत है. इसलिए हे चतुवर्ण, मेरे भाई कुंभकर्ण… तुम सोते ही रहो. अगर तुम जाग गए तो मेरे राजपाट पर संकट आ जाएगा! क्योंकि तुम्हारी निद्रावस्था में ही मैं चालाकी से शासन करना सीख गया हूं!

प्रिय बंधुवर, भले ही बेरोजगारी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है. इसलिए हर बार की तरह हमने 20 लाख नई नौकरी देने का लॉलीपॉप भी थमा दिया है. भले ही संकट में फंसे किसान आत्महत्या कर रहे हैं मगर हम कर्ज-मुक्ति (सहायता) के नाम पर दो रुपए, पांच रुपए के चेक तो दिला ही रहे हैं! हमारे राज में व्यापारी (जीएसटी के कारण) भले ही परेशान हैं, मगर तुम्हारी तरह यहां के सब लोग ‘खा-पी कर संतुष्ट हैं. कुछ जागृत प्राणी जरूर चिल्लपो मचा रहे हैं, लेकिन तुम्हें जागने की जरूरत नहीं है मेरे भाई! तुम सोए ही रहो! अभी तुम्हारे राजाधिराज महाराज को तुम्हें जगाने की जरूरत नहीं पड़ी है.

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आगे समाचार यह है कि यहां कुछ बच्चे ऑक्सीजन गैस की कमी से मर चुके हैं. वहीं आंदोलनरत कुछ कालेज कन्याएं लाठियों से पीट दी गई हैं! कुछ प्राणी रेल दुर्घटना में मर रहे हैं, तो कुछ रेल-पुल हादसे (भगदड़) में मर कर चुके हैं. यही तो हमारा ‘रावण राज‘ है ना भाई! इसलिए हमें और आपको डरने की कोई जरूरत नहीं है. यहां कोई ज्यादा बोल कर (गौरी लंकेश) मारा जा रहा है, तो कोई ज्यादा सोच कर (कलबुर्गी)…! फिर भी सब कुछ अच्छा चल रहा है. हमारी लोकप्रियता में भले ही थोड़ी कमी आ गई हो, लेकिन बंधु देश तो तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है… बदल रहा है…. और विकास की नई ऊंचाइयां छू रहा है! आशा है आप भी सुषुप्तावस्था में हमारी भांति कुशल-मंगल ही होंगे!

हे वोटों के हरजाई…. मेरे भाई, इन दिनों कुछ प्राणी मेरे पुतला जला रहे हैं! मेरे झूठ और आडंबर पर खिलखिला रहे हैं! उनकी तो आदत है हर साल मुझे मारने की… जलाने की…. लेकिन मैं मरता कहां हूं भाई? मैं हर युग में जीवित था, जीवित हूं और जीवित रहूंगा! यह भी कैसी विडंबना है कि मेरा घमंड, मेरी नीतियां, मेरी तानाशाही आज भी सत्ता की कुर्सी से तुम्हारी मातमपुर्सी तक कई रुपों में जिंदा है…. और वह राम मेरे अधूरे कत्ल के जुर्म में आज तक शर्मिंदा है! इसलिए हे कुंभकर्ण, चिंता छोड़ो और ऐसे ही सोते रहो! मैं हूं ना! इसीलिए आप सब कुशल मंगल ही रहें और मुझे नहीं, बल्कि मेरी नीयत और नीतियों को जलाएं… बुराइयां जलाकर दशहरा मनाएं… मेरी हार्दिक शुभकामनाएं.

–आपका ही भाई–
–सत्ताधीश रावण–

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