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    Published On : Sat, Oct 10th, 2020

    तनाव भरे माहौल में तेजी से बढ़ रहे मानसिक रोगी- डॉ. प्रितम भि. गेडाम

     

     

    (विश्व मानसिक स्वास्थ दिन विशेष – 10 अक्टूबर 2020)

    नागपुर- आज के आधुनिक युग मे महिलाओं, बडे बुजुर्गो के प्रति बढते अत्याचार, स्वार्थप्रवृत्ति, प्रदूषित वातावरण, शोर, नशा, धोखा, गुणवत्ताहीन चीज़ें, अपमानजनक बातें या व्यवहार, दूसरों से अधिक अपेक्षा करना, बढती जिम्मेदारियां, संस्कार की कमी, अकेलापन, समझदार हमदर्द की कमी, निराशा, दुखद यादें, परेशानी, असफलता, मुश्किलों मे घबराना या जल्द हार मान जाना, देर रात तक जागना, पौष्टिक और संतुलित आहार की कमी, परिवार में योग्य मार्गदर्शक की कमी जैसी बातें मनुष्य को मानसिक रूप से बीमार बनाती हैं। वर्तमान समय में, मनुष्य क्षणिक खुशी के चक्कर में भटक रहा है, आदमी चिडचिडा, गुस्सैल हो रहा है, धीरज की अत्यधिक कमी की वजह से आदमी जल्दी से धैर्य खोता है, इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी के एक हालिया सर्वेक्षण में पाया गया कि लॉकडाउन के बाद से मानसिक रोगों के मामलों में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसमें हर पांच में से एक भारतीय इनसे प्रभावित है।

    आपका सबसे बड़ा शत्रु आप स्वयं :- हमारे दिमाग में दुनिया भर के विचार चलते रहते हैं, यहां तक कि छोटी-छोटी समस्याओं को भी गंभीर रूप देते है। बहुत अधिक टेंशन लेते है कि समस्या कैसे हल होगी? क्या करेंगे? मन के मन में हजारों उलझने खुद ही पैदा करके खुद को उलझा लेते है और इससे अंदर ही अंदर मनुष्य संकुचित होता जाता है, फिर नकारात्मक विचार मनुष्य के मन में जड़ जमा लेते हैं, ऐसे लोग परिवार, अपनो से दूर होने लगते हैं, जिसके कारण वह धीरे-धीरे सामान्य रूप से मानसिक विकार की ओर अग्रसर होते है और अनुचित घटनाओं का शिकार होते है। आज समाज में बहुत सी समस्याएं हैं और इसमें हमारी भी एक छोटी सी हिस्सेदारी है। हम पहले से ही बहुत सारी समस्याओं के कारण जानते हैं, फिर भी हम जानबूझकर वही करते हैं जो हमें नहीं करना चाहिए। यह जानते हुए भी कि नशा हानिकारक है, लोग अपने आप नशा करते हैं, हमारी चटोरी जीभ, सिर्फ जीभ के स्वाद के लिए, जैसा चाहे वैसा बाहर का उल्टा-सीधा खाद्यपदार्थ खाते है और शरीर को खराब करते हैं। अक्सर उन चीजों से दूर भागते हैं जो शरीर के लिए फ़ायदेमंद हैं। हम ज्यादातर तनाव, बीमारियों की जड़ खुद तैयार करते हैं।

    मानव सुरक्षा के लिए नीतिनियम हैं, फिर भी लोग नियमों को तोड़ते हैं। सोशल मीडिया के आदी होकर, दुनियाभर का टाइमपास कर कीमती समय बर्बाद करेंगे, तनावपूर्ण वातावरण में रहेंगे, लेकिन व्यायाम करने के लिए आलस करते हैं, जबकि यह जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। उबाऊ, नकारात्मक और रोने-धोने वाले टीवी धारावाहिकों, कार्यक्रमों से दूर रहें, जिस तरह से आप देखते हैं, सुनते-सोचते हैं, आपके विचारों पर वही प्रभाव पड़ता है जो फिर व्यवहार में उतरता हैं इसलिए अक्सर एक स्वस्थ जीवनशैली का पालन करें। ख़रीददारी या व्यवहार करते समय जागरूक रहें, आर्कषण और आवश्यकता के बीच के अंतर को समझें। अपने परिवार, समाज, देश के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी को समझें। बच्चों को अच्छे संस्कार नही देते और जब कोई समस्या आती है तो दूसरों को दोष देते हैं, हमारे बच्चे बड़े होकर देश और मानव जाति के विकास का आधार बने, ना कि उल्टे अपराध करके वे समाज की समस्या बनें, यह माता-पिता की ज़िम्मेदारी है। एक गलत निर्णय आपके जीवन को बदल सकता है। अक्सर निर्णय लेने से पहले, संबंधित सभी पहलुओं को देखें, लोग क्या कर रहे, इसके बजाय, यह सोचें कि हम क्या कर रहे हैं, लोगों की कानाफुसी और दोगले किस्म के लोगों से दूर रहे, लोगों को पहचानना सीखें। आडंबरपूर्ण जीवनशैली से दूर रहें, अपनी विचारशक्ति बढ़ाएँ, समय की माँगों को समझें और उसी के अनुसार खुद को बदलते रहें।

    अच्छे स्वास्थ्य हेतु अपने लिए समय निकालें :- अच्छा स्वास्थ्य जीवन में सफलता का आधार है, अपने आप को संतुष्ट, समाधानी रखें, सकारात्मकता को बढ़ावा देने वाले दोस्तों, रिश्तेदारों और पड़ोसियों के साथ हमेशा स्वस्थ रिश्ते बनाए रखें। सकारात्मक और आशावादी दृष्टि हमें मानसिक रूप से स्वस्थ बनाती है। अच्छा और खुश महसूस करना, दूसरों से ईर्ष्या या जलन न होना मानसिक आरोग्य का स्वस्थ संकेतक है, वैसे भी जब हम दूसरों पर क्रोधित होते हैं, तो इसका हमारे शरीर, मन पर बुरा प्रभाव पड़ता है। खुद हंसना, आसपास के लोगों को हंसाना और माहौल को खुशनुमा बनाए रखना, दूसरों का सम्मान करना और सबसे विनम्र व्यवहार करना यह सभी हमें स्वस्थ बनाते हैं। इसी तरह, प्राकृतिक वातावरण हमारे स्वास्थ्य का एक प्रमुख आधार है।

    प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में स्वस्थ और खुश रहने के लिए इन 5 बिंदुओं के नियमों का पालन करें।

    व्यायाम :- अच्छे स्वास्थ्य के संदर्भ में व्यायाम दिनचर्या का हिस्सा होना चाहिए। शारीरिक स्वास्थ्य भी हमें मानसिक रूप से स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। व्यायाम, चाहे वह योग, जिम, खेल, टहलना, पालतू जानवरों के साथ खेलें या साइकिल चलाएँ या कोई अन्य व्यायाम हो जिसमें शारीरिक परिश्रम शामिल हो। मेडिटेशन से भी स्वास्थ्यस्तर में सुधार होता है यह हमारे दिमाग को शांत रखता है। हम जितनी कैलोरी लेते है, उतना खर्च करना हैं, यानी शरीर में भोजन का सही पाचन जरूरी है।

    • पौष्टिक आहार:- हमें अपने शरीर और दिमाग को सुचारु रूप से काम करने के लिए और ऊर्जा के लिए एक अच्छे पौष्टिक आहार की आवश्यकता होती है क्योंकि यह एक ऐसा आहार है जो हमें शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाता है। मानव आहार में शामिल पांच मुख्य पोषक तत्व – कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, खनिज लवण और विटामिन अलग-अलग रूपों में, विभिन्न स्तरों पर, मानवीय भावनाओं और मनोदशाओं को नियंत्रित करने और बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाते हैं। इसके साथ, अवसाद, तनाव, चिंता, अल्जाइमर जैसी बड़ी मानसिक बीमारियों को आहार, उचित पोषण पूरक (न्यूट्रिशन सप्लीमेंट) जैसे तरीकों से इलाज में मदद होती हैं।
    • पूरी नींद:- हर व्यक्ति के लिए कम से कम आठ घंटे की नींद लेना बहुत ज़रूरी है। ऐसी नींद हमारे शरीर और दिमाग को हर दिन चार्ज करने के लिए बेहद आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही समय पर सही मात्रा में नींद नहीं लेने से शरीर में हार्मोन की मात्रा में असंतुलन हो जाता है। यह पाचन विकार, सिरदर्द, अवसाद, चिंता और चिड़चिड़ापन पैदा करते है। नींद नहीं लेने से मानसिक और शारीरिक दोनों तनाव बढ़ते है। शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया बदलने लगती है। यह आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को प्रभावित करता है। जो शरीर की रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करता है। अपना सोने का समय तय कर लें और रोज उसी समय सो जायें। इलेक्ट्रॉनिक संसाधनों का उपयोग कम करें, या तब ही उपयोग करें जब बहुत आवश्यक हो। आज, मोबाइल इंटरनेट और सोशल मीडिया की लत ने लाखों लोगों की नींद में खलल डाला है।
    • दिखावे से दूरी बनाए रखें:- हमारे समाज में, दिखावा एक फैशन बन गया है खुद को सर्वश्रेष्ठ दिखाने और स्टेटस मेंटमेन के चक्करमें हर दिन न जाने कितनों के जीवन को बर्बाद कर देता है। दुनिया हमारे बारे में क्या कहेगी, बस यही सोच-सोचकर झूठा दिखावा करते हैं, मन मारकर भी गलत काम करते है। बोलबचन, झूठ, कथनी-करनी मे अंतर रखते है। लोग चेहरे पर दिखावेवाला मुखौटा लगाकर घूमते हैं, वे समय के साथ बदलाव को बर्दाश्त नहीं करते, डर के साये में रहते हैं, जल्दी से तनाव में आकर अपना जीवन खराब करते हैं या गलत निर्णय लेकर खुद को खत्म कर लेते हैं। दिखाने के लिए हजारो अपने होते है लेकिन वास्तव मे कोई नही। जीवन में हंसी-मजाक, मौज-मस्ती, घूमना-फिरना, खान-पान सब कुछ चलता रहता है, लेकिन मनुष्य को हमेशा सादा और सरल जीवन जीना चाहिए, अर्थात हमने आवश्यकतानुसार किसी भी परिस्थिति के अनुकूल होना चाहिए। उगते सूरज को सलाम करने का दौर है अर्थात अधिकतर लोग तो स्वार्थ के ख़ातिर आपसे जुडते है लेकिन अच्छे लोग तो आपके कार्य, व्यवहार, स्वभाव से प्रभावित होकर आपके अपने बनते है। दुनिया को वैसे हीदिखाओ जैसे आप हो।
    • सामाजिक कार्य:- इंसान के रूप में जन्म लिया हैं, तो एक इंसान बनकर जिएं, अर्थात प्रत्येक व्यक्ति में परोपकार की भावना होनी चाहिए। जीवन को इस तरह से जिएं कि हमारी वजह से किसी का अहित न हो। हर दिन एक तो भी कार्य हमारे समाज, असहाय लोगों, पर्यावरण, जानवरों और पक्षियों के लिए निस्वार्थभाव से करना चाहिए ताकि हम खुद पर गर्व कर सकें कि हमने आज कुछ अच्छा किया है अर्थात थोडा-सा दुसरो के लिए भी जीना सीखें, इससे मन को असीम शांति मिलती है जो कि आप करोड़ों रुपये खर्च करके भी नही पा सकते। यह तनावमुक्त जीवन जीने का सबसे अच्छा तरीका है।

    अगर आप लगातार इन 5 नियमों का पालन करते हैं तो आप हमेशा खुश, स्वस्थ, सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहेंगे। आप अन्य लोगों की तुलना में अधिक सक्षम होंगे, आपकी प्रतिरक्षा शक्ती बढ़ेगी और आप शारीरिक और मानसिक बीमारियों से दूर रहेंगे। कठिन समय में कभी भी हिम्मत न हारें, कोशिश करना काम है। अगर समस्या है तो समय भी परिवर्तनशील है, उसी तरह से स्थिति भी कभी एक जैसी नहीं रहती। मनुष्य के अंदर का भय ही मनुष्य को कमजोर बनाता है। मनुष्य को केवल बुरे कर्म करने से डरना चाहिए, यह भूल जाओ कि लोग क्या कहेंगे क्योंकि ये लोग आपकी समस्याओं, परेशानीयो को हल करने के लिए नहीं आते हैं इसलिए अच्छे कर्म छोटे या बड़े हो, जीवन में कभी भी इसे करने में शर्म न करें, नर्वस न हों, यह आलेख पढने के बाद एकबार खुद के दिनचर्या और व्यवहार का आत्मनिरीक्षण जरूर करें। भावनात्मक रूप से मज़बूत बनें। जीवन के हर एक पल को जी भर के जिए, मुस्कुराते रहे, हमेशा सकारात्मक रहे और तनावमुक्त रहे।

    डॉ. प्रितम भि. गेडाम
    भ्रमणध्वनी क्रं 082374 17041
    [email protected]

     

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