
पारस बैसवारे
नागपुर: रामदासपेठ और धंतोली क्षेत्र में इलाज के नाम पर मरीजों को गुमराह करने वाले कथित दलालों का मुद्दा गंभीर होता जा रहा है। अस्पतालों के बाहर लगे चेतावनी बोर्ड मरीजों को ऐसे एजेंटों से सावधान रहने और किसी भी तरह के भ्रम में आने के बजाय सीधे अपने डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दे रहे हैं।
आरोप है कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से इलाज के लिए नागपुर आने वाले मरीजों को कथित तौर पर निशाना बनाया जाता है। पहले उनसे बीमारी और संबंधित अस्पताल के बारे में जानकारी जुटाई जाती है। इसके बाद उन्हें दूसरे अस्पतालों में इलाज कराने के लिए मनाने की कोशिश किए जाने की बात सामने आ रही है।
मरीजों को दूसरे अस्पतालों में भेजने के पीछे कमीशन का खेल?
इस पूरे मामले में आशंका जताई जा रही है कि मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में भेजने के पीछे कमीशन का खेल हो सकता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और विस्तृत जांच होना अभी जरूरी है।
दूर-दराज के क्षेत्रों से बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर नागपुर आने वाले मरीज और उनके परिजन पहले ही बीमारी, आर्थिक खर्च और मानसिक तनाव से जूझ रहे होते हैं। ऐसे में यदि उन्हें कथित तौर पर गुमराह किया जाता है, तो उनकी परेशानी और बढ़ सकती है।
स्वास्थ्य विभाग और पुलिस कब करेंगे जांच?
अस्पतालों के बाहर लगे चेतावनी बोर्ड कई सवाल खड़े करते हैं। आखिर मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर किसकी जेब गर्म हो रही है? क्या मरीजों को दूसरे अस्पतालों में भेजने के पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा है? क्या इस कथित दलाली में आर्थिक लेन-देन और कमीशन की भूमिका है?
अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग और पुलिस इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच करते हैं या नहीं। मरीजों के हितों की रक्षा के लिए जरूरी है कि कथित दलाली के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी तरह की अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
मरीजों के लिए सलाह: इलाज से जुड़ा कोई भी निर्णय लेने या अस्पताल बदलने से पहले अपने उपचार कर रहे डॉक्टर से सीधे संपर्क करें और किसी अनजान एजेंट की सलाह पर भरोसा करने से बचें।



