Published On : Tue, Apr 7th, 2015

नवेगांव बांध : आखिर रामपुरी प्रादेशिक जलापूर्ति योजना बंद

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नागरिकों का आंदोलन का इशारा

Rampuri Pradeshik jal aapurti
नवेगांव बांध (गोंदिया)। जिला परिषद के अधिकारियों के कार्य का बकाया निधि नही निकालने से कांट्रेक्टर पद्धति से विगत वर्ष से शुरू रामपुरी प्रादेशिक जलापूर्ति योजना कांट्रेक्टर ने शनिवार से बंद की. जिससे शामिल दस गांव के पिने के पानी का प्रश्न गर्मी में उपस्थित हो रहा है. इसपर जिला परिषद सामान्य जनता की सुविधा के लिए कितना जागरूक है यह ध्यान में आता है.

करोडो रूपये खर्च करके शासन ने प्रादेशिक जलापूर्ति योजना तैयार की लेकिन उक्त योजना चलाऐंगा कौन? ऐसा प्रश्न निर्माण हुआ है. इसके लिए जिले के पालकमंत्री राजकुमार बडोले ने गत वर्ष जिला परिषद के ग्रामीण जलपूर्ति विभाग को ताला ठोकने का आंदोलन किया था. इस आंदोलन की सफलता से जिले में अन्य जलापूर्ति शुरू होने का मार्ग खुल गया था.

अनेक वर्षो से बंद अवस्था ने रामपुरी प्रादेशिक जलापूर्ति योजना इस आंदोलन के बाद शुरू हुई. इसके लिए ई-निवेदन के माध्यम से कॉन्ट्रैक्ट दिया गया. पहले 16 लाख रूपये निधी की मंजूरी मिली. 1 अगस्त 2014 से यह योजना शुरू की गई. इस योजना के माध्यम से रामपुरी, एरंडी, दर्रे, जांभडी, तिडका, धाबेपवनी, जब्बारखेड़ा, रोजिटोला, कोहलगांव, कान्होली और धाबेटेकड़ी गांवों में जलापूर्ति शुरू की गई.

कांट्रेक्टरों ने योजना शुरू करने के बाद कार्य का बकाया निधि जिला परिषद की ओर प्रस्तुत करने पर भी वित्तविभाग ने दिया नही. आज की तारीख में करीब 8 लाख रूपये जिला परिषद की ओर बकाया है ऐसा बताया गया. ई-निवेदन के बाद ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के तत्कालीन कार्यकालीन अभियंता ने इस निवेदन के मुख्य लेखाधिकारी की ओर आर्थिक मंजूरी लेना आवश्यक था. लेकिन ऐसा नही किया गया. जिससे कांट्रेक्टरों का बकाया रोका गया.

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लोकप्रतिनिधी के आंदोलन से कार्यकारी अभियंताओं ने तुरंत योजना शुरू करने के लिए सकारात्मक कदम उठाया. फिर भी पिने के पानी का प्रश्न जरुरी है इसे ध्यान में रखकर लेखाधिकारियों ने भी सकारात्मक दृष्टीकोन से योजना पूर्ववत शुरू रखना जरुरी था. लेकिन जिप अधिकारियों ने नियम दिखाकर अपना अहंकार पूरा किया और इसमें दस गांव के नागरिक पीस रहे है और इसकी ओर किसी का ध्यान नही है. जिला परिषद ने सामान्य नागरिकों की सुविधा का काम करना चाहिए, या अधिकारियों के अहंकार की संतुष्टि करे? ये प्रश्न भी उपस्थित हो रहा है. पानी के लिए इन दस गांव के नागरिकों ने आंदोलन करने का इशारा भी दिया है.

राजकुमार बडोले ने ध्यान देना चाहिए  
प्रत्येक नागरिक को पिने का पानी उपलब्ध करके देने की जिम्मेदारी शासन की है. इसके लिए राष्ट्रीय पेयजल योजना चलाई जा रही है. बडोले के गत वर्ष आंदोलन से अनेक जलापूर्ति योजना शुरू हुई थी. विगत वर्ष के बाद पालक मंत्री विरोधी पक्ष के विधायक है. अभी जिले के पालकमंत्री है. जिससे उन्होंने जिप में अधिकारियों के अकार्यक्षमता को रोककर जनता के हितों का फैसला लेने की अपेक्षा नागरिकों ने व्यक्त की है.

झांसीनगर योजना निर्मिती की जरुरत क्या ?
राष्ट्रीय पेयजल कार्यक्रम के अंतर्गत 46 लाख रूपये खर्च करके झांसीनगर योजना को जिप के ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ने मंजूरी दी. इसके लिए झाशीनगर में कुआ खुदाई और पंप हाउस की निर्मिति नए से की जाएगी. वास्तविक रामपुरी प्रादेशिक जलापूर्ति योजना की पाइप लाइन के माध्यम से झांसीनगर को कम खर्च में बारों महीने पानी मिल सकता है. ऐसा होकर भी ग्रामीण जलापूर्ति विभाग की ओर से नई योजना को मंजूरी देना रहस्यमय बात है ऐसा भी आरोप हो रहा है.

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