मुंबई: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोलते हुए उसके ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और महाराष्ट्र में सत्ता में रहने वाली पार्टी आखिर किससे लोकतंत्र बचाने के लिए रैलियां निकाल रही है? राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि भाजपा लोकतंत्र की बात तो करती है, लेकिन जब चुनावी नतीजे उसके पक्ष में नहीं आते, तब वही लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश करती है।
राज ठाकरे की सबसे तीखी आलोचना महाराष्ट्र सरकार के उस फैसले को लेकर रही, जिसमें बड़े सहकारी संस्थानों के प्रबंधन मंडलों में सरकार द्वारा नामित निदेशकों को शामिल करने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने विशेष रूप से कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ यानी गोकुल डेयरी के चुनाव और उसके बाद हुए घटनाक्रम का जिक्र किया।
‘सत्ता में रहकर लोकतंत्र बचाने की रैली निकाल रही BJP’
राज ठाकरे ने भाजपा के ‘लोकतंत्र बचाओ’ अभियान पर तंज कसते हुए कहा कि देश में शायद यह पहला उदाहरण होगा, जहां सत्ता में बैठी पार्टी ही विपक्षी दलों के खिलाफ लोकतंत्र बचाने के लिए मार्च निकाल रही है।
उन्होंने सवाल किया कि यदि भाजपा वास्तव में लोकतंत्र की रक्षा को लेकर इतनी गंभीर है, तो उसे गोकुल डेयरी के मामले में लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान क्यों नहीं किया?
राज ठाकरे के मुताबिक, भाजपा सत्ता में रहते हुए लोकतंत्र बचाने की बात करती है, लेकिन दूसरी ओर अपने राजनीतिक हितों के अनुसार फैसले लेती है। उन्होंने इसे भाजपा के दोहरे रवैये का उदाहरण बताया।
उन्होंने आतंकवाद, देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर भाजपा द्वारा निकाले जाने वाले आंदोलनों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि सरकार को इन मुद्दों पर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए, न कि हर बार आंदोलन के जरिए खुद को पीड़ित पक्ष के रूप में पेश करना चाहिए।
गोकुल डेयरी चुनाव को लेकर BJP पर निशाना
राज ठाकरे ने अपने बयान में कोल्हापुर की गोकुल डेयरी के हालिया चुनाव का विशेष रूप से उल्लेख किया।
19 अक्टूबर को हुए गोकुल डेयरी के चुनाव में कांग्रेस नेता सतेज पाटील के नेतृत्व वाले पैनल ने 25 में से 13 निदेशक पदों पर जीत हासिल की थी, जबकि महायुति समर्थित पैनल को 12 सीटें मिली थीं।
इस परिणाम के बाद सतेज पाटील समर्थित पैनल को संचालक मंडल में अधिक प्रतिनिधित्व मिला। हालांकि, 29 अक्टूबर को अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए बुलाई गई बैठक में महायुति समर्थित 12 निदेशक अनुपस्थित रहे। आवश्यक 14 सदस्यों का कोरम पूरा नहीं होने के कारण अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं हो सका।
राज ठाकरे ने सवाल उठाया कि जब भाजपा समर्थित पैनल को बहुमत नहीं मिला, तो उसके बाद सरकार ने सहकारी संस्थाओं में पांच नामित निदेशकों की नियुक्ति का फैसला क्यों लिया?
उन्होंने आरोप लगाया कि यदि भाजपा वास्तव में लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करती है, तो उसे चुनाव परिणाम स्वीकार करना चाहिए था, न कि ऐसे बदलाव करने चाहिए थे जिनसे सहकारी संस्था के सत्ता संतुलन पर असर पड़ सकता है।
सरकार के पांच नामित निदेशकों के फैसले पर विवाद
गोकुल विवाद उस समय और बढ़ गया जब महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने 4 नवंबर को महाराष्ट्र सहकारी संस्था अधिनियम, 1960 में संशोधन को मंजूरी दी।
इस प्रस्ताव के तहत 500 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक कारोबार वाली पात्र बड़ी सहकारी संस्थाओं के प्रबंधन मंडल में सरकार पांच नामित सदस्यों को नियुक्त कर सकेगी।
इन पांच सदस्यों में से चार को मतदान का अधिकार होगा, जबकि पांचवां सदस्य सरकारी प्रतिनिधि होगा, जिसे मतदान का अधिकार नहीं मिलेगा। नामित सदस्यों को अध्यक्ष पद के चुनाव में उम्मीदवार बनने की अनुमति भी नहीं होगी।
इस फैसले को लेकर विवाद इसलिए बढ़ा है क्योंकि गोकुल डेयरी भी इस वित्तीय पात्रता के दायरे में आती है। ऐसे में पहले से ही राजनीतिक खींचतान का सामना कर रहे उसके संचालक मंडल का संख्या बल बदल सकता है।
विपक्ष का आरोप है कि चुनाव में दूध उत्पादकों द्वारा दिए गए जनादेश के बाद सरकार का यह फैसला निर्वाचित प्रतिनिधियों की ताकत कम करने की कोशिश है।
दूसरी ओर, राज्य सरकार ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि इसका उद्देश्य बड़ी सहकारी संस्थाओं में प्रशासनिक गतिरोध दूर करना और कामकाज सुचारू रखना है। सरकार का तर्क है कि कोरम पूरा नहीं होने के कारण संस्थाओं का कामकाज प्रभावित नहीं होना चाहिए।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि किसी भी पैनल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था और लगातार कोरम पूरा नहीं होने की स्थिति में दोबारा चुनाव कराने की नौबत आ सकती थी।
‘BJP को भी विपक्ष की भूमिका स्वीकार करना सीखना चाहिए’
अपने बयान के अंत में राज ठाकरे ने भाजपा पर राजनीतिक रूप से खुद को पीड़ित दिखाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में विपक्षी दलों ने भाजपा के राजनीतिक वर्चस्व के दौर को सहन किया है। विपक्ष ने चुनावी हार के बावजूद लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी भूमिका निभाई है।
राज ठाकरे ने कहा कि यदि अब देश की जनता का रुझान विपक्षी दलों की ओर बढ़ रहा है, तो भाजपा को भी इस राजनीतिक बदलाव को स्वीकार करना सीखना चाहिए।
उन्होंने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि महाराष्ट्र में इस समय पानी की भारी किल्लत है और भाजपा में सामान्य समझ की भी भारी कमी दिखाई दे रही है। उन्होंने इसे राज्य की राजनीति की विडंबना बताया।
गोकुल विवाद से महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ी हलचल
गोकुल डेयरी का मामला अब महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति और विपक्ष के बीच एक नए राजनीतिक टकराव का मुद्दा बन गया है।
कांग्रेस समर्थित पैनल का आरोप है कि चुनाव के बाद सहकारी कानून में बदलाव कर सरकार दूध उत्पादकों के जनादेश को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।
इस बीच, बॉम्बे हाईकोर्ट ने गोकुल डेयरी के अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए 10 नवंबर को नई बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया है।
सरकार अपने फैसले को सहकारी संस्थाओं के सुचारू संचालन के लिए जरूरी बता रही है, जबकि विपक्ष इसे निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधिकारों को प्रभावित करने वाला कदम बता रहा है।
राज ठाकरे के ताजा बयान ने इस विवाद को और राजनीतिक रंग दे दिया है। अब गोकुल डेयरी का मामला केवल एक सहकारी संस्था के अध्यक्ष पद के चुनाव तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि महाराष्ट्र में लोकतंत्र, सहकारी संस्थाओं की स्वायत्तता और निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधिकारों को लेकर व्यापक बहस का विषय बन गया है।



