Published On : Fri, Aug 5th, 2022
By Nagpur Today Nagpur News

रेल मंत्री ने ली ऐतिहासिक कुएं की सुध

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– दिए जांच के आदेश, कुएं के पुनर्जीवन की उम्मीद जागी

नागपुर: दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के नागपुर मंडल अंतर्गत बेलिशॉप रेलवे कॉलोनी , नागपुर में फुटबॉल स्टेडियम के समीप स्थित ऐतिहासिक 70 बाय 70 व्यास के विशाल कुएं के पुनर्जीवन व उसके संवर्धन करने हेतु कई वर्षो से प्रयासरत डॉ. प्रवीण डबली ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव सहित रेल राज्य मंत्री दानवे को निवेदन देकर आजादी के अमृत महोत्सवी वर्ष में इस भोसलेकालीन ऐतिहासिक कुएं को बचाने का अनुरोध किया था।

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डॉ. डबली के इस निवेदन पर कारवाई करते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक (पी जी) जितेंद्र सिंग को इस संबंध में जॉच कर उचित करवाई के निर्देश दिए।
रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक (पी जी) ने इस संबंध में रेलवे बोर्ड के जे. डी. (पी जी) को करवाई के निर्देश दिए।

तत्पश्चात रेलवे बोर्ड के जे. डी. (पी जी) ने मध्य रेलवे के उप महाप्रबंधक आलोक सिंग को इस संबंध में जानकारी लेने के निर्देश दिए। परंतु यह मामला दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत होने से मध्य रेलवे के उप महाप्रबंधक ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के उप महाप्रबंधक (मुख्यालय) को संबंधित मामले की जानकारी लेकर उचित कारवाई के निर्देश दिए व इस कार्यवाही की संपूर्ण रिपोर्ट डॉ. डबली को देने के निर्देश भी दिए है।

रेलवे मंत्री द्वारा इस तरह डॉ. प्रवीण डबली के निवेदन पर तुरंत निर्देश देने से अब नागपुर रेलवे परिसर में स्थित इस विशालकाय कुएं के पुनर्जीवन व संवर्धन की उम्मीद जागी है। डॉ. डबली ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार माना है। साथ ही स्थानीय रेलवे अधिकारियों से भी इस विशालकाय कुएं को बचाने का अनुरोध किया है।

स्थानीय सांसद व केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से भी इस विशालकाय कुएं सहित देश के सभी ऐतिहासिक कुओं के संवर्धन करने का निवेदन किया है। ताकि भविष्य में हम पानी की समस्या से लड़ सके। यह हमारी धरोहर है।

ज्ञात हो की भविष्य में पानी का संकट मुंह बाए खड़ा है। ऐसे में शहर में स्थित भोसले कालीन विशाल कुओं की दुर्दशा चिंता का विषय है। शायद किसी को पता भी ना हो कि 70 बाय 70 व्यास के इतने विशाल कुएं महाराष्ट्र के नागपुर शहर में आज भी मौजूद हैं। जो अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे हैं । शायद मानव अपनी आधुनिक जीवन शैली में इन कुओं को भूल सा गया है, लेकिन एक समय ऐसा था जब यह विशाल कुएं भोसले वाडी गांव के साथ-साथ अंग्रेजों के अस्तबल, गन कारखाना सहित सभी को पानी पहुंचाते थे।

नागपुर में 1905 में नैरोगेज रेलवे की स्थापना हुई। रेलवे में तब स्टीम इजिन हुआ करते थे। जिसमे बहुत पानी का उपयोग हुआ करता था। ये विशाल कुएं तब नैरोगेज रेलवे को लगने वाले पानी की जरूरत को भी पूरा करते थे। लेकिन आज उनकी हालत इतनी गंभीर है कि उसमें से मात्र एक कुआं अभी जीवित है। जिसका उपयोग कभी-कभी पानी की सप्लाई के लिए किया जाता है।

दूसरा विशाल कुआं जो मोतीबाग स्टेडियम के पास स्थित है जो 200 वर्ष से भी अधिक पुराना है। जिसका व्यास 70 फीट बाय 70 फीट का है वह पूर्ण लबालब भरा है। लेकिन पानी की गुणवत्ता पूर्ण रूप से खराब हो चुकी है। रेलवे का पुराना इतिहास व उसके मानचित्र की जॉच की जाए तो हमे इन कुओं की वास्तविक स्थित व इसके कितने पुराने होने का प्रमाण जरूर मिल जायेगा।

कमाल चौक व मोतीबाग रेलवे कॉलोनी के बीच भोसले वाडी गांव हुआ करता था, अब भी है जिसे भोसले वाडी व लश्करीबाग नाम से जाना जाता है। यहां भी तीन विशाल कुए हुआ करते थे। जो अभी लुप्त प्राय हो गए और उन पर बड़ी बिल्डिंग खड़ी हो चुकी है। लेकिन 6 कुएं जो 1905 में रेलवे के क्षेत्र में थे, जिनका उपयोग रेलवे अपनी गाड़ियों की धुलाई रेलवे क्वार्टर्स को पानी की सप्लाई साथ ही रेलवे में लगने वाली पानी को इन्हीं कुओं के माध्यम से पहुंचाया जाता था।

ये कुएं आज भी अकेले अपने आप में विशालकाय हैं लेकिन इसकी और किसी का भी ध्यान नहीं है । जानकारी के अनुसार रेलवे वर्तमान में 6500000 लीटर पानी रोज मनपा से खरीदती है। उसी पानी को रेलवे में हर जगह उपयोग में लाया जाता है। यह आंकड़ा दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे मोती बाग क्षेत्र का है। आज यहां हर घर में, रेलवे के कारखाने में, डीजल शेड सहित सभी स्थानों में पानी की सप्लाई मनपा के पानी से ही होती है ।

जिन कुओं की बात हम कर रहे हैं वह रेलवे क्षेत्र में आज भी मौजूद है। जिसे बायलर कुए के नाम से जाना जाता है। एक विशालकाय कुआं जिसका चौड़ाई और लंबाई करीब 70 बाय 70 फीट है वह रेलवे स्टेडियम मोती बाग के पास स्थित है। वह पानी से पूर्ण भरा हुआ है । लेकिन आसपास का क्षेत्र जंगल बना हुआ है जिससे उस पर किसी की नजर नहीं। जिसे बॉयलर नंबर 4 के नाम से जाना जाता है । बायलर नंबर 2 स्टेडियम के दूसरी तरफ डीजल शेड के पास स्थित है । यह विशाल हुआ आज कचरे से भरा पड़ा है।

जो कुएं विशाल ऐतिहासिक धरोहर के रूप में आज भी हमारे बीच मौजूद है उनकी देखभाल करना जरूरी है। प्रशासन भविष्य में पानी की चिंताओं से अनभिज्ञ हैं या फिर जानबूझकर इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पानी की जरूरत मनपा द्वारा पूरी की जाने की कारण शायद प्रशासनिक अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं । लेकिन भविष्य की चिंता हमें यह संकेत देती है कि हमारी इन पुरानी धरोहरों को आज ही सुरक्षित कर भविष्य के लिए हमें उन्हें तैयार रखना चाहिए। ताकि जरूरत पड़ने पर यह कुएं आज भी बहुत बड़े क्षेत्र को पानी की आपूर्ति कर सकते हैं। इस क्षेत्र में कई ऐतिहासिक धरोहर भी है 300 वर्ष प्राचीन शिव मंदिर मौजूद है।

डबली ने निवेदन में कहा कि शहर के इस ऐतिहासिक कुएं को पुनर्जीवित कर इस ऐतिहासिक धरोहर को पर्यटन के रूप में विकसित करें ताकि भविष्य में कुआं खोदने की जरूरत न पड़े।

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