Published On : Fri, Aug 2nd, 2019

जनता की हो रही लूट, महाराष्ट्र में पूरे देश में सबसे महंगी बिजली – राम नेवले

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नागपुर: दिल्ली में 100 यूनिट तक 1.25 प्रति यूनिट, गुजरात में 3.43, छत्तीसगढ़ में 3.76, हरियाणा 3.65, तो वही महाराष्ट्र में 5.10 रुपए यह बिजली के रेट है. वही दिल्ली में 500 यूनिट के लिए 3.50 रुपए प्रति यूनिट, गुजरात में 4.45, छत्तीसगढ़ में 4.45, हरियाणा में 7.03, यही बात करे महाराष्ट्र में तो यही बिजली का रेट 11.57 रुपए प्रति यूनिट लिए जा रहे है. महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा बिजली का प्रति यूनिट रेट है.

यहां की जनता की सबसे ज्यादा लूटमार की जा रही है. यह कहना है विदर्भ राज्य आंदोलन समिति के विदर्भ संयोजक राम नेवले का. नागपुर की बिजली वितरण कंपनी एसएनडीएल को हटाने की मांग और बिजली बिल कम करने की मांग को लेकर समिति के कार्यकर्ताओ की ओर से 1 अगस्त को काटोल रोड के एमएसईबी के मुख्य अभियंता कार्यालय के बाहर ‘ बिजली बिल की होली जलाने ‘ का आंदोलन और ठिय्या आंदोलन किया गया. इस दौरान सैकड़ो की तादाद में कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद थे.

इस दौरान राम नेवले ने जानकारी देते हुए बताया कि जहां दिल्ली की केजरीवाल सरकार लगातार बिजली बिल में भारी कम कर रही है वही महाराष्ट्र में लगातार बिजली यूनिट के दाम में बढ़ोत्तरी की जा रही है. उन्होंने कहा की सबसे महंगी बिजली पुरे देश में महाराष्ट्र में ही है. एसएनडीएल को हटाने के लिए और बिजली की दर कम करने के लिए बिजली के बिल की होली जलाने के बाद इंजीनियर को निवेदन दिया गया है. इंजीनियर ने कहा की उनके हाथ में कुछ नहीं है. उन्होंने यह निवेदन मुख्यमंत्री फडणवीस देने का आश्वासन दिया है.

नेवले ने आगे बताया की मुंबई में भी बिजली का यूनिट का दाम कम है. दिल्ली में बिजली नहीं बनती है. वे दुसरो से लेते है. लेकिन फिर भी वे बिजली लोगों को सस्ती दे रहे है. लेकिन नागपुर में पावर प्लांट होने के बावजूद भी बिजली बिल के माध्यम से जनता की लूट की जा रही है.विदर्भ में 6 कारखाने है बिजली के हमारे पास बिजली का भरपूर उत्पादन है. बिजली के लिए पानी और जमीन विदर्भ की है इसका प्रदुषण भी विदर्भ की जनता को ही झेलना पड़ता है. बावजूद इसके यही की जनता को बिजली यूनिट सबसे महंगा दिया जा रहा है.

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उन्होंने कहा की अगर विदर्भ पृथक होता है तो बिजली आधे कीमत में मिल सकती है. यदि कोई अच्छी सरकार आयी तो वे शुन्य पैसो में या निशुल्क भी बिजली दे सकती है. हमारे पास विदर्भ में सरप्लस बिजली है. हमें केवल 3 हजार मेगावॉट बिजली ही चाहिए. अगर बाकी की बिजली हमने बेचीं तो भी हमारे पास 25 हजार करोड़ रुपए जमा हो सकते है. 6 पॉवरप्लांट की कैपेसिटी 11. 50 हजार वॉट की है. इतनी बिजली तैयार हो सकती है.

इतने कर्मचारी है. इतने लोगों को वेतन दिया जाता है, बावजूद इसके सरकार केवल 6 हजार 300 वॉट ही बिजली तैयार कर रही है. इसके बाद दूसरी निजी कंपनियों से महंगी बिजली खरीदी जाती है. जिसका भार भी जनता पर ही आता है. उत्पादन डबल होता है तो उत्पादन खर्च कम आता है.

लेकिन सरकार जानभूझकर यह सब कर रही है. 1 यूनिट बिजली तैयार करने के लिए 2.40 रुपए का खर्च आता है. विदर्भ का 50 प्रतिशत कोयला उपयोग में लाया जाता है, बाकी का कोयला विदेश से मंगाया जाता है. जिसके कारण हमें ज्यादा बिजली बिल का यूनिट देना पड़ रहा है. हमारे पास सभी कर्मचारी होने के बाद भी दूसरी कंपनी से मेन्टेन्स किया जाता है. उन्होंने बताया की इसी मांग को लेकर 9 अगस्त क्रांति दिन भी आंदोलन किया जाएगा.

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