Published On : Mon, Aug 22nd, 2016

सामूहिक रूप से मध्यान्न भोजन वितरण प्रणाली का विरोध

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File Pic


नागपुर:
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हालही में मनपा स्कूलों में एक साथ मध्यान्न भोजन वितरित करने की योजना शुरू की थी। टाटा ट्रस्ट बचतगट और अक्षय पात्र फाउंडेशन के बीच हुए सामंजस्य करार के बाद शहर की 44 स्कूलों में शुरू योजना को लेकर मुख्यमंत्री आशान्वित दिखे। पर इस क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं ने इस योजना पर सवाल खड़े किये है।

आरटीई एक्शन कमिटी ने इस योजना पर सवाल उठाते हुए इस योजना की निगरानी व्यवस्था की जानकारी सरकार से देने को कहा है। संस्था के अध्यक्ष शाहीद शरीफ़ के अनुसार एक ओर सरकार केंद्र सरकार की गाइडलाइन को नजरअंदाज कर रही है। जबकि दूसरी तरफ ऐसी योजनाओं की शुरुवात कर बच्चो की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। शरीफ़ के अनुसार मिड डे मील योजना की निगरानी के संबंध में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 25 अप्रैल 2013 को राज्यो को दिशानिर्देश दिया है की प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी अध्यक्षता में मध्यान्न भोजन प्रकल्प नियंत्रण समिति स्थापित की जाये। जो इस योजना की निगरानी करेगी। पर बीते एक वर्ष से इस समिति का गठन हुआ ही नहीं। इस बीच इस योजना के तहत अनाज की चोरी, ख़राब भोजन बच्चो को परोसे जाने की खबरे लगातार आती रही है।

यह हाल तब है जब छोटे पैमाने पर मध्यान भोजन का वितरण किया जा रहा है। जब बड़े पैमाने पर यह योजना क्रियान्वयित होगी तो निगरानी रखना और ज्यादा मुश्किल हो जायेगा। इसके अलावा एक साथ एक समय पर स्कूलों में गरम भोजन कैसे वितरित होगा यह भी बड़ा सवाल है।

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