नागपुर: प्रकाश आंबेडकर और असद्दुदीन ओवैसी गुरुवार को नागपुर में संयुक्त सभा करने जा रहे है। दलित और मुस्लिम समुदाय के मतदाताओं को एकत्रित करने के लिए दोनों नेताओं ने महाराष्ट्र में गठबंधन का प्रयोग किया है। जिसके बाद पहली बार संघ के गढ़ में दोनों नेता एकसाथ सभा ले रहे है। जिस पर सबकी नज़र रहेगी। पांच राज्यों में आये चुनावी नतीजे के बाद बीजेपी बैकफुट पर है ये दोनों नेता बीजेपी और आरएसएस के धुरविरोधी है। ऐसे में दोनों क्या बोलेंगे इस पर नज़र होगी। कस्तूरचंद पार्क मैदान में आयोजित इस सभा के लिए आंबेडकर की भारिप बहुजन महासंघ और ओवैसी की एमआईएमआईएम अर्थात आल इंडिया मजलिस ए इत्तिहादउल मुस्लिमीन के पार्टी कार्यकर्ताओं ने विदर्भ भर में प्रचार किया है।
विदर्भ से हजारों कार्यकर्ताओं के नागपुर में आयोजित सभा में पहुँचने का दावा किया गया है। भारिप बहुजन महासंघ का राज्य में अपना जनाधार है इसी तरह ओवैसी की पार्टी ने भी राज्य में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी है। राज्य में एमआईएमआईएम के दो विधायक है जबकि नागपुर में महानगर पालिका के चुनाव में करीब 64 हज़ार मत पार्टी को प्राप्त हुए थे। आंबेडकर और ओवैसी दलित व मुस्लिम समुदाय के वोटों को साधना चाहते है जिसके लिए दोनों बहुजन वंचित आघाड़ी का नेतृत्व कर रहे है। आंबेडकर की पहल पर बनी अघाड़ी में 15 के अधिक राजनीतिक संगठनों को शामिल किया गया है। राज्य में 17 प्रतिशत दलित व 13 प्रतिशत मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या है। इन दोनों नेताओं का लक्ष्य इन्ही मतों को साधने की है।
नागपुर राजनीतिक रूप से काफ़ी अहमियत रखता है यह दलित आंदोलन का केंद्र बिंदु रहा है। राष्ट्रीय राजनीति में शहर का प्रभाव किसी से छुपा नहीं है। दोनों नेता इसी शहर से अपने राजनीतिक लक्ष्य को साधना चाहते है। ओवैसी हैदराबाद से सुबह की नागपुर पहुँच जायेगे। जहाँ से वो सीधे रविभवन में रुकेंगे। यहाँ स्थानीय कार्यकर्ताओं से मिलने का भी उनका कार्यक्रम है। समाज में अपनी भूमिका प्रभावी रूप से पहुँचाने के लिए दलित-मुस्लिम समाज से आने वाले साहित्यकार,सामाजिक कार्यकर्त्ता और प्रभावी लोगों को भी जोड़ने का प्रयास दोनों राजनीतिक दलों द्वारा किया जा रहा है।
दोनों नेताओं के निशाने पर संघ-बीजेपी
नागपुर में आयोजित सभा के दौरान आंबेडकर और ओवैसी क्या बोलेंगे इस पर सबकी नजर होगी। क्यूँकि नागपुर में संघ का मुख्यालय है और इन दोनों नेताओं के राजनीतिक-वैचारिक विरोध के केंद्र में संघ और बीजेपी ही रही है। दोनों नेता लगातार बीजेपी के साथ संघ पर शाब्दिक हमला बोलते रहे है। मंगलवार को ही पांच राज्यों के आने चुनाव परिणाम में तीन राज्यों में बीजेपी सत्ता से बेदखल हो चुकी है। जबकि तेलंगाना में आवैसी की पार्टी के सात विधायक जीत कर आये है पिछली विधानसभा में भी पार्टी के इतने ही सदस्य थे।
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