प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा हाल ही में देशवासियों से सोने की अत्यधिक खरीदारी, अनावश्यक विदेशी यात्राओं और फिजूल खर्च से बचने की अपील के बाद निवेशकों के बीच नई चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।
हालांकि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहीं भी SIP, शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड निवेश को लेकर कोई सीधी चेतावनी नहीं दी, लेकिन उनके “आर्थिक अनुशासन” वाले संदेश के बाद सोशल मीडिया और निवेशक समूहों में यह अटकलें तेज हो गई हैं कि आने वाले महीनों में बाजार में 10–15% तक की गिरावट देखने को मिल सकती है।
आखिर क्यों बढ़ रही है चिंता?
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय शेयर बाजार में तेजी का सबसे बड़ा आधार रिटेल निवेशक और SIP निवेश रहे हैं। हर महीने रिकॉर्ड SIP निवेश बाजार को सहारा दे रहा है, जबकि दूसरी ओर विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं।
इसी बीच:
- विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी है
- वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बढ़ रही है
- कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है
- कई सेक्टर्स में शेयरों की वैल्यूएशन काफी ऊंची मानी जा रही है
ऐसे माहौल में प्रधानमंत्री की “संयमित खर्च” वाली अपील को कुछ लोग आने वाली आर्थिक सख्ती और बाजार दबाव से जोड़कर देख रहे हैं।
क्या सरकार ने SIP को लेकर कोई चेतावनी दी है?
नहीं।
अब तक सरकार, RBI, SEBI या प्रधानमंत्री की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है जिसमें कहा गया हो कि SIP पोर्टफोलियो अक्टूबर तक 12–15% गिर सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में 10–15% का करेक्शन असामान्य नहीं होता। भारतीय बाजारों में पहले भी कई बार ऐसी गिरावटें आई हैं, और लंबे समय में बाजार फिर संभलता रहा है।
SIP निवेशकों को क्या करना चाहिए?
वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि केवल अफवाहों या डर के आधार पर निवेश से बाहर निकलना सही रणनीति नहीं है।
निवेश जारी रखें अगर:
- आपका निवेश लंबी अवधि के लिए है
- आपके पास इमरजेंसी फंड मौजूद है
- SIP का बोझ आपकी आय पर ज्यादा नहीं है
- आपका लक्ष्य लंबी अवधि में संपत्ति निर्माण है
सावधानी बरतें अगर:
- आपने हाल ही में ऊंचे स्तर पर निवेश शुरू किया है
- आपका पैसा अगले 2–3 वर्षों में जरूरी पड़ सकता है
- आपने छोटे और जोखिम वाले फंड्स में ज्यादा निवेश किया है
विशेषज्ञों का कहना है कि SIP का सबसे बड़ा फायदा ही यही है कि बाजार गिरने पर निवेशक कम कीमत पर ज्यादा यूनिट्स खरीद पाते हैं।
घबराहट में लिए फैसले सबसे खतरनाक
इतिहास बताता है कि अधिकतर रिटेल निवेशक तेजी में बाजार में प्रवेश करते हैं और गिरावट के दौरान डरकर बाहर निकल जाते हैं, जिससे नुकसान और बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा समय में सबसे जरूरी है:
- निवेश में अनुशासन
- पोर्टफोलियो का संतुलन
- अफवाहों से दूरी
- लंबी अवधि की सोच
बाजार में उतार-चढ़ाव आते रहेंगे, लेकिन घबराहट में लिया गया फैसला अक्सर सबसे महंगा साबित होता है।








