Published On : Fri, Apr 14th, 2017

एक जमाना था जब अँगूठा अनपढ़ होने की निशानी थी अब यही अँगूठा शक्ति की निशानी होगा- प्रधानमंत्री


नागपुर:
एक जमाना था जब अँगूठा अनपढ़ होने की निशानी थी अब यही अँगूठा शक्ति की निशानी होगा यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भीम एप्प के उद्घाटन के अवसर पर नागपुर में कहीं। मनकापुर स्थित स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स में नीति आयोग के समारोह में डिजिटल इंडिया के तहत भीम एप्प के अलावा अन्य परियोजनाओं का प्रधानमंत्री के हस्ते उद्घाटन हुआ। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहाँ 21 वी सदी ज्ञान की सदी है और इतिहास गवाह है की देश से ज्ञान के दम पर दुनिया में मुक़ाम हासिल किया है। भीम एप्प नाम को डॉ बाबासाहब आंबेडकर के नाम से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री ने कहाँ बाबासाहब ने जीवन भर ज़हर पिया ,भेदभाव का शिकार हुए पर उन्होंने संविधान के रूप में देश को अमृत दिया।

व्यक्ति के जीवन में मिले कटु अनुभव जीवन का हिस्सा बन जाते है पर उन्होंने जीवन में मिले अनुभवों को कटुता के रूप में पेश नहीं किया। हमें बाबा साहब से प्रेरणा मिलती है की आभाव के जीवन में किसी भी प्रभाव से प्रभावित हुए बिना प्रभावी जीवन कैसे जिया जा सकता है। 2022 में देश की आज़ादी को 75 साल हो जाएंगे हमारा संकल्प है इस वक्त तक देश में सभी के पास अपना घर हो। जिन महान विभूतियों ने राष्ट्र निर्माण में जीवन खपा दिया उनके योगदान में देश का हर नागरिक अपना हिस्सा अदा करते हुए नए मजबूत भारत के लिए अपना योगदान दे।

डॉ आंबेडकर की आर्थिक सोच पर 65 वर्षो तक महज़ चर्चा हुई
प्रधानमंत्री के मुताबिक डॉ आंबेडकर महान अर्थशास्त्री ने उन्होंने अपनी नीतियों के माध्यम से देश के विकास का सपना देखा पर देश का दुर्भाग्य है। उनकी नीतियों पर बीते 65 साल महज़ चर्चा हुई। पर अब उनकी नीतियों को लागू किया जा रहा है देश को मजबूत बनाने के लिए आम से आम नागरिक को सशक्त बनाने का काम हो रहा है। आज देश के चरणों में नई व्यवस्था अर्पण की जा रही है।

डिजिधन – निजिधन का नारा
अपने नारो के लिए प्रसिद्ध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में डिजिटल पेमेंट भुगतान को बढ़ावा देने के लिए डिजिधन – निजिधन का नया नारा दिया। प्रधानमंत्री के मुताबिक यह नारा गरीबों की आवाज़ बनेगा। कम कैश जीवन में महत्त्व रखती है। भीम एप्प देश की अर्थव्यवस्था में महारथी का काम करेगा। यह भ्रस्टाचार की लड़ाई में अहम योगदान देगा। करंसी को छापने और उसे जनता तक पहुँचने में जितना पैसा खर्च हो जाता है उतने में न जाने कितने लोगो को घर उपलब्ध हो सकता है। अब दिमाग लेस पेपर लेस बैंकिंग के दिन वाला है।

दुनिया करेगी भीम-आधार पर रिसर्च
प्रधानमंत्री ने कहाँ जिस तकनीक का इस्तेमाल कर यह व्यवस्था विकसित की गई है वह विश्व में किसी के पास नहीं है मई निति आयोग को बधाई देता हु की दुनिया की बेहतरीन तकनीक का अध्ययन कर भीम आधार का निर्माण किया गया। अब इस व्यवस्था की दुनिया अध्ययन करेगी कई देश इसे लागू करेंगे और बच्चे इसकी पढाई करेंगे।