Published On : Thu, Mar 5th, 2020

वीडियो : ‘ PLASTO ‘ कंपनी ही नहीं ‘ विशाल अग्रवाल ने मदनमोहन अग्रवाल की करोडो की जमींन भी बेचीं

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नागपुर: नागपुर शहर की और मध्य भारत की प्लास्टिक के पाइप और पानी की टंकिया बनाने वाली चर्चित कंपनी ‘ प्लास्टो ‘ PLASTO ‘ के मौजूदा संचालको की धोखाधड़ी के बारे में ‘ नागपुर टुडे ‘ कई दिनों से नए नए खुलासे कर रहा है. ‘ प्लास्टो ‘ PLASTO ‘ कंपनी के संचालक विशाल अग्रवाल, नीलेश अग्रवाल पर धोखाधड़ी के आरोप करनेवाले अंकुश अग्रवाल है, जो इस कंपनी के मूल संस्थापक मदनमोहन अग्रवाल के बेटे है. अंकुश अग्रवाल ने ‘ नागपुर टुडे ‘ को अब नई जानकारी देते हुए बताया की विशाल अग्रवाल, उर्मिला अग्रवाल, वैभव अग्रवाल, नीलेश अग्रवाल और श्रेया अग्रवाल ने कंपनी हड़पने के अलावा उनकी करोडो की जमींन भी बेचीं है. अंकुश ने बताया की उनके पिता मदनमोहन अग्रवाल और रजनीदेवी के नाम से सातनवरी में 22 एकर का खेत था. वह खेत विशाल अग्रवाल ने धोखाधड़ी करके बेचा है. उसका एक भी रूपया इनको नहीं दिया गया है. 1999 में जब पिता को पैरालिसिस का अटैक आया तो वे बेडरेस्ट पर थे. इस दौरान विशाल अग्रवाल ने झिंगाबाई टाकली का दूसरा प्लॉट बेच दिया. झिंगाबाई टाकली में ही तीसरी जमींन भी इन्होने 2012 में नीलेश अग्रवाल की बेटी श्रेया अग्रवाल को 4 करोड़ की प्रॉपर्टी 44 लाख रुपए में बेच दी. यही पैसा उनके पिता के अकाउंट में डालकर उनकी बुआ के अकाउंट में डाला गया. आखिर में सभी पैसा घुमा फिराकर इन्होने अपने ही नाम पर कर दिया. अंकुश ने बताया उनके ‘ प्लास्टो ‘ PLASTO ‘ कंटेनर के शेयर्स और वैभव प्लास्टिक मोल्ड्स के शेयर्स भी अपने नाम पर ट्रांसफर किए है. अंकुश ने कहा है की विशाल अग्रवाल, उर्मिला अग्रवाल, वैभव अग्रवाल, नीलेश अग्रवाल ने केवल उनकी जमींन ही 50 से 60 करोड़ रुपए की बेच दी है.

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जाली दस्तखत के मामले में पंजाब नेशनल बैंक पर भी आरोप
अंकुश ने शहर के नागपुर सहकारी बैंक और सेमिनरी हिल्स स्थित पंजाब नेशनल बैंक पर भी आरोप लगाए है. उनका कहना है की इस पुरे धोखाधड़ी के मामले में इन दोनों बैंको ने कुछ नहीं किया है. बैंक की ओर उनके पेपर ही देने से मना कर दिया गया था. बैंक के उच्च अधिकारियो से भी संपर्क किया. लेकिन उन्होंने भी कुछ नहीं किया. अंकुश का कहना है की अगर आप बैंक से खुद से जुड़े कोई भी डॉक्यूमेंट मांगते है तो एक दिन के भीतर दिए जाते है. लेकिन इनको सालों तक डॉक्यूमेंट नहीं दिए गए. हमने बैंक से डॉक्यूमेंट मांगे थे, लेकिन बैंक ने हमें यह लिखकर दिया की हमने जो भी काम किए है वह बैंक के नियम के अनुसार किए है. हमने बैंक से अकॉउंट स्टेटमेंट, दस्तखत स्पेसिमेन, वाउचर और चेक की मांग की थी, कि हमने हमारे अकाउंट से किस तरह से करोडो रुपए निकाले है. लेकिन बैंक ने हमारे डॉक्यूमेंट दिखाने के लिए 6 साल लगा दिए. अभी तक किसी भी तरह की कार्रवाई भी नहीं की गई है. उन्होंने कहा की उनके ही घर में जब 7 अकाउंट खोले गए है तो ऐसे कई बुजुर्ग नागरिकों के साथ किस तरह से लापरवाही बैंको द्वारा की गई होगी.

मदनमोहन अग्रवाल के असली (ORIGINAL ) दस्तखत और जाली दस्तखत की बैंक द्वारा जांच करने के सवाल पर अंकुश ने जवाब देते हुए कहा की हमने बैंक को बताया की यह दस्तखत हमारे पिता की नहीं है. कोई भी आम नागरिक उस दस्तखत की पहचान कर सकता है. लेकिन फिर भी बैंक की ओर से कोई भी कार्रवाई नहीं की गई. उन्होंने सेमिनरी हिल्स स्थित पंजाब नेशनल बैंक की पूर्व मैनेजर और ‘ प्लास्टो ‘ PLASTO ‘ के संचालक विशाल अग्रवाल पर हेरफेर का आरोप लगाया है.

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