
नागपुर – साइबर अपराधियों ने लोगों को ठगने के लिए अब APK फाइल का सहारा लेना शुरू कर दिया है। मोबाइल पर भेजी गई एक फाइल पर क्लिक करना किस तरह भारी पड़ सकता है, इसका ताजा मामला नागपुर के कोराड़ी थाना क्षेत्र में सामने आया है। यहां साइबर अपराधियों ने एक महिला के बैंक खाते से कथित तौर पर 8 लाख 99 हजार रुपये निकाल लिए। महिला ने जमीन बेचकर मिली रकम बैंक में जमा की थी। इस तरह उसकी मेहनत की कमाई पर साइबर ठगों ने सेंध लगा दी। मामले की शिकायत मिलने के बाद कोराड़ी पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जमीन बेचकर मिले थे 10 लाख रुपये
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, कोराड़ी निवासी गीता राजू वैरागडे (54) ने पिछले वर्ष अपनी जमीन बेची थी। जमीन के सौदे से उन्हें 10 जून 2025 को 10 लाख रुपये मिले थे। महिला ने इस रकम को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से बोखारा स्थित केनरा बैंक की शाखा में जमा किया था। जमीन बेचकर मिली यह राशि उनके लिए महत्वपूर्ण जमा पूंजी थी।
लेकिन कुछ समय बाद साइबर अपराधियों ने इसी बैंक खाते को निशाना बनाया। आरोप है कि ठगों ने तकनीक का इस्तेमाल करते हुए महिला के खाते से लाखों रुपये दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिए।
वॉट्सऐप पर भेजी गई APK फाइल
बताया जाता है कि 13 से 22 अक्टूबर 2026 के बीच महिला के वॉट्सऐप पर किसी नंबर से APK फाइल भेजी गई थी। इस फाइल पर महिला के बेटे ने क्लिक किया। इसके बाद खाते से रकम निकलने का सिलसिला शुरू हुआ। आरोप है कि साइबर अपराधियों ने अलग-अलग लेनदेन के जरिए कुल 8 लाख 99 हजार रुपये किसी अन्य खाते में ट्रांसफर कर दिए।
खाते से इतनी बड़ी रकम निकल जाने के बाद महिला को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, यह घटना मोबाइल पर भेजी गई APK फाइल से जुड़ी है। हालांकि, फाइल किस नंबर से भेजी गई थी, उसके जरिए मोबाइल या बैंक खाते तक किस तरह पहुंच बनाई गई और रकम किन खातों में ट्रांसफर हुई, इन सभी पहलुओं की जांच जरूरी है।
क्या होती है APK फाइल?
APK का पूरा नाम Android Package Kit है। यह एंड्रॉयड मोबाइल में ऐप इंस्टॉल करने के लिए इस्तेमाल होने वाली फाइल होती है। सामान्य तौर पर ऐप आधिकारिक ऐप स्टोर से डाउनलोड किए जाते हैं, लेकिन साइबर अपराधी कई बार वॉट्सऐप या अन्य माध्यमों से संदिग्ध APK फाइल भेजते हैं।
ऐसी फाइल इंस्टॉल करने या उससे जुड़ी अनुमतियां देने पर मोबाइल की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। कुछ दुर्भावनापूर्ण ऐप संवेदनशील जानकारी तक पहुंचने, संदेशों को पढ़ने या अन्य संदिग्ध गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। हालांकि, केवल फाइल पर क्लिक करने से ही बैंक खाते से रकम निकल गई, ऐसा निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता। इस मामले में तकनीकी जांच से ही ठगी का वास्तविक तरीका स्पष्ट होगा।
कोराड़ी पुलिस ने दर्ज किया मामला
घटना के संबंध में कोराड़ी पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। अब पुलिस यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि संबंधित APK फाइल किसने भेजी, रकम किन बैंक खातों में गई और इस वारदात के पीछे कौन लोग शामिल हैं। साइबर अपराधियों तक पहुंचने के लिए मोबाइल से जुड़े डिजिटल साक्ष्य और बैंक लेनदेन की जानकारी अहम हो सकती है।
फिलहाल आरोपियों का सुराग लगाना बाकी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस वारदात को अंजाम देने के लिए किस तकनीक का इस्तेमाल किया गया और ठगी की रकम की बरामदगी की कितनी संभावना है।
सावधानी ही साइबर ठगी से बचाव
इस घटना ने एक बार फिर मोबाइल पर आने वाली अनजान फाइलों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत उजागर की है। किसी परिचित के नाम से फाइल आए, तब भी उसकी पुष्टि किए बिना उसे इंस्टॉल नहीं करना चाहिए। बैंक खाते से संबंधित OTP, PIN, पासवर्ड या अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।
यदि बैंक खाते से अनधिकृत लेनदेन होने का पता चले, तो तुरंत बैंक से संपर्क कर खाते और डिजिटल भुगतान की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए। साथ ही साइबर अपराध की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर या आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर दर्ज करानी चाहिए।
एक छोटी-सी डिजिटल लापरवाही बड़े आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है। इसलिए अनजान APK फाइल से दूरी बनाए रखना और मोबाइल की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना बेहद जरूरी है।



