
यवतमाल। पंचायत क्षेत्र विस्तार अधिनियम (पेसा) यह आदिवासी क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण कानून होने से उस पर कठोरता से अमंल करें, उसी प्रकार आदिवासियों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए, वनक्षेत्र में पानी रोकने के लिए बांध का उपक्रम कार्यान्वित करना जरूरी है, ऐसा राज्यपाल सी. विद्यासागर राव ने कहा. वे स्थानीय बचत भवन में पेसा और वनअधिकार कानून तथा आदिवासियों के लिए कार्यान्वित विकास कामों का जायजा ले रहें थे. उस समय उन्होंने उपस्थित सभी अधिकारियों को यह सूचनाए दी. इस बैठक में राज्यपाल के सचिव विकासचंद्र रस्तोगी, उपसचिव परिमल सिंह, विभागीय आयुक्त ज्ञानेश्वर राजुुरकर, मुख्य वनसंरक्षक वसंत गुरमे, जिलाधिकारी राहुल रंजन महिवाल, एस.पी. संजय दराड़े, सीईओ डॉ.शरद कुलकर्णी, अतिरिक्त जिलाधिकारी राजेश खवले समेत सभी विभागप्रमुख अधिकारी उपस्थित थे.
पेसा कानून से आदिवासी क्षेत्र के गांवों को विकास के लिए विशेष अधिकार प्रदान किए गए है. इस अधिकार से उस क्षेत्र के गांव का विकास का नियोजन, प्राकृतिक साधन संपत्ति पर के अधिकार, वनोउपज आदि का व्यवस्थापन संबंधित गांव की ग्रामसभा को करना है, ऐसे ग्रामसभा में लाभार्थी चुनने के साथ ही
सारे गाव के विकास का नियोजन करने के लिए सरकारी यंत्रणा ने पूरी क्षमता के साथ काम करना चाहिए, ऐसा भी राज्यपाल महोदय ने सूचना की. वनअधिकार कानून के तहत पात्र लाभार्थियों को वनअधिकारी के वैयक्तिक तथा गाव के विकास के लिए सामूहिक दावे ज्यादा से ज्यादा प्रमाणे में मंजूर होना जरूरी है. इस कानून के जनजागृति के साथ ही अधिका अधिक दावें दाखल करने के लिए प्रयास जरूरी है. आदिवासी विशेषत: पेसा क्षेत्र के आदिवासियों के विकास के लिए अच्छी योजना कार्यान्वित की जानी चाहिए. इन योजनाओं के पात्र लाभार्थियों का चयन ग्रामसभा ने करना चाहिए. वैयक्तिक लाभार्थियों का चयन कर उन्हें योजनाओं का लाभ देना जरूरी है. वनक्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सिमेंट नाला बांध बनाने को वनविभाग ने प्राथमिकता देना जरूरी है. सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने पर आदिवासी क्षेत्र के गांवों को उसका लाभ होगा, ऐसा भी राज्यपाल ने कहा. उसी प्रकार पेसा क्षेत्र में बिजली कनेक्शन का जायजा लेते समय इस क्षेत्र के हर परिवार को बिजली कनेक्शन बिजली देना जरूरी है. अगर यह कार्य अधूरा है तो उसे फौरन पूरा करना जरूरी है. आदिवासी क्षेत्र के शौचालय का निर्माण कार्य, पानीआपूर्ति, स्वास्थ्य आदि की जानकारी भी राज्यपाल ने ज्ञात की.
इस समय किसान आत्महत्या की वजह पूछी
यवतमाल समेत अमरावती संभाग और वर्धा इन जिलों में बड़े पैमाने पर पैकेज के बाद भी किसान आत्महत्या का सिलसिला क्यों नहीं रुक रहा है? उसका कारण
क्या है? आदि सवालों के जवाब भी राज्यपाल ने उपस्थित अधिकारियों से पूछलिए. उन्होंने कहा कि, किसानों की मानसिकता बदलाने के लिए समूपदेशन जैसे
कार्यक्रम लेकर किसानों का आत्मबल बढ़ाने के लिए ग्रामस्तर पर प्रयास करना जरूरी है. इस समय राज्यपाल के सचिव रस्तोगी और उपसचिव परिमल सिंह ने
पेसा के अमंल पर सभी अधिकारी ध्यान दें, ऐसी सूचना भी उन्होंने की. इससे पहले जिलाधिकारी राहुल रंजन महिवाल ने पेसा और वनअधिकार कानून के बारे
में मान्यवरों को जानकारी दी. उससे पहले स्थानीय विश्राम भवन पर 10 शिष्टमंडलों ने राज्यपाल से मिलकर उनके ज्ञापन सौंपे और राज्यपाल से चर्चा भी की.
जल, जमीन, जंगल सभी के लिए
पांढरकवड़ा के संत गाडग़ेबाबा आश्रमशाला में राज्यपाल महोदय ने कहा कि, जल, जमीन, जंगल सभी के लिए है. उनपर सिर्फ आदिवासियों का ही नहीं तो सभी
समाज के लोगों का अधिकार हैै. सर्वसामान्य लोगों को न्याय मिलें, उनकी समस्या का निवारण हों, इसलिए वे यवतमाल जिले के दूरदराज क्षेत्र में मिलने के लिए आए है. वे और सरकार जनता की समस्या का निवारण करेंगे ही मगर साथ में ही उनकी जरूरतें पहचानकर उन्हें भी पूरा करेंगे. श्रमशक्ति का उपयोग अच्छे कामों के लिए किया जाएंगा. उन्होंने कहा कि, सफाई अभियान यह संत गाडग़ेबाबा की देन है. सबसे पहले सैकड़ों वर्ष पूर्व उन्होंने इस क्षेत्र में सफाई अभियान शुरू किया था. आज भी उन्हें इसी काम के लिए पूजा जाता है. इससे पहले उन्होंने पांढरवाणी जिप स्कूल, आंगनवाड़ी में छात्रों से चर्चा कर उनका हाल जाना, उसके बाद अंगनवाड़ी भी पहुंचकर वहां का निरीक्षण किया. उसी प्रकार आईल पंप का वितरण किया. शिबला आश्रमशाला के छात्रावास का निरीक्षण कर छात्राओं से चर्चा की.
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