Published On : Thu, Sep 27th, 2018

निष्क्रिय नगरसेवकों पर मनपा प्रशासन हावी

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नागपुर: पुरानी कहावत है कि ‘आसमान से गिरे,खजूर पर अटके’ . यह कहावत आज मनपा की कार्यप्रणाली पर फ़ीट बैठ रही है. दूसरी ओर पक्ष,विपक्ष और खास कर सत्तापक्ष की निष्क्रियता के कारण शहर का विकास कार्य पिछले ५ माह से ठप पड़ गया है. अर्थात नेताओं के ढुलमुल नीति के कारण मनपा प्रशासन अपनी मनमानी पर उतर आया है.

ज्ञात हो कि वर्ष २०१८-१९ का महत्वाकांक्षी बजट मनपा स्थाई समिति के सभापति विक्की कुकरेजा ने पेश किया था, जिसे मंजूरी भी मिली. लेकिन प्रशासन ने इस बजट को प्रशासकीय मंजूरी देने में अटका दिया. और मनमर्जी करते हुए सिर्फ अति महत्वपूर्ण आधा दर्जन मद सहित महापौर, उपमहापौर और स्थाई समिति सभापति के कोटे के मद के तहत विकासकार्य करने को प्राथमिकता दी. इसके बाद महापौर और उपमहापौर ने अपने कोटे मद के तहत राशि वितरण पर रोक लगा दी. तो दूसरी ओर स्थाई समिति सभापति कुकरेजा ने उदारता दिखते हुए सभी पक्षों के नगरसेवकों की महत्वपूर्ण प्रस्तावों के लिए निधि मुहैया करवाई.

क्यूंकि सीमित निधि से पूरे शहर को संभाला नहीं जा सकता था इसलिए कुछ दिनों बाद सर्वपक्षीय दलों के नगरसेवकों के हंगामा का दौर शुरू हुआ. इससे सत्तापक्ष ज्यादा विचलित हुआ और उन्होंने विपक्ष की आड़ में प्रशासन पर अचूक वार किया. एक ही वार से घायल मनपा प्रशासन ने और ५०% से अधिक कोष सीमित राशि के तहत नगरसेवकों के लिए शुरू की.

आज की सूरत में लगभग सभी कोष शुरू है. लेकिन प्रशासन ने निष्क्रिय सत्तापक्ष,विपक्ष के समक्ष नए उलझन में डाल दिया. अमूमन शत-प्रतिशत नगरसेवकों ने अपने-अपने प्रभाग के प्रस्ताव तैयार किए, कनिष्ठ अभियंता से लेकर उपायुक्त स्तर तक हस्ताक्षर हो चुके लेकिन अतिरिक्त आयुक्त सह प्रभारी आयुक्त ने लगभग सभी प्रस्तावों पर अंतिम मुहर लगाने से इंकार कर दिए. नतीजा शहर का विकास कार्य ठप पड़ गया. यह भी कड़वा सत्य है कि उक्त दोनों आला अधिकारी सह प्रभारी वित्त अधिकारी सत्तापक्ष के चुनिंदा पदाधिकारी के आगे नतमस्तक नज़र आ रहे हैं. जिसके कारण प्रशासन ने पिछले दिनों बस ऑपरेटरों को सवा करोड़ से २-२ करोड़ की राशि दी.

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उल्लेखनीय यह है कि चुनावी वर्ष में सत्तापक्ष और विपक्ष की निष्क्रियता से मनपा प्रशासन आखिर किसके इशारे पर शहर में असंतोष पैदा कर रहा है. चिंतनीय यह भी है कि शहर के दो भाजपाई दिग्गज के बावजूद मनपा का ‘ठनठन गोपाल’ होना समझ से परे है. या फिर सत्तापक्ष के हाथों से प्रशासन की पकड़ मजबूत होने के बजाय ढीली पड़ गई है. समय रहते प्रशासन की नकेल कसने में सत्तापक्ष और विपक्ष निष्क्रिय रही तो जल्द ही शिवसेना तीव्र आंदोलन छेड़ेगी, जिसकी जिम्मेदार मनपा प्रभारी आयुक्त और अतिरिक्त आयुक्तों की होगी.

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