Published On : Fri, May 31st, 2019

जिंदगियों को खत्म करता घातक जहर है तंबाकू- डॉ.प्रीतम गेडाम

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नागपुर: तंबाकू ऐसा जहर है जो मनुष्य को धीरे धीरे अपने आगोश में लेकर शरीर को अंदर से पूरा खोकला करता है और फिर तड़पा तड़पाकर मारता है. आकड़े बताते है की दुनियाभर में हर साल 70 लाख लोग और भारत में हर दिन करीब 2739 लोग तंबाकू व् अन्य धूम्रपान उत्पादों के कारण कैंसर व् अन्य बीमारियों से दम तोड़ देते है. एक सिगरेट पिने से जिंदगी के 11 मिनट कम हो जाते है. इसके अलावा 1 सिगरेट में 4 हजार ऐसे केमिकल्स होते है. जिससे कैंसर फैलता है. दुनिया में हर 6 सेकंड में 1 मौत तंबाकू से सेवन के कारण होती है. धूम्रपान से हदृय रोग का खतरा बढ़ता है. साथ ही तंबाकू का धुँआ रहित रूप भी सामान रूप से हानिकारक है.

धुँआ रहित तंबाकू का सेवन
गोलबल एडल्ट तंबाकू सर्वेक्षण 2016-17 के अनुसार ,भारत में धुँआ रहित तंबाकू का सेवन धूम्रपान से कही अधिक है. वर्तमान में 42.4 फीसदी पुरुष,14.2 फीसदी महिलाएं और सभी वयस्को में 28.8 फीसदी ध्रूमपान करते है या फिर धुँआ रहित तंबाकू का उपयोग करते है. आकड़ो के मुताबिक़ इस समय 19 फ़ीसदी पुरुष, 2 फीसदी महिलाएं और 10. 7 फीसदी व्यस्क धूम्रपान करते है. जबकि 29.6 फीसदी पुरुष,12. 8 फीसदी महिलाएं और 21.4 फीसदी व्यस्क धुँआ रहित तंबाकू का उपयोग करते है.

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गैर सरकारी संस्था फाउंडेशन फॉर स्मोक फ्री वर्ल्ड द्वारा जारी आकड़ो में खुलासा हुआ है
– धूम्रपान करनेवाले 68 फीसदी लोगों ने बताया की वे धूम्रपान के बुरे प्रभावों के बारे में अच्छी तरह से जानते है.
-धूम्रपान करनेवाले 51 फीसदी लोगों ने बताया की वे इसे छोड़ने की योजना बना रहे है.
-41 फीसदी लोग ऐसे है जो स्मोकिंग छोड़ने की कोशिश कर रहे है और उन्हें इसके लिए किसी की मदद की जरुरत है.
-25 फीसदी लोग धूम्रपान छोड़ने के लिए ई-सिगरेट या वेपिंग डिवाइस का इस्तेमाल कर रहे है.

भारत में तंबाकू नीतियां एवं कानून
भारत सरकार ने तंबाकू के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न तरह के कानूनो अधिनियमित किए है. वर्तमान में भारत सरकार ने मई 2003 में राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कानून पारित किया है, जिसे (विज्ञापन का प्रतिषेद और व्यापार तथा वाणिज्य, उत्पादन, प्रदाय और वितरण का विनियमन ) सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम नाम दिया गया है. यह अधिनियम तंबाकू युक्त उत्पादों के किसी भी रूप अर्थात सिगरेट, सिगार, बीड़ी, गुटका, पान मसाला, खैनी, नस आदि पर लागू होता है.

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इस अधिनियम की निम्नलिखित धाराएं है
धारा चार : सभी सार्वजानिक स्थानों जैसे कि होटल, रेस्टॉरेंट, कॉफी हाउस, पब, बार और हवाई अड्डे के प्रतीक्षालयों तथा आम जनता द्वारा उपयोग किए जानेवाले कार्यस्थलों, शॉपिंग मॉल, सिनेमा हॉल, शैक्षणिक संस्थानों और पुस्तकालयो, अस्पातलो और सभागार और खुले सभागार, मनोरंजन केंद्रों स्टेडियम, रेलवे स्टेशन और बस स्टॉप आदि पर धूम्रपान निषेद वर्जित है.

धारा पांच : यह तंबाकू के सभी उत्पादों के विज्ञापनों के संवर्धन और प्रयोजन पर प्रतिबन्ध लगाता है. यह प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों रूप से विज्ञापन ऑडियो, विज़ुअल और प्रिंट मिडिया के सभी माध्यमों द्वारा तंबाकू उत्पादों के विज्ञापनों का निषद्द करता है. यह सिगरेट तथा अन्य तंबाकू उत्पाद कंपनियों द्वारा किसी भी तरह के प्रलोभन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के प्रायोजन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है.

धारा छह (क ) यह नाबालिक पर तंबाकू बिक्री करने पर प्रतिबंध लगाता है.
धारा छह (ख ) शिक्षा संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंद लगाता है. किसी भी शैक्षणिक संस्थान के सौ गज के दायरे के भीतर किसी भी तंबाकू उत्पाद की बिक्री का निशिद्द करता है.

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