Published On : Thu, Jul 7th, 2016

भाजपा-आरएसएस संगठन में मिल रहे हैं बदलाव के संकेत

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लंबे अरसे तक संघ की ओर से भाजपा के साथ सामंजस्य का काम देखते रहे संघ के सह सर कार्यवाह सुरेश सोनी की वापसी होगी।

BJP HQ
New Delhi/Nagpur:
मोदी मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव का निहितार्थ सिर्फ सरकार तक सीमित नहीं है। इसका संदेश भाजपा संगठन को भी है और कुछ हद तक संघ को भी। ऊंची उड़ान भरने वालों के पर देर-सबेर कतरे जा सकते हैं। लेकिन उससे पहले संघ और भाजपा के बीच सामंजस्य की कड़ी में भी कुछ हद तक बदलाव दिख सकता है।

लंबे अरसे तक संघ की ओर से भाजपा के साथ सामंजस्य का काम देखते रहे संघ के सह सर कार्यवाह सुरेश सोनी की वापसी होगी। ध्यान रहे कि 2014 लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उम्मीदवारी की घोषणा में भी उनकी अहम भूमिका थी। मंगलवार को विभागों के फेरबदल में सबसे चौंकाने वाला फैसला स्मृति ईरानी का था। उन्हें मानव संसाधन विकास मंत्रालय से हटा दिया गया। इसके कई कारण हो सकते हैं लेकिन एक तार संघ से भी जुड़ता दिख रहा है। सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि स्मृति का हटना कृष्ण गोपाल के लिए झटका है।

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कृष्ण गोपाल सुरेश सोनी की जगह भाजपा और संघ के बीच संयोजक बनाए गए थे। पिछले दिनों कभी-कभी ईरानी पर संघ के अतिप्रभाव में काम करने का आरोप भी लगता रहा था। और यही कारण था कि ईरानी के स्वभाव में कभी-कभार दंभ दिखा और विवाद भी हुए। सूत्रों की मानी जाए तो स्मृति को मानव संसाधन विकास मंत्रालय से हटाना परोक्ष संदेश है कि भाजपा नेतृत्व कृष्ण गोपाल की कार्यशैली से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। ऐसे में सुरेश सोनी की वापसी तय हो गई है।

अगले हफ्ते कानपुर में होने वाली संघ की बैठक में इसका औपचारिक एलान हो या न हो लेकिन यह संदेश स्पष्ट हो जाएगा कि सोनी एक साल की लंबी अवधि के बाद फिर से सक्रिय होंगे। सोनी ने 2014 लोकसभा चुनाव से पहले तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह के साथ मिलकर मोदी की प्रधानमंत्री पद पर उम्मीदवारी की घोषणा में अहम भूमिका निभाई थी। बाद में लालकृष्ण आडवाणी के विरोध और कुछ हद तक संघ के कुछ नेताओं की चुप्पी के बाद सोनी ने स्वास्थ्य वजहों से छुट्टी ले ली थी।

पिछले साल उत्तराखंड की एक बैठक में उन्होंने छुट्टी ली थी और उत्तर प्रदेश में होने वाली बैठक से फिर सक्रिय होंगे। बताते हैं कि संयोजक के तौर पर अगर कृष्ण गोपाल बने भी रहे तो यह तय कर दिया जाएगा कि भाजपा के साथ समन्वय के काम में सोनी की भी भागीदारी होगी। संभव है कि उसमें दत्तात्रेय होसबले भी शामिल रहें। जाहिर है, समीकरण कई स्तर पर बदलेंगे।

पार्टी के कई पदाधिकारी सकते में:अब नजरें अगले एक हफ्ते में संगठन के संभावित फेरबदल पर टिक गई हैं। जिस तरह सरकार में बदलाव हुआ, उससे पार्टी के कई पदाधिकारी भी सकते में हैं। प्रदर्शन तो आकलन का मापदंड होगा ही, सूत्रों की मानी जाए तो खतरा उनके लिए हो सकता है जो ‘ऊंची उड़ान’ भरते हैं।

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