Published On : Sun, May 10th, 2020

Video : प्रभाग 12 में क्वारंटाइन सेंटर बनाने का विरोध

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नागपूर– नागपूर शहर में लॉकडाउन के बावजूद कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही है. जिसके कारण संदिग्ध मरीजों को क्वारंटाइन करने के लिए शहर में कई जगहों पर सेंटर बनाएं गए है. लेकिन कई जगहों पर सेंटर ऐसी जगहों पर बनाएं जा रहे है जो भीड़भाड़ वाला परिसर है. ऐसे ही प्रभाग 12 में के.टी नगर और सुरेन्द्रगढ़ के बीच एक मनपा द्वारा खरीदी गई इमारत है, उसको क्वारंटाइन सेंटर बनाया जा रहा है. लेकिन इसी बिल्डिंग से सटकर केटी नगर के अपार्टमेंट है और इसी के साथ सुरेन्द्रगढ़,दिपक नगर, फ्रेंड्स कॉलोनी, गिट्टीखदान भी है, जहां लाखों की तादाद में नागरिक रहते है.

इस जगह क्वारंटाइन सेंटर बनने से अन्य नागरिकों की जान पर भी खतरा मंडरा रहा है. इसी के विरोध स्वरुप स्थानीय नागरिकों ने और क्षेत्र के विधायक विकास ठाकरे ने प्रशासन का विरोध किया है. मनपा की ओर से दो दिन पहले मजदूरों को लाकर इस इमारत की तैयारी की जा रही थी.

उस दौरान नागरिकों ने और विकास ठाकरे ने वहां पहुंचकर विरोध जताया . इसके बाद रविवार को भी कांग्रेस के कार्यकर्ताओ ने इस इमारत का गेट बंद कर दिया . कांग्रेस के सदस्य प्रमोद सिंह के अनुसार सभी कार्यकर्ता और पदाधिकारी इस समय पुलिस स्टेशन पहुंचे है, जहाँ इस मामले को लेकर उनकी चर्चा चल रही है.

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इस मामले में विधायक विकास ठाकरे ने जानकारी देते बताया की जिसको क्वारंटाइन सेंटर बनाया जा रहा है, वह नियमों के खिलाफ है. मनपा आयुक्त पुलिस के जोर पर नागरिकों की आवाज दबा रहे है. ठाकरे का कहना है कि 144 लागू होने के बावजूद नागरिकों के नल कनेक्शन कांटे जा रहे है. उन्होंने बताया की जब इस बिल्डिंग से सटकर दूसरी बिल्डिंग के नागरिक इस मामले को लेकर मनपा आयुक्त से मिलने जा रहे है तो उनसे नहीं मिला जा रहा है. ठाकरे ने कहा की वे इस मामले को लेकर गृहमंत्री से बात करेंगे.

आखिर क्यों शहर के बाहर क्वारंटाइन सेंटर की व्यवस्था नहीं की गई. ‘ नागपूर टुडे ‘ का सवाल ?

शहर के भीतर ही बिल्डिंग्स को क्वारंटाइन सेंटर बनाया जा रहा है. जिसके कारण दूसरे नागरिको पर भी अब खतरा मंडरा रहा है. कई देशो ने शहर के बाहर अस्थायी शेल्टर होम बनाएं है, जिसमे क्वारंटाइन मरीजो को रखा जा रहा है और कोरोना संक्रमित मरीजों को अलग से रखा जा रहा है. शहर के बाहर भी कई ऐसे संस्थान है, जहाँ प्रशासन की ओर से व्यवस्था की जा सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. काटोल रोड के फेटरी के पास रामदेव बाबा का बड़ा संस्थान है, उसे क्वारंटाइन सेंटर बना सकते थे, आसाराम का हजारो एकड़ में फैला आश्रम है, उसे भी कुछ दिनों के लिए क्वारंटाइन बना सकते थे.

इसी तरह सैकड़ो एकड़ में फैले राधास्वामी के आश्रम को भी क्वारंटाइन बना सकते थे. यह इसलिए मुमकिन था,क्योकि अभी सभी संस्थानों में काम बंद है. इसी के साथ मिहान में भी कई संस्थान ऐसे है जो बनकर तैयार है, लेकिन वहां काम शुरू नहीं है. सरकार और प्रशासन इसे भी इनकी अनुमति से ले सकती थी. लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया .

इसी के साथ शहर में कई राजनैतिक कार्यक्रम जब होते है तो 2 से 3 दिन में हजारो लोगों के लिए बैठने की व्यवस्था की जाती है,बड़े बड़े स्टेज लगाये जाते है. बड़े बड़े पंडाल लगाकर कार्यक्रम किए जाते है तो फिर इस समय शहर से बाहर इस तरह की व्यवस्था सरकार द्वारा क्यों नहीं की गई. क्यों शहर के नागरिकों की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. यह बड़ा सवाल इस समय नागरिकों के जहन में आ रहा है.

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