Published On : Mon, Jun 5th, 2017

ओसीएचआरआय इंटेन्सिव्हिस्ट टीम ल्युकेपेरेसिस उपचार प्रक्रिया में सफल


नागपूर:
ऑरेंज सिटी हॉस्पिटल अँड रिसर्च इन्स्टिट्यूट में क्रॉनिक मायलोयड ल्युकेमिया से पीड़ित २४ वर्षीय महिला पे ल्युकेपेरेसिस प्रक्रिया से इलाज करने में ट्रान्सफ्यूजन मेडिसिन स्पेशॅलिस्ट डॉ. शीला मुंदडा, डॉ. आशिष शुक्ला आणि ओसीएचआरआय इंटेन्सिव्हिस्ट टीम इनचार्ज डॉ. गणेश बुरे की टीम सफल रही है .

इस अवसर पर डॉ. शीला मुंदडा ने कहा कि, अक्सर खून में ल्युकेमिया कोशिकाओं का प्रमाण बढ़ने से सामान्य परिसंचरण की प्रक्रिया में बाधा निर्माण हो जाती है. ल्युकेपेरेसिस इस प्रक्रिया से मरीजों पे इलाज किया जाता है . इस प्रक्रिया में, खून एक विशिष्ट प्रकार की मशीन से भेजा जाता है जो सफेद रक्त कोशिकाओं (ल्यूकेमिया सेल्स) को समाप्त कर रक्त कोशिकाओं और प्लाज्मा को वापस खून में भेजा जाता है। इस प्रकार हायपर ल्युकोसायटॉसिस इस बीमारी पे ल्युकेपेरेसिस प्रक्रिया सुरक्षित है और ओसीएचआरआय में उपलब्ध है .

इस बीमारी के बारे में जानकारी देते हुए आशिष शुक्ला ने कहा की हायपर ल्युकोसायटॉसिस का प्रमाण विशेष रूप से मस्तिष्क और फेफड़ों में दिखाई देता है. इस कारन सेरेब्रोव्हस्क्युलर और पल्मोनरी लेकोस्टेसिस असमान हो जाते है. अमेरिकन सोसायटी ऑफ अफेरेसीस और अमेरिकन असोसिएशन ऑफ ब्लड बॅंक ने प्रकाशित किये हुए मार्गदर्शक सिद्धांतों में कहा जाता है कि, ल्युकेपेरेसिस ये प्रक्रिया हाइपर ल्युकोसायटॉसिस इस बिमारी पे उपयुक्त है .

इस वक्त डॉ. अनूप मरार ने अपना मत व्यक्त करते हुए कहा की रक्तसंक्रमण दवाई ये दवाइयोंकी एक समर्पित शाखा है जो रक्त और रक्त संक्रमण के घटकोंसे संबंधित है . यह एक अलग प्रक्रिया है जो सुरक्षित रूप से निभाना महत्वपूर्ण है. इस प्रक्रिया के लिए डॉ. शीला मुंदडा और डॉ. रवि वानखेडे के नेतृत्व में ट्रान्सफ्युजन मेडिसिन का विशेष विभाग कार्यरत है .