Published On : Thu, Jun 9th, 2022
By Nagpur Today Nagpur News

मतदाता सूची में नाम से होगी पहचान ओबीसी की

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नागपुर– राज्य सरकार ओबीसी के राजनीतिक आरक्षण को बरकरार रखने के लिए पुरजोर प्रयास कर रही है. ‘इंम्पेरिकल डेटा’ एकत्र करने के लिए मतदाता सूचियों का उपयोग किया जा रहा है। मतदाता नाम से ओबीसी है या नहीं, यह प्रशासन तय करेगा। इसी के आधार पर ओबीसी मतदाताओं का प्रतिशत निर्धारित किया जाएगा।

ओबीसी के राजनीतिक आरक्षण को पूर्ववत करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा कुछ मानदंड निर्धारित किए गए हैं। सरकार इन मानदंडों को पूरा करने के लिए प्रयासरत है। राज्य सरकार ने कहा था कि ओबीसी के राजनीतिक आरक्षण के बिना चुनाव नहीं होंगे।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को खारिज करने के बाद, राज्य चुनाव आयोग ने स्थानीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया शुरू की। ओबीसी का ‘इंम्पेरिकल डेटा’ एकत्र करने का काम एक समर्पित आयोग के माध्यम से शुरू किया गया था। इसके लिए आयोग ने हाल ही में राज्य स्तर पर ओबीसी संगठनों से राय मांगी थी।

इस बीच, शीर्ष अदालत ने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को बरकरार रखा और उनके ओबीसी आरक्षण को बरकरार रखा। इसी क्रम में अब सरकार से जानकारी जुटाई जा रही है. मध्य प्रदेश सरकार ने मतदाता सूची के आधार पर ओबीसी की संख्या जमा की थी। इसलिए महाराष्ट्र सरकार वोटर लिस्ट में ओबीसी की संख्या को भी ध्यान में रखेगी। रिकॉर्ड, रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध सूचनाओं को भी आधार बनाया जाएगा। यह जानकारी 10 जून तक प्रस्तुत करना है। सूची में नाम तय करेगा कि संबंधित मतदाता ओबीसी है या नहीं।

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उल्लेखनीय यह है कि उक्त आंकड़े को संकलित करने के लिए 25 जनवरी की मतदाता सूची का इस्तेमाल किया जाएगा। नागपुर जिले में करीब 20 लाख मतदाता हैं. अनुमान है कि यह संख्या शहर में लगभग 24 लाख घरों की है।

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