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    Published On : Tue, Oct 7th, 2014
    Vidarbha Today | By Nagpur Today Vidarbha Today

    चिमुर : ओबीसी जातियां लिखेंगी चिमुर का भाग्य


    चिमुर।
    चिमुर विधानसभा क्षेत्र में कुनबी और तेली जैसे ओबीसी एवं दलित वर्ग की संख्या काफी अधिक है. यही जातियां इस क्षेत्र के उम्मीदवारों का भाग्य तय करेंगी. ओबीसी जातियों की समस्याएं और मुद्दे अभी भी प्रलंबित हैं. इसलिए इस चुनाव में उनकी भूमिका निर्णायक साबित होगी.

    ओबीसी वोटों की ताकत से इनकार नहीं
    इन मतदाताओं की आबादी 80 हजार से अधिक बताई जाती है. कहा जाता है कि ये आबादी जिसके पीछे खड़ी हो जाएगी वही जीतकर आएगा. भाजपा के पूर्व सांसद महादेवराव शिवणकर और नामदेवराव दिवटे भाजपा के कार्यकर्ताओं और इन्हीं जातियों के भरोसे ही चुनकर आते रहे. ओबीसी वोटों की ताकत से कोई भी इनकार नहीं कर सकता. युती और गठबंधन के टूटने के कारण सभी पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ रही हैं.

    लाभ या हानि ?
    अधि. गोविंदराव भेंडारकर राकांपा के उम्मीदवार हैं और ओबीसी की समस्याओं की अच्छी समझ रखते हैं. कांग्रेस उम्मीदवार डॉ. अविनाश वारजुकर की ओबीसी को लेकर भूमिका और किए गए काम लोगों को याद हैं. चिमुर में कहा जा रहा है कि, ‘जो ओबीसी की बात करेगा, वही चिमुर क्षेत्र में राज करेगा.’ भाजपा ने धनराज मुंगले अथवा वसंत वारजुकर को उम्मीदवार बनाया होता तो उन्हें काफी फायदा हुआ होता. दोनों को ओबीसी का अच्छा समर्थन प्राप्त है. यह देखनेवाली बात होगी कि भाजपा द्वारा अल्पसंख्यक कीर्तिकुमार भांगड़िया को उम्मीदवार बनाने को ओबीसी किस रूप में लेती है.

    तिकोना संघर्ष
    राजनीतिक हलकों में कहा जा रहा है कि सारे ओबीसी एकजुट हो जाएं तो ओबीसी प्रवर्ग का विधायक बन सकता है. ओबीसी जातियों के विकल्प के रूप में डॉ. अविनाश वारजुकर, गजानन बुटके और अधि. गोविंदराव भेंडारकर मैदान में हैं. वैसे, यहां मुकाबला तिकोना होने के चित्र दिखाई दे रहे हैं.

    Representational pic

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