
दि 9 मई 2026 को विदर्भ के 13 लाख व्यापारियों की अग्रणी व शीर्ष संस्था नाग विदर्भ चेंबर ऑफ काॅमर्स द्वारा गणेशपेठ स्थित होटल द्वारकामाई में आयोजित कार्यकारिणी सभा में नए आयकर ऍक्ट 2025 के .प्रावधानों पर सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार में मुख्य अतिथी श्री प्रमोद जी निकालजे (निदेशक, आयकर ( I & CI,नागपुर) एवं कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेट सीए महेन्द्र जी जैन ने सदस्यों का मार्गदर्शन किया।
सर्वप्रथम श्री प्रमोद जी निकालजे एवं वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट सीए महेन्द्र जी जैन का क्रमशः कार्यक्रम संयोजक सीए अश्विनी अग्रवाल व सहसंयोजक सीए उमंग अग्रवाल ने परिचय दिया एवं उनका स्वागत चेंबर के अध्यक्ष श्री फारूक अकबानी ने शाॅल, श्रीफल, दुपट्टे व पुष्पगुच्छ से उनका स्वागत-सत्कार किया।
आयकर निदेशक श्री प्रमोद निकालजे ने कहा कि 13 लाख व्यापारियों का प्रतिनिधीत्व करने वाली ऐसी संस्था में उन्हे करदाताओं का मार्गदर्शन करने हेतु आमंत्रित किया तद्हेतु चेंबर का धन्यवाद। आगे उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि व्यापारी वर्ग ज्यादा से ज्यादा टैक्स भुगतान करना चाहता है किंतु प्रावधानों की जटिलता के कारण ऐसा नहीं कर पाता। इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर आयकर विभाग ने प्रावधानों की जटिलताओं का सरलीकरण करते हुये आयकर ऍक्ट 2025 लागू किया है।
इस नए ऍक्ट में शब्दों की संख्या आधी कर दी गयी है। टीडीएस के लिए सिर्फ अब असेसमेंट वर्ष लागू कर दिया है। साथ ही टीडीएस व टीसीएस की एक-एक धाराएं रहेगी। नया ऍक्ट तकनीकी आधारित, डिजीटल, पारदर्शी और टैक्स पेयर्स फ्रेंडली है। उन्होंने सभी करदातों से निवेदन कि वे अपने आयकर रिर्टन में सभी छोटे-बड़े ट्रांजेक्शन के साथ सभी नगद ट्रांजेक्शन की जानकारी दे, क्योंकि आयकर विभाग आयकर रिर्टन के अलावा करदाता के इन्वेस्मेंट, संपत्ती खरीदी-विक्री, महंगी गाड़ियों की खरीदी आदि माध्यमों से भी करदाता की जानकारी जुटाता है साथ ही उन्होंने सदस्यों से कहा कि यदि विभाग द्वारा किसी भी प्रकार का नोटिस भेजा जाता है तो उसका गंभीरता से जबाव दे। नोटिसों को अनदेखा करने या संतोषजनक सही जवाब न देने पर विभाग द्वारा गंभीर कार्यवाही के प्रावधान भी है।
व्यापारी व आयकर विभाग सिक्के के दो पहलू है। दोनों ही आय उत्सर्जित करने का कार्य का करते है। व्यापारी वर्ग आय भी निर्माण के साथ-साथ रोजगार भी पैदा करता है। विभाग की सदैव इच्छा है कि करो के अनुपालन में व्यापारियों को कोई परेशानी न हो, इसी तरह करदाता ने भी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ करो का अनुपालन करना चाहिए। विभाग सदैव व्यापारी की सहायता के उपलब्ध है आगे भी इसी तरह व्यापारियों के बीच आकर विभाग द्वारा उनका मार्गदर्शन किया जाता रहेगा। साथ ही यदि व्यापारियों को प्रावधानो के संरचना या संरचना को लेकर कोई समस्या हो तो उसका प्रतिवेदन विभाग दे। वे व्यापारियों के प्रतिवेदनों को वित्त मंत्रालय अवश्य पहुचायेंगे।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट सीए महेन्द्र जैन ने सदस्यों का मार्गदर्शन करते हुऐ कहा कि नया आयकर ऍक्ट लागू होने से पुराना आयकर ऍक्ट 1961 पुरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है। मार्च 2026 के पहले के मामलों पर कार्यवाही पुराने ऍक्ट के अनुसार ही होगी। नया ऍक्ट 90% पुराने ऍक्ट की तरह ही है सिर्फ शब्दों की संरचना, सेक्शन नंबर, कोड आदि बदलाव कर शब्दों को कम किया गया है मुख्य प्रावधान पुराने ऍक्ट जैसे ही है। विरोधाभास हर ऍक्ट में होता है करदाता ऍक्ट को कैसे देखता है यह करदाता पर निर्भर करता है।
आगे उन्होंने कहा कि इस नए ऍक्ट में टीडीस को लेकर कुछ महत्वूपर्ण बदलाव किए गए है जैसे अब एक ही चालान मल्टीहेड के चालान भरे जा सकते है। पार्टनरशीप फर्मो के लिए टीडीएस नियमों में कई बदलाव किए गए है। इस ऍक्ट में मध्यम व छोटे करदाताओं के लिए सख्त प्रावधान किया गया है कि यदि 30 सिंतबर ऑडिट नहीं होता है तो पहले दिन से ही रू. 75000/- पेनल्टी लगेगी है और यदि 31 अक्टूबर तक भी ऑडिट नहीं होता है तो यह पेनल्टी दोगुना यानी रू. 1.5 लाख हो जायेगी। पहले पेनल्टी लगने पर करदाता अपील में जा सकते थे और इसके बाद पेनल्टी माफ हो जाती थीं किंतु नए कानून में पेनल्टी को फीस में बदल दिया गया है अर्थात करदाताओं द्वारा इसका भुगतान करना आवश्यक होगा।
सीए महेन्द्र जी जैन सभी करदाताओं से निवेदन किया कि सभी अपने मोबाइल नं. व ईमेल विभाग के विभाग के पास अपडेट करवा ले ताकि विभाग द्वारा भेजी कोई सूचना या नोटिस की जानकारी उनको मिलती रहे, क्योंकि कई मामलों में नोटिसों का जवाब न देने पर शत प्रतिशत पेनल्टी का भी प्रावधान है। आयकर विभाग ने नए ऍक्ट की जानकारी देने के लिए “कर सेतु” बुकलेट निकाला है, जिसका व्यापारी वर्ग लाभ अवश्य ले। श्री प्रमोद जी निकालजे एवं सीए महेन्द्र जी जैन सदस्यों के सभी सवालों का सरलता से आसान भाषा में जवाब दिया।
कार्यक्रम का संचालन चेंबर के उपाध्यक्ष कार्यक्रम संयोजक सीए अश्विनी अग्रवाल ने किया तथा आभार प्रदर्शन सहसचिव श्री दिपक अग्रवाल ने किया।
इस अवसर पर प्रमुखता से सर्वश्री – अध्यक्ष – फारूक अकबानी, पुर्व अध्यक्ष – श्रीगोपाली जी सोनी, हेमंत जी खुंगर, जगदीश जी बंग, अश्विन प्रकाशजी मेहाड़िया (अग्रवाल), उपाध्यक्ष – स्वप्निल अहिरकर, सीए अश्विनी अग्रवाल, उमेश पटेल, सचिव – सीए हेमंत सारडा, सहसचिव – दिपक अग्रवाल, अशोक संघवी, मनीष जेजानी, बड़ी मात्रा में कार्यकारिणी सदस्य, विशेष आमंत्रित सदस्य, व्यापार संगठनों अध्यक्ष/सचिव/प्रतिनिधी व सदस्य उपस्थित थे।
उपरोक्त जानकारी प्रेस विज्ञप्ति द्वारा सचिव सीए हेमंत सारडा ने दी।








