Published On : Mon, Nov 19th, 2018

अब सम्पति कर संकलन का जल्द निजीकरण

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स्थाई समिति सभापति ने दिया संकेत

नागपुर : पिछले एक दशक पूर्व तक प्रत्येक मुलभुत सह मनपा अंतर्गत होने वाले कार्य मनपा प्रशासन अपने सम्बंधित विभाग मार्फ़त करती थी.लेकिन अब आलम यह हैं कि प्रत्येक मामले में मनपा को निम्न,दूरदर्शिता का आभाव,असक्षम दर्शाकर मनपा के मलाईदार कामों का निजीकरण किया जा रहा हैं.इस क्रम में जल्द ही मनपा का कर संकलन का निजीकरण करने का संकेत मनपा स्थाई समिति सभापति ने दिया।

ज्ञात हो कि सत्तापक्ष पिछले १२ वर्ष से मनपा पर काबिज हैं.इनके कार्यकाल के आसपास पानी और कचरा संकलन का निजीकरण किया गया.क्यूंकि तब दर्शाया गया था कि मनपा के अधिकारी वर्ग असक्षम और निठल्ले हैं.इन प्रकल्पों पर मासिक ६ से ७ करोड़ फूंकने के बाद भी आजतक सफलता नहीं मिली।

मनपा के तकनिकी अधिकारियों को प्रकल्प निर्माण करने में असक्षम बतलाकर तब से इनसे प्रकल्प निर्माण हेतु ‘प्रोजेक्ट रिपोर्ट’ तैयार करने का काम छीन कर सत्तापक्ष के करीबी ‘पीएमसी’ को काम देकर मनपा के पैसे बहाए गए लेकिन एक भी मसले में मनपा को सफलता नहीं मिली।

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अब जब मनपा के अधिकारी सेवानिवृत हो गए,जैसे रामनाथ सोनावणे, रिज़वान सिद्दीक़ी,शशिकांत हस्तक सह दर्जन भर अधिकारियों को मनपा प्रशासन ने सत्तापक्ष के सिफारिश पर मनपा के विभिन्न विभागों से जुडी प्रकल्पों के लिए विशेषज्ञ के रूप में मोटी-मोटी वेतन श्रेणी में ठेकेदारी पद्धति पर तैनात किये,रामनाथ सोनावणे को तो महापौर ने मनपा आयुक्त के वेतन के ढाई गुना अधिक वेतन पर मनपा में तैनात किये।

मनपा की आधा दर्जन से अधिक विभाग और लगभग एक दर्जन प्रकल्प का निजीकरण हो चूका हैं.मनपा प्रशासन के पास शिवाय प्रशासकीय विभाग,अग्निशमन विभाग ही निजीकरण के दूर हैं। इनके भी कुछ कार्यो का निजीकरण जैसे अग्नि सुरक्षा उपकरण लगाने की मंजूरी,प्रस्ताव तैयार करना आदि का निजीकरण हो चूका हैं.

उक्त निजीकरण के पूर्व मनपा का काम पर पूर्ण अंकुश और खर्च कम तो होता ही था,साथ में समय की बचत भी हुआ करती थी.अब इस निजीकरण के क्रम में मनपा अगले वर्ष से संपत्ति कर संकलन का काम का निजीकरण करने किन योजना पर चिंतन कर रही हैं.

उल्लेखनीय यह हैं कि उक्त निजीकरण और केंद्र व राज्य सरकार के प्रकल्पों में मनपा की अल्प भागीदारी (करोड़ों में) होने से मनपा की आर्थिक स्थिति चरमरा गई हैं.संभवतः मासिक जीएसटी अगले माह से ८६.५० करोड़ होने सह बकाया विशेष अनुदान १७५ करोड़ मिलते ही मनपा की स्थिति सम्मान जनक तो हो जाएंगी लेकिन जबतक मनपा की आर्थिक स्थिति खुद के बल पर मजबूत नहीं हो जाती तबतक मनपा आर्थिक मामलों में ढुलमुल ही रहेंगी।

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