Published On : Wed, Aug 22nd, 2018

सैकड़ों अनापत्ति प्रमाण पत्र मामलों को अकेले निपटाते हैं चंदनखेड़े

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नागपुर : मनपा में अग्निशमन विभाग हेतु १३ स्टेशन के लिए ८५७ पद मंजूर हैं, लेकिन ४०३ पद रिक्त होने के कारण लाभ के पद पर कई कर्मी/अधिकारी अपने अपने राजनैतिक पहुंच से डटे हुए हैं. वहीं जनता के जान-माल को खतरे में रख कर मनपा प्रशासन की अड़चनें बढ़ाते हुए अपनी रोटियां सेंक रहे हैं.

नागपुर महानगरपालिका अग्निशमन विभाग के अधीन आनेवाले क्षेत्र अंतर्गत भवन निर्माण के लिए नेशनल बिल्डिंग कोड नियमावली में ९ वर्ग हैं. इस ९ वें वर्ग के ४ दर्जन से अधिक उप वर्ग हैं.इनमें होटल,उद्योग,शाला,महाविद्यालय,अस्पताल,शीतगृह,शोरूम आदि आदि प्रमुखता से शामिल हैं. इन सभी वर्गों के तहत आवेदकों के निर्माणकार्य में लगाए जाने वाले अग्नि सुरक्षा उपकरणों की जाँच कर अनापत्ति प्रमाण पत्र देने की सिफारिश का अधिकार एक ही अधिकारी को दिया गया हैं. क्यूंकि एक ही अधिकारी के पास उक्त अधिकार होने से भ्रस्टाचार का प्रमाण शबाब पर पहुँच चुका हैं.

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सूत्र बतलाते हैं कि उक्त अधिकारी इस प्रमाणपत्र देने हेतु सिफारिश करने के रोजाना आधा दर्जन मामलों को निपटाते हैं. वह भी मुंहमांगी कीमत अदा करने वालों के पक्ष में सकारात्मक सहमति देते हैं.

मनपा अग्निशमन विभाग में मुख्य अग्निशमन अधिकारी और उक्त स्थानाधिकारी प्रभारी पद पर पदासीन हैं. उक्त अधिकारी पर पहले से ही दो प्रकरण चल रहे हैं. गायत्री इंड्रस्ट्रीज प्रकरण में प्रभारी अग्निशमन स्थानाधिकारी ने उक्त अधिकारी का बचाव कर सिर्फ एक ‘इंक्रीमेंट’ रोक दिया. दूसरे प्रकरण में चिल्ड्रेन पार्क के निकट टावरी इलेक्ट्रॉनिक्स को भी बिना जाँचे एनओसी देने का मामला भी उछला और फिर बारीकी से दबा दिया गया.

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इसमें कहा क्या कि किसी भी भवन/इमारत के निर्माण कर्ता/आर्किटेक्ट/अधिकृत एजेंट आवेदन सह प्लान प्रभारी अग्निशमन अधिकारी के समक्ष पेश करता है. अग्निशमन अधिकारी फिर संबंधित विभाग के स्टेशन ऑफिसर के पास भेज देते हैं. स्टेशन ऑफिसर आवेदक का प्रोविजनल अनापत्ति प्रमाणपत्र देने संबंधी रिपोर्ट तैयार कर पुनः प्रभारी अग्निशमन अधिकारी के पास भेज देता है. इसके बाद आवेदक को प्रोविजनल अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करते हैं. रिपोर्ट के अनुसार अग्निसुरक्षा मशीनरी लगे होने की जांच का जिम्मा प्रभारी अग्निशमन विभाग के प्रमुख ने स्थानाधिकारी को दे रखा है. वह विभाग में एकमात्र अधिकारी है, जो विभाग अन्तर्गत अन्य जिलों सह नागपुर जिले की जवाबदारी संभाले हुए है. इनकी सहमति सह साठगांठ के बाद प्रभारी अग्निशमन विभाग प्रमुख मांग कर्ता आवेदक को अंतिम अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करते हैं.

मनपा नई प्रशासकीय इमारत निर्माण में गड़बड़ी
अग्निशमन विभाग के नियमानुसार मनपा नई प्रशासकीय इमारत के निर्माण में भारी गड़बड़ी है. इसका बेसमेंट खतरनाक है. एनबीसी नियमों को दरकिनार किया गया. प्रशासन जब खुद के इमारतों के लिए नियमों को ताक पर रख सकती हैं तो फिर शहर के इमारतों आदि के लिए जारी की गई एनओसी शक के दायरे में आना लाज़मी है. अर्थात मनपा अग्निशमन विभाग में गुणवत्तापूर्ण अधिकारी-कर्मी के जगह जुगाड़ू की भर्ती व तैनातगी की गई इसलिए पिछले ५ वर्षों में जितनी भी एनओसी जारी की गई,सभी की पुनः स्वतंत्र एजेंसी से जाँच होनी चाहिए. विवादास्पद एंप्रेस माल पर मेहरबान मनपा

जल कर,संपत्ति कर का करोड़ों में बकायेदार को मनपा अग्निशमन विभाग ने नियमों को तोड़मरोड़ कर फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करते रहे. क्यूंकि बड़े सफेदपोश से सम्बंधित है, इसलिए आजतक अड़चन में नहीं आ पाई. पूर्व महापौर ने अड़चन लाने की शुरुआत की थी तो उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से फ्लैट देकर मुख बंद कर दिया गया. इसके बाद के महापौर ने बड़ी कीमत मांगी तो उसके परिवार के समक्ष कीमत पहुँचाने से इस महापौर का घर में ही भंडाफोड़ हो गया तब से भड़के हुए हैं. मौके की तलाश में हैं.

नियमित वेतन नहीं लेकिन रखते है महंगी कार
स्थानाधिकारी ने नवंबर २०१५ को सफारी अपने परिजन के नाम खरीदी। वे खुद को चंद्रपुर के एक विधायक का सगा बतलाते हैं. अग्निशमन विभाग का उक्त अधिकारी कम से कम व्यापारियों को मुफ्त में अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं ही देता है. व्यापारियों,बिल्डरों को प्रत्येक जायज और नाजायज एनओसी के एवज में कम से कम ५ आंकड़ों में कीमत चुकानी ही पड़ती हैं. २४ मीटर से ऊँची ईमारत/बांधकाम का प्रोविशनल और कम्प्लाइंस चंदनखेड़े ही निपटाते हैं.इससे नीचे का प्रोविशनल सम्बंधित स्टेशन अफसर और कम्प्लाइंस चंदनखेड़े संभालते हैं.

एनओसी प्राप्तकर्ताओं की मांग
स्थानाधिकारी चंदन का जिम्मेदारी कम कर सभी स्टेशन ऑफिसर को शुरू से अंत तक रिपोर्ट तैयार सह अग्निसूरक्षा यंत्र लगाने/लगाए जाने की जांच का जिम्मा दिया जाए ताकि ही रहे भ्रष्टाचार को कम किया जा सके। साथ ही स्थनाधिकारी चंदन के जांच के बाद जारी हुए अंतिम अनापत्ति प्रमाण पत्र सभी मामले की जांच स्वतंत्र जांच एंजेसी से की जानी चाहिए.

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