Published On : Fri, Jul 28th, 2017

दहेज उत्पीड़न के मामलों में रिपोर्ट होती ही सीधे गिरफ्तारी नहीं: सुप्रीम कोर्ट

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Supreme Courtनई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दहेज उत्पीडन के मामलों में कानून के दुरुपयोग को लेकर अहम दिशा-निर्देश जारी किए हैं। भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 498 (ए) (दहेज प्रताड़ना) के गलत इस्तेमाल से चलते सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ये गाइडलाइन जारी की। दहेज प्रताड़ना के मामलों में अब पति या ससुराल वालों को शिकायत के बाद सीधे गिरफ्तार नहीं किया जा सकेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि हर जिले में एक परिवार कल्याण समिति का गठन किया जाए। जो दहेज के मामलों में रिपोर्ट दे, कोर्ट ने साफ कहा है कि समिति की रिपोर्ट आने तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि जिले की लीगल सर्विस अथारिटी यह समिति बनाए जिसमें तीन सदस्य हों।

जिला जज थोड़े-थोड़े वक्त के बाद समिति का कामकाज जांचते रहें। समिति में कानूनी स्वयंसेवी, सामाजिक कार्यकर्ता, सेवानिवृत्त व्यक्ति को शामिल किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ए.के. गोयल और जस्टिस यू.यू. ललित की बेंच ने कहा है कि अगर महिला जख्मी है या फिर उसकी प्रताड़ना की वजह से मौत हो जाती है तो फिर वह केस इस गाइडलाइन के दायरे से बाहर होगा और ऐसे मामले में गिरफ्तारी पर कोई रोक नहीं होगी। सर्वोच्च अदालत ने कुछ समय पहले भी इस कानून के दुरुपयोग पर चिंता जाहिर की थी।

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