नागपुर: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नोटबंदी के असर से आम नागरिकों के साथ नागपुर महानगरपालिका भी अछूती नहीं है। मनपा में कुल 150 नामजद नगरसेवक है। सभी को हर माह मानधन दिया जाता है। अब तक यह मानधन नगदी में दिया जाता था, लेकिन नोटबंदी के बाद मनपा प्रशासन ने मानधन चेक से देना शुरू किया, जिससे नगरसेवक वर्ग काफी नाराज है।
गौरतलब है कि चुंगी और एलबीटी बंद होने के बाद मनपा गहरे आर्थिक संकट से जूझ रही है। मनपा प्रशासन सालों से वेतन, पेंशन के साथ-साथ ठेकेदारों का भुगतान भी देरी से करती आ रही थी। ऐसे में नोटबंदी ने मनपा की मुसीबत और बढ़ा दी। इस चक्कर में मनपा के पास विभिन्न करों से करोड़ों के पुराने नोट जमा हो गए हैं। वह अविलंब बैंको में जमा करवाए गए।
मनपा के वित्त अधिकारी गाडगे के लंबी छुट्टी पर चले जाने से मनपा के ठेकेदारों का भुगतान थम गया। इससे ठेकेदारों में भी काफी रोष है। इसी बीच मनपा प्रशासन ने नगरसेवकों का अक्टूबर माह का बकाया मानधन चेक से देना शुरू कर दिया जिससे नगरसेवक भी नाराज बताए जा रहे हैं। नवंबर माह का मानधन बकाया है।
उल्लेखनीय यह है कि पिछले कई वर्षों से मुस्लिम लीग के नगरसेवक अस्लामुल्ला प्रत्येक आमसभा में मानधन बढ़ाने की पुरजोर मांग कर रहे हैं। चूंकि वे वह अकेले इस मुद्दे को ढो रहे हैं, इसलिए उसकी मांग पर चर्चा भी नहीं हो रही है।
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